बिहार के नवादा जिले से एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक युवक के सिर में टांके लगे हुए हैं. इस वीडियो को देखकर लोग कह रहे हैं कि सिर में टांकों की जगह स्टेपलर की पिन लगा दी गई है. इसी वजह से यह वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो के ज़रिए डॉक्टर के कौशल और तरीके पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं. अब इस मामले में दो कहानी निकलकर सामने आई है.
आजतक ने इसकी पड़ताल करने के लिए नवादा के सिविल सर्जन विनोद कुमार चौधरी से बातचीत की और पूरे मामले को समझने का प्रयास किया. सिविल सर्जन ने आजतक को बताया कि यह स्टिच हैं या स्टेपलर पिन, इसकी जांच करने के लिए उन्होंने अधिकारियों की एक टीम गठित कर दी है. हालांकि घाव की हालत और तरीके को देखकर उन्होंने डॉक्टर के कौशल और तरीके पर भी सवाल उठाए हैं. अभी इसकी जांच होनी बाकी है कि क्या टांकों की जगह स्टेपलर पिन लगा दी गई थी.
यह पूरा मामला नवादा के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के नरोमुरार गांव का है जहां एक युवक 3 मार्च को एक हादसे में घायल हो गया था. युवक के सिर पर गहरा घाव हो गया था और खून बह रहा था. घायल युवक इलाज के लिए एक ग्रामीण डॉक्टर के पास पहुंचा जिसने युवक के घाव को बंद करने के लिए यह उपचार किया है.
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इलाज के तरीके पर सवाल
इलाज कराने वाले युवक के अनुसार, डॉक्टर ने घाव की गंभीरता को समझने या उसे टांके लगाने की बजाय एक सामान्य स्टेपलर मशीन का इस्तेमाल किया. हालांकि उस युवक को स्टिच मशीन की सही और पुख्ता पहचान है या ऐसा वो अपने संदेह के आधार पर कह रहा है, इसका खुलासा जाँच के बाद ही हो सकेगा.
लेकिन यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. लोग इस तरह के इलाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं. वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोग इन टांकों को सही और नई उपचार पद्धति के अनुरूप भी बता रहे हैं. सिविल सर्जन का कहना है कि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है.
नवादा के सिविल सर्जन विनोद कुमार चौधरी ने क्या कहा?
नवादा के सिविल सर्जन विनोद कुमार चौधरी ने वायरल वीडियो के बारे में 'आजतक' से बात करते हुए कहा कि उन्हें भी पक्का नहीं पता कि इसमें मेडिकल पिन इस्तेमाल की गई हैं या स्टेपलर पिन. उन्होंने इसकी जांच के लिए एक टीम बनाई है.
विनोद कुमार चौधरी ने यह भी अनुमान लगाया कि घटना नवादा के एक बहुत ही दूरदराज गांव में हुई है, इसलिए यह किसी MBBS डॉक्टर या सर्जन का काम नहीं लगता है, बल्कि गांव में काम करने वाले किसी झोलाछाप डॉक्टर का काम हो सकता है.
उन्होंने कहा कि जांच के बाद अगर चिकित्सक गलत तरीके से घाव को बंद करने के लिए दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ एक्शन भी लिया जाएगा.
केस में अब दो अलग-अलग बातें आई सामने
इस कहानी में अब दो बातें सामने आई हैं. जिस आदमी के सिर पर पिन लगाया गया था, उसने दो अलग-अलग कहानियां बताई हैं.
कहानी 1
पहली बात यह सामने आई है कि जिस आदमी के सिर पर पिन लगाया गया था, उसने मीडिया को बयान दिया है कि 2 मार्च को उसका किसी व्यक्ति के साथ झगड़ा हो गया था. दूसरे व्यक्ति ने उसके सिर पर पत्थर मार दिया, जिससे उसका सिर फट गया. इसके बाद एक ग्रामीण डॉक्टर ने उसके सिर पर कॉपी-किताब वाले स्टेपलर पिन लगाकर इलाज किया.
उस व्यक्ति ने बताया कि 2 मार्च को सिर में लगाए गए पिन को उसने 11 मार्च को निकलवा भी दिया था.
कहानी 2
दूसरी बात यह सामने आई है कि जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ, तो सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए. जब जांच टीम उस व्यक्ति के पास पहुंची, तो उसने लिखित बयान में दूसरी कहानी बताई.

उसने कहा कि 2 मार्च को वह साइट पर काम कर रहा था और वहीं गिर गया, जिससे उसे चोट लग गई. इसके बाद एक ग्रामीण डॉक्टर ने उसके सिर पर सर्जिकल पिन लगा दिया.
जांच टीम को उसने यह भी लिखकर दिया कि उसके सिर में कॉपी-किताब वाला स्टेशनरी पिन नहीं लगाया गया था, जैसा कि वायरल वीडियो में बताया जा रहा है. साथ ही उसने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उसे किसी से कोई शिकायत नहीं है.