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पटरी पर मौत इंतजार कर रही थी, लेकिन देवदूत बने लोको पायलट... 4 जिंदगियां बचाईं, DRM ने किया सम्मानित

समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से एक बच्चे, दो महिलाओं और एक युवक समेत चार लोगों की जान बचा ली. तीन अलग-अलग घटनाओं में इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेनों को समय रहते रोक दिया गया. उनके इस मानवीय कार्य के लिए डीआरएम ने सभी रेलकर्मियों को सम्मानित किया.

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पहली घटना में मां और मासूम को बचाया.(Photo: Jahangir Alam/ITG)
पहली घटना में मां और मासूम को बचाया.(Photo: Jahangir Alam/ITG)

समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों ने अपनी सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है. तीन अलग-अलग घटनाओं में रेलकर्मियों ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर एक मासूम बच्चे, दो महिलाओं और एक युवक समेत चार लोगों की जान बचा ली. इन सभी लोगों ने अलग-अलग कारणों से रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर अपनी जान देने की कोशिश की थी.

रेलवे प्रशासन के मुताबिक, सभी मामलों में लोको पायलटों ने असाधारण सतर्कता दिखाई. समय रहते ट्रेन रोकने के साथ ही वे ट्रैक पर उतरे और लोगों को समझा-बुझाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. बाद में सभी को स्थानीय ग्रामीणों के हवाले कर दिया गया.

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इन साहसिक और मानवीय कार्यों को देखते हुए समस्तीपुर रेल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ज्योति प्रकाश मिश्रा ने सभी लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया.

पहली घटना में मां और मासूम को बचाया

पहली घटना समस्तीपुर रेल मंडल के ढेंगे और रीगा स्टेशन के बीच हुई. रक्सौल से दरभंगा जा रही 75230 मेमू पैसेंजर ट्रेन जैसे ही उस स्थान पर पहुंची, एक महिला अपने गोद में बच्चे को लेकर रेलवे ट्रैक पर लेट गई.

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ट्रेन के लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने महिला को देखते ही बिना एक पल गंवाए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए. ट्रेन सुरक्षित दूरी पर रुक गई. इसके बाद दोनों रेलकर्मी नीचे उतरे और महिला को ट्रैक से हटाने का प्रयास किया.

महिला पहले मानने को तैयार नहीं थी. तब सहायक लोको पायलट ने बच्चे को अपनी गोद में लेकर आगे बढ़ना शुरू किया. बच्चे के पीछे-पीछे महिला भी ट्रैक से हट गई. पूछताछ में उसने बताया कि पति के छोड़ देने से परेशान होकर वह बच्चे के साथ आत्महत्या करने आई थी. बाद में दोनों को ट्रेन से स्टेशन लाया गया और ग्रामीणों के सुपुर्द कर दिया गया.

मालगाड़ी के सामने लेटी महिला को भी बचाया

दूसरी घटना सिकटा स्टेशन के पास हुई. रक्सौल से चल रही एक मालगाड़ी वहां पहुंची तो लोको पायलट मनोज कुमार-2 और सहायक लोको पायलट मनी भूषण कुमार को पहले ट्रैक पर कुछ पड़ा हुआ दिखाई दिया.

समस्तीपुर

जैसे ही ट्रेन कुछ और आगे बढ़ी तो पता चला कि रेलवे ट्रैक पर एक महिला लेटी हुई है. भारी-भरकम मालगाड़ी होने के बावजूद दोनों रेलकर्मियों ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी और संभावित बड़ा हादसा टाल दिया.

इसके बाद दोनों ट्रैक पर पहुंचे, महिला को समझाया और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर ग्रामीणों के हवाले कर दिया. ट्रैक पूरी तरह खाली होने के बाद ही मालगाड़ी को आगे रवाना किया गया.

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सिर पटरी पर रखकर लेटा युवक, फिर भी बच गई जान

तीसरी घटना 22 जून की है. ट्रेन संख्या 63346 समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन सहरसा की ओर जा रही थी. सलौना और इमली स्टेशन के बीच लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार-1 ने देखा कि करीब 25 वर्षीय एक युवक रेलवे ट्रैक पर सिर रखकर लेटा हुआ है.

हालात की गंभीरता को समझते हुए दोनों ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाया और ट्रेन को सुरक्षित दूरी पर रोक दिया. इसके बाद दोनों रेलकर्मी नीचे उतरे और युवक को समझाकर ट्रैक से हटाया. बाद में उसे भी ग्रामीणों के हवाले कर दिया गया.

रेलवे प्रशासन ने कहा कि ये घटनाएं साबित करती हैं कि रेलकर्मी केवल ट्रेन संचालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी मानवीय जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाते हैं. लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों की सजगता, त्वरित निर्णय और संवेदनशीलता की वजह से चार लोगों की जान बचाई जा सकी. इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने सभी संबंधित रेलकर्मियों को सम्मानित किया.

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