बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में 28 अप्रैल को हुए शूटआउट में घायल सभापति राजकुमार गुड्डू की मौत हो गई है. घटना के बाद से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया. इस शूटआउट में अपराधियों की गोली से सुल्तानगंज के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की पहले ही मौत हो चुकी थी.
इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी. गोली लगने के बाद राजकुमार गुड्डू का लगातार इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार उनकी मौत हो गई.
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सीएम ने जताया दुख, स्पीडी ट्रायल के निर्देश
राजकुमार गुड्डू के निधन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है. उन्होंने इस घटना में शामिल अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाने का निर्देश डीजीपी को दिए हैं.
मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है. वहीं, पुलिस इस मामले में पहले ही मुख्य आरोपी रामधनी यादव का एनकाउंटर कर चुकी है. इस शूटआउट में शामिल अन्य अपराधी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है और पूरे मामले की जांच जारी है.
चैंबर में चल रही थी श्रावणी मेला टेंडर से जुड़ी बैठक
सुल्तानगंज शूटआउट के टाइमलाइन पर नजर डालें तो 28 अप्रैल को करीब 4 बजे उस समय नगर परिषद के दफ्तर में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया, जब 3 से 4 की संख्या में हथियारबंद अपराधी अचानक कार्यालय परिसर में दाखिल हुए और सीधे चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के चैंबर की ओर बढ़ गए, जहां उस समय श्रावणी मेला 2026 को लेकर टेंडर और व्यवस्थाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी, जिसमें चेयरमैन के साथ जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.
निशाने पर थे चेयरमैन राजकुमार गुड्डू
अपराधियों ने चैंबर में घुसते ही अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और उनका मुख्य निशाना चेयरमैन राजकुमार गुड्डू थे, जिन्हें नजदीक से कई गोलियां मारी गईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े थे, जबकि मौके पर मौजूद अन्य लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और पूरे कार्यालय में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई.
चेयरमैन को बचाने आगे आए कार्यपालक पदाधिकारी
इस दौरान कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और चेयरमैन को बचाने की इरादे से अपराधियों से भिड़ गए और उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन इसी बीच अपराधियों ने उन पर भी गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
बीच-बचाव करने आए कृष्ण भूषण की चली गई जान
शूटआउट के इस घटना से स्पष्ट हो गया कि कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण कुमार भूषण अपराधियों के टारगेट पर नहीं थे, बल्कि राजकुमार गुड्डू अपराधियों के निशाने पर थे और कार्यपालक पदाधिकारी की जान चेयरमैन को बचाने के दौरान चली गई.
वहीं, घायल चेयरमैन राजकुमार गुड्डू को पहले भागलपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज दौरान 9 मई को उनकी मौत गई.
हमलावरों को मीटिंग की जानकारी थी
वहीं, घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा गया कि अपराधी पूरी तैयारी और सटीक जानकारी के साथ आए थे, क्योंकि वे सीधे चेयरमैन के चैंबर में पहुंचे और बिना समय गंवाए फायरिंग शुरू कर दी, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि हमले की पहले से योजना बनाई गई थी और हमलावरों को बैठक के समय और स्थान की पूरी जानकारी थी.
पैसे के लेन-देन और प्रभाव को लेकर तनाव
जांच के दौरान सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में श्रावणी मेले से जुड़े ठेके और टेंडर को लेकर चल रहा विवाद था, क्योंकि 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन में करोड़ों रुपये के ठेके जारी होते हैं, और इन्हीं ठेकों के बंटवारे को लेकर नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू और डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसमें पैसों के लेन-देन और प्रभाव को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था.
ठेके को लेकर विवाद
बताया जाता है कि रामधनी यादव और चेयरमैन राजकुमार गुड्डू का ठेके को लेकर हमेशा विवाद रहता था. रामधनी यादव चाहता था कि इलाके में जो भी ठेके दिए जाए वह उसके मुताबिक हो जिसका विरोध राजकुमार गुड्डू किया करता था.
आरोप है कि इसी विवाद के चलते डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के पति रामधनी यादव ने चेयरमैन को रास्ते से हटाने की साजिश रची और इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने दामाद और साले को भी साथ लिया, जिसके बाद तीनों ने मिलकर मंगलवार शाम इस हमले को अंजाम दिया.