
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और भारत पर भी इसका असर पड़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश से अपील की थी कि तेल का इस्तेमाल समझदारी से करें, सोना खरीदना टालें और विदेश यात्रा कम करें.
इस अपील का असर अब दिखने लगा है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पैदल चलकर दफ्तर पहुंचे और शिक्षा मंत्री ने ई-रिक्शा से सफर किया. बिहार सरकार ने कई और कदम भी उठाए हैं.
10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के युद्ध की वजह से तेल और ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं. इस मुश्किल वक्त में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए हर नागरिक को अपना योगदान देना होगा. उन्होंने कहा कि तेल का इस्तेमाल कम करें, सोना खरीदना फिलहाल टालें और जरूरी न हो तो विदेश यात्रा भी स्थगित करें.
बिहार CM ने क्या किया?
शुक्रवार की सुबह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने सरकारी आवास 'लोक सेवक आवास' से निकले और पैदल चलकर करीब 500 मीटर दूर कैबिनेट सचिवालय दफ्तर पहुंचे. उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी थे. यह एक छोटा कदम था लेकिन इसका संदेश बड़ा था कि अगर राज्य का सबसे बड़ा नेता पैदल चल सकता है तो बाकी लोग भी तेल बचा सकते हैं.

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शिक्षा मंत्री ने क्या किया?
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी PM की अपील को माना. वो अपने सरकारी आवास से दफ्तर जाने के लिए ई-रिक्शा में बैठ गए. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हमें रोजमर्रा के तेल के इस्तेमाल को कम करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाने चाहिए.
बिहार सरकार ने और क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने सिर्फ नेताओं के पैदल चलने तक बात सीमित नहीं रखी. सरकार ने कई व्यावहारिक कदम उठाए हैं. पहला कदम है CM के काफिले का आकार घटाना. सम्राट चौधरी ने पहले ही अपने साथ चलने वाली गाड़ियों की संख्या कम कर दी थी जिसके बाद उनके मंत्रियों ने भी यही किया. दूसरा कदम है वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देना. जहां संभव हो वहां सरकारी कर्मचारी घर से काम करें ताकि रोज दफ्तर आने-जाने में तेल न जले.
तीसरा कदम है हफ्ते में एक दिन 'नो व्हीकल डे' यानी वाहन मुक्त दिन मनाने की योजना है. चौथा कदम है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठकें. सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जितना हो सके बैठकें वीडियो कॉल पर करें ताकि लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने की जरूरत न पड़े. पांचवां कदम है सरकारी कैंटीन में पाम ऑयल का इस्तेमाल कम करना. पाम ऑयल भी आयात होता है और इसकी खपत घटाने से विदेशी मुद्रा बचती है.