
सोचिए, आप सुबह घर से निकले और 100 किलोमीटर दूर मीटिंग में पहुंचने में सिर्फ 15 मिनट लगे. ना ट्रैफिक, ना लंबा जाम, ना ट्रेन का इंतजार. सुनने में थोड़ा फिल्मी लगता है, लेकिन अब यह हकीकत बनने की तरफ बढ़ रहा है. भारत में एक नई तरह की “उड़ने वाली टैक्सी” की तैयारी हो रही है, जो आपके रोज के सफर का पूरा खेल बदल सकती है. देसी स्टार्टअप सरला एविएशन (Sarla Aviation) और IndiGo ने मिलकर ऐसा दांव खेला है, जो आने वाले समय में सड़क और आसमान के बीच की दूरी मिटा सकता है.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि, भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क बनाया है. देश में तेजी से हाईवे का जाल बिछ रहा है. एविएशन सेक्टर भी तेजी से बढ़ा है. लेकिन इसके बावजूद हर दिन करोड़ों लोग एक ऐसी समस्या से जूझते हैं, जिसका हल अभी तक नहीं मिला है. यह समस्या है “मिडिल डिस्टेंस” जर्नी यानी मध्यम दूरी की यात्रा.
भारत का ट्रांसपोर्ट सिस्टम दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक लोकल सफर जैसे सड़क, मेट्रो और ऑटो. दूसरा लंबी दूरी का सफर जैसे ट्रेन और फ्लाइट. लेकिन 30 से 300 किलोमीटर की दूरी के लिए कोई आसान और तेज विकल्प नहीं है. एयरपोर्ट जाने में घंटों लग जाते हैं, 100-200 किलोमीटर के सफर में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या बन जाता है. सरला एविएशन और इंडिगो इसी समस्या को दूर करने की तैयारी में हैं.
दरअसल, इन दोनों कंपनियों ने मिलकर बड़ा कदम उठाया है. इंडिगो वेंचर्स ने सरला एविएशन में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया है. यह भारत के पहले बड़े एयर टैक्सी नेटवर्क की शुरुआत मानी जा रही है, जो 300 किलोमीटर तक की दूरी के रूट पर काम करेगा. यह निवेश सरला एविएशन के फंडिंग राउंड का हिस्सा है, जिसे एक्सेल और निखिल कामथ ने लीड किया था.

सरला एविएशन इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग यानी eVTOL एयरक्रॉफ्ट बना रही है. जिसे कंपनी ने बीते भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो में भी शोकेश किया था. यह एक एयर ट्रैक्सी है. जो कम शॉर्ट डिस्टेंस की जर्नी के लिए तैयार की गई है. यह Air Taxi घंटो की दूरी को मिनटों में बदलने में सक्षम है. ये छोटे, साइलेंट और कम प्रदूषण फैलाने वाले एयरक्रॉफ्ट होते हैं. जिन्हें रनवे की जरूरत नहीं होती. क्योंकि ये हेलिकॉप्टर की तरह अपने जगह से ही सीधे टेक-ऑफ और एक ही प्वाइंट पर लैंड कर सकते हैं.
eVTOL तकनीक अब तेजी से विकसित हो चुकी है. बैटरी सिस्टम बेहतर हो चुका है. हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक सिस्टम भरोसेमंद साबित हुए हैं. दुनिया भर में नियम बनाने वाली एजेंसियां, जैसे भारत की DGCA, इसके लिए रास्ता तैयार कर रही हैं. अब सवाल यह नहीं है कि यह संभव है या नहीं, बल्कि यह है कि इसे सबसे पहले कौन लागू करेगा. जहां सरला एविएशन के पास तकनीक और इंजीनियरिंग की ताकत है. कंपनी की टीम में लिलियम, वेलोकॉप्टर और जॉबी एविएशन जैसी कंपनियों में काम कर चुके एक्सपर्ट हैं. वहीं IndiGo के पास ऑपरेशन, नेटवर्क और एविएशन सेक्टर भरोसा है. रोजाना 2000 से ज्यादा उड़ानों और 85 से ज्यादा एयरपोर्ट नेटवर्क के साथ इंडिगो इस प्रोजेक्ट को मजबूती दे सकता है.
सरला एविएशन का कहना है कि, दुनिया में कई एयरलाइंस eVTOL में निवेश कर रही हैं. जैसे यूनाइटेड एयरलाइंस ने आर्चर एविएशन में निवेश किया है, डेल्टा एयरलाइंस ने जॉबी एविएशन को सपोर्ट किया है. लेकिन भारत के पास सबसे बड़ी ताकत है इसकी आबादी और डिमांड. यहां एयर टैक्सी की जरूरत सबसे ज्यादा है. इस निवेश से सिर्फ ट्रांसपोर्टेशन ही नहीं, बल्कि कई सेक्टर बदलेंगे. एयरोस्पेस में हजारों नौकरियां बनेंगी. नई सप्लाई चेन तैयार होगी. इमरजेंसी मेडिकल सर्विस तेज होगी. छोटे शहर बड़े शहरों सीधे जुड़ेंगे और डिफेंस लॉजिस्टिक्स भी मजबूत होगा.

कंपनी का कहना है कि, अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो कई रूट्स पर सफर का समय तेजी से कम हो जाएगा. इसके लिए सरला एविएशन ने कुछ आंकड़े दिए हैं, जो अलग-अलग रूट पर घटते हुए टाइम का खाका पेश करते हैं.
सरला एविएशन का फ्लैगशिप प्रोग्राम एक 6-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी है, जिसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और पुणे जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले शहरों में कम्यूट टाइम को घटाने के लिए डिजाइन किया गया है. हाल ही में कंपनी ने बेंगलुरु स्थित मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में अपने इस फ्लाइंग टैक्सी की टेस्टिंग भी की थी. ग्राउंड टेस्टिंग शुरू होने के साथ ही सरला एविएशन का एयर टैक्सी प्रोग्राम अपने कोर वैलिडेशन फेज से आगे बढ़ गया है. इस एयर टैक्सी में एक साथ 6 लोग यात्रा कर सकेंगे.
भारत ने पहले भी IT, स्पेस और डिजिटल पेमेंट में दुनिया को रास्ता दिखाया है. अब एयर मोबिलिटी अगला बड़ा कदम बनने जा रहा है. सरला एविएशन और इंडिगो की यह साझेदारी भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदल सकती है. आने वाले समय में सड़क, रेल और हवाई यात्रा के बीच की दूरी खत्म हो सकती है और सफर सच में “रियल टाइम” हो जाएगा.