
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में जंग के हालात हैं. अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर एक बड़े मिलिट्री ऑपरेशन, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के कई सैन्य और स्ट्रैटेजिक ठिकानों पर एयर स्ट्राइक किया है. इस हमले में ईरान ने अपने सबसे ताकतवर नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) को खो दिया. 86 साल के खामेनेई 1989 से लगभग 37 सालों तक ईरान की बागडोर संभाले हुए थे और देश को एक सख्त धर्मशासित सत्ता के रूप में आगे बढ़ा रहे थे.
खामनेई ने कई विद्रोहों और ऐतिहासिक उतार-चढ़ावों का सामना किया. अपने पूरे कार्यकाल के दौरान खामनेई ने अमेरिका और इजरायल का पूरजोर विरोध किया. 2016 याद कीजिए. वही साल, जब अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक झटके में अमेरिका से आने वाली कारों पर रोक लगा दी थी. तर्क बिल्कुल साफ और तल्ख था. कहा गया कि अमेरिकी कारें न तो भरोसे के काबिल हैं और न ही ईरान को इनकी ज़रूरत हैं. उस वक्त व्हाइट हाउस में बराक ओबामा थें और दुनिया ईरान-अमेरिका रिश्तों में नरमी तलाश रही थी.
आज वही खामेनेई, जिनका एक बयान बाज़ार की दिशा बदल देता था, जिनका एक आदेश देश के लिए नई नीति बन जाता था, उनका नहीं रहना ईरान को ऐसे झकझोर रहा है, जैसे किसी इमारत से उसकी नींव ही खींच ली गई हो. मध्य एशिया में इसे एक दौर का अंत कहा जा रहा है, जिसने ईरान की दिशा तय की थी. लेकिन 1978-79 में ईरान की क्रांति से निकला नेता अब हमेशा के लिए खामोश हो चुका है.
साल 2016 में खामेनेई ने अमेरिका से इंपोर्ट होने वाली कारों पर सवाल उठाए थे. 27 अप्रैल 2016 को दिए गए अपने भाषण में खामेनेई ने कहा था कि, "ईरानी लोग अमेरिकी कारें क्यों चलाएं." उन्होंने कहा था कि, "अमेरिकी कारें भारी हैं, ज्यादा फ्यूल खपत करती हैं और खुद अमेरिका में भी लोग उन पर भरोसा नहीं करते." इस बयान के कुछ दिनों बाद यानी 1 मई से ईरान में अमेरिकी कारों के इंपोर्ट पर बैन लगा दिया गया. यह बयान सिर्फ ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं था. यह संदेश था कि ईरान अपनी राह खुद तय करेगा, चाहे दुनिया किसी भी दिशा में जा रही हो.
रायटर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि, उस वक्त शेवरले की तकरीबन 200 कारों का ऑर्डर रद्द कर दिया गया था. इस खेप की कीमत उस दौर में करीब 70 लाख डॉलर बताई गई थी. जिन लोगों ने इन कारों के इंपोर्ट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, उन्हें सूचित कर दिया गया. उन्हें बताया गया कि अब इनका आयात मंजूर नहीं है. ये कारें अभी ईरान नहीं पहुंची थीं और सिर्फ शिपमेंट के लिए लोड की गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार यह खेप दक्षिण कोरिया से आने वाली थी.
उस दौर में ईरान पर लगे कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटने लगे थे. पश्चिमी कंपनियां ईरानी बाज़ार की तरफ देख रही थीं. लेकिन खामेनेई का रुख साफ था. अमेरिका से दूरी बनाए रखना. अमेरिकी कारों पर रोक उसी सोच का हिस्सा थी. ईरान को इंपोर्टर नहीं, निर्माता बनना है, यह बात बार-बार दोहराई गई.
दरअसल, दशकों से अमेरिकी कार कंपनियों को ईरान में सीधे तौर पर कार बेचने की इजाजत नहीं रही है. इसके बावजूद पहले शेवरले Chevrolet के 24 मॉडल दूसरे देशों के जरिए ईरान मंगाए जाते थे. बता दें कि, शेवरले अमेरिकी की दिग्गज कार कंपनी जनरल मोटर्स (General Motors) की ही एक ब्रांड है.
खामनेई के बयान के बाद अमेरिकी कारें ईरानी सड़कों से दूर होती गईं. जो गाड़ियां मौजूद थीं, वे ज्यादातर 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले की थीं. हालांकि फ्री ट्रेड जोन में अमेरिकी ब्रांड की कारें खरीदी जा सकती थीं, लेकिन उन्हें कहां चलाया जा सकता है, इस पर सख्त पाबंदियां थीं.

ईरान का ऑटोमोबाइल इतिहास सिर्फ गाड़ियों के बनने और बिकने की कहानी नहीं है, बल्कि यह राजनीति, प्रतिबंध, आत्मनिर्भरता और बदलती ग्लोबल इकोनॉमी के बीच लगातार जूझते एक देश की दास्तान है. मिडिल ईस्ट के अहम देश ईरान में कार इंडस्ट्री की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी, जब देश ने इंडस्ट्रियल ग्रोथ को अपनी प्राथमिकता बनाया. उस दौर में कार रखना अर्बन लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रहा था और सरकार ने लोकल लेवल पर वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देना शुरू किया.
1960 और 1970 के दशक में ईरान ने अपने ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखा. इसी समय Paykan कार सामने आई, जिसे आम ईरानी की कार कहा गया. यह कार ब्रिटिश डिजाइन पर बेस्ड थी, लेकिन ईरान में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ. Paykan ने दशकों तक ईरान की सड़कों पर राज किया. 1967 में इस कार का प्रोडक्शन शुरू हुआ जो 2005 तक जारी रहा.
दरअसल, इस कार को मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट महमूद खयामी ईरान लेकर आए थें. जिन्होंने आज की मशहूर ईरानी कार कंपनी Iran Khodro की नींव रखी थी. उस वक्त इस कंपनी का नाम ईरान नेशनल था. महमूद ने ब्रिटेन की मशहूर कार Rootes Arrow का लाइसेंस लिया था, जिसे दुनिया में हिलमैन हंटर के नाम से जाना जाता था. इसी ब्रिटिश कार पर Paykan बेस्ड थी.