बिहार में एनडीए विधान परिषद चुनावों में सभी 10 सीटों पर जीत की तैयारी में जुटा है. यह चुनाव राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद की सदस्यता मिल सकेगी, जिससे वे मंत्री पद पर बने रह पाएंगे.
क्या है नियम?
हाल ही में दोनों नेताओं को बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन वे अभी तक विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, किसी भी गैर-सदस्य को मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है. इसी वजह से यह चुनाव दोनों मंत्रियों के लिए महत्वपूर्ण है.
कब होंगे चुनाव कार्यक्रम घोषित?
चुनाव आयोग द्वारा मई के अंतिम सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना है, लेकिन एनडीए ने अभी से सभी 10 सीटों पर जीत की रणनीति बना ली है. गठबंधन का लक्ष्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को एक भी सीट न जीतने देना है.
इन सीटों पर चुनाव
इन 10 सीटों में से नौ सीटें 28 जून 2026 को खाली होंगी, जबकि एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है, जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा देकर राज्यसभा का रास्ता चुना था. वर्तमान में इन सीटों पर जदयू के पांच, भाजपा के दो, राजद के दो और कांग्रेस का एक सदस्य था. अब इन सभी सीटों पर चुनाव होना है.
25 विधायकों का समर्थन जरूरी
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में एक विधान परिषद सदस्य चुनने के लिए 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है. राजद के पास 25 विधायक हैं और वह अपने सहयोगियों के साथ कम से कम एक सीट बचाने की कोशिश में है.
वहीं एनडीए के पास 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे उसे कम से कम नौ सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है. गठबंधन अब सभी 10 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप करने की रणनीति पर काम कर रहा है.
अगर निशांत कुमार और दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बनते हैं, तो वे औपचारिक रूप से राज्य विधानमंडल का हिस्सा बन जाएंगे और अपने मंत्री पद पर बने रहेंगे.