
Lexus LM 350h WLTP Certification: भारतीय कार बाजार तेजी से बदल रहा है. समय के साथ जहां एक से बढ़कर एक एडवांस कारें पेश की जा रही हैं वहीं, तकनीकी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. लेकिन इन सब के बीच इंडस्ट्री में कभी-कभी भ्रम जैसी स्थिति भी देखने को मिलती है. अब इसे मार्केंटिग गेम कहें या दावे की होड़, लेकिन ये कहीं न कहीं आम लोगों की जेब को सीधे प्रभावित करता है.
लॉन्च के समय गाड़ी ऐसी पेश की जाती है जैसे आप एक बड़ा खर्च नहीं बल्कि भारी बचत करने जा रहे हैं. माइलेज इतना बताया जाता है कि आदमी खुश होकर मोटी रकम के लिए भी EMI भरने को तैयार हो जाए. लेकिन कुछ महीनों बाद वही ग्राहक पेट्रोल पंप पर खड़ा होकर सोचता है- “भाई, कंपनी वाली माइलेज आखिर गई कहां?” लेकिन अब कहानी बदलने वाली है. भारत में पहली बार ऐसी टेस्टिंग शुरू हुई है जो लैब नहीं, असल रोड कंडिशन में गाड़ियों की सच्चाई बताएगी. और इस नए सिस्टम में सबसे पहले बाजी मार ली है Toyota ने.
दरअसल, भारत में पहली बार शुरू हुई इस टेस्टिंग का नाम है 'WLTP', यानी वर्ल्डवाइड हॉर्मोनाइज्ड लाइट व्हीकल टेस्ट प्रोसीजर. गाड़ियों के लिए ये एक रियल वर्ल्ड टेस्ट है, जो बताएगी कि गाड़ी असल जिंदगी में कितना तेल पिएगी और कितना धुआं छोड़ेगी. और इस नए टेस्ट में सबसे पहले पास हुई है Toyota की लग्जरी एमपीवी Lexus LM 350h.
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI ने देश का पहला WLTP कंप्लायंस सर्टिफिकेट जारी किया है. यह सर्टिफिकेट टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की लग्जरी हाइब्रिड एमपीवी कार Lexus LM 350h और उसके वेरिएंट्स को दिया गया है. खास बात यह है कि भारत में यह नियम अभी लागू भी नहीं हुआ है और Toyota ने तय समय से पहले ही इस नए स्टैंडर्ड को अपनाकर इतिहास रच दिया है.

भारत सरकार ने AIS:175 के तहत WLTP स्टैंडर्ड को अपनाने का फैसला किया है. यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. इसके तहत M1 और M2 कैटेगरी के वाहन शामिल होंगे. इनमें पैसेंजर कारें, कमर्शियल पैसेंजर वैन और 5 टन तक वजन वाले बस जैसे वाहन शामिल हैं. टोयोटा ने इस नियम के लागू होने का इंतजार नहीं किया और पहले ही अपनी Lexus LM 350h को WLTP मानकों के अनुसार टेस्ट करवाकर सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया. इसी के साथ Toyota भारत की पहली ऐसी ऑटो कंपनी बन गई है जिसने आने वाले इस ग्लोबल स्टैंडर्ड को पहले ही अपना लिया है.
इस मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में ARAI के डायरेक्टर डॉ. रेजी माथाई ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के जनरल मैनेजर अभय कुलकर्णी को यह सर्टिफिकेट सौंपा. ARAI के अनुसार यह कदम भारत में अंतरराष्ट्रीय वाहन टेस्टिंग मानकों को लागू करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है.
WLTP एक ग्लोबल टेस्टिंग सिस्टम है. इसका इस्तेमाल किसी वाहन के फ्यूल कंजम्प्शन, एनर्जी कंजम्प्शन और एग्जॉस्ट एमिशन को मापने के लिए किया जाता है. इस सिस्टम को यूनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक कमिशन फॉर यूरोप (UNECE) के तहत डेवलप किया गया है. यह टेस्टिंग सिस्टम पहले से यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में इस्तेमाल हो रहा है. अब भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है ताकि यहां का व्हीकल टेस्टिंग प्रोसेस ग्लोबल लेवल के करीब पहुंच सके.
दरअसल, ये नया WLTP टेस्टिंग सिस्टम पुराने वाले मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकिल यानी MIDC सिस्टम की जगह लेगा. पुराने सिस्टम पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि उसके टेस्ट रिजल्ट्स असली ड्राइविंग कंडीशन से मेल नहीं खाते. वहीं WLTP ज्यादा एडवांस और डायनामिक टेस्टिंग प्रोसेस अपनाता है. इसमें वाहन का वजन, एयरोडायनामिक्स और एक्स्ट्रा फीचर्स जैसी चीजों को भी ध्यान में रखा जाता है. इससे गाड़ियों की माइलेज और एमिशन से जुड़ी जानकारी ज्यादा सटीक मानी जाती है.
1 अप्रैल 2027 की डेडलाइन अब करीब आती जा रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में बाकी ऑटो कंपनियां भी अपने वाहन पोर्टफोलियो को WLTP स्टैंडर्ड के अनुसार तैयार करना शुरू करेंगी. इसके लिए वाहन निर्माताओं को अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में भी बदलाव करना पड़ सकता है, ताकि वो नए नियमों पर खरा उतर सकें. यानी माइलेज का कागजी खेल अब खत्म होने वाला है, अब कंपनियों द्वारा क्लेम माइलेज आपको रियल वर्ल्ड में भी देखने को मिलेगा.