
Car Coating Types, Durability and Costing: कार खरीदना महज एक खरीदारी नहीं बल्कि सपने के पूरा होने जैसा होता है. इसके लिए लोग कई तरह के जतन करते हैं ताकि वो अपने ड्रीम कार की सवारी कर सके. मॉडल सस्ता-महंगा कोई भी हो, लेकिन हर किसी का अपनी कार से ख़ास कनेक्शन होता है. लेकिन रोज़ाना ट्रैफिक में चलना, तेज़ धूप, बरसात, धूल-मिट्टी, पॉल्यूशन और कभी-कभी पक्षियों की गंदगी कार की चमक-दमक को धीरे-धीरे खराब कर देती है. जो बड़ी परेशानी का सबब बनता है.
ऐसे में कार कोटिंग एक बेहतर उपाय बनकर सामने आता है. जो सिर्फ एक लग्ज़री नहीं बल्कि समझदारी भरा फैसला है. ये कोटिंग आपकी कार की बॉडी पर एक न दिखने वाला सेफ्टी लेयर तैयार करता है. जो रोजाना लगने वाले छोटे-मोटे डेंट, स्क्रैच और गंदगी से कार की बॉडी को बचाता है. ये कोटिंग उनके लिए भी उतनी ही जरूरी है जो नई कार खरीद रहे हैं, या जिनकी कार थोड़ी पुरानी हो चुकी है. लेकिन समझदारी इसी में है कि आप बिना देर किए ये कोटिंग करवा लें.

आजकल बाजार में बॉडी शॉप्स कई अलग-अलग तरह की कोटिंग और प्रोटेक्शन लेयर्स बेचते हैं. जिनकी कॉस्टिंग उनकी जरूरत और उपयोगिता के आधार पर अलग-अलग होती है. यदि आप भी कार पर कोटिंग कराने का प्लानिंग कर रहे हैं तो आइये जानें कि, आखिर कार कोटिंग क्या होती है और ये कितने तरह की होती है. इससे आपको क्या फायदा होगा और आपके लिए कौन सी कोटिंग बेस्ट होगी.
कार कोटिंग असल में एक सेफ्टी लेयर जैसी होती है जो कार की पेंट के ऊपर लगाई जाती है. इसका काम पेंट को बाहरी नुकसान से बचाना होता है. इसे आप कार के लिए सनस्क्रीन की तरह समझ सकते हैं. बिना सेफ्टी के कार का पेंट धीरे-धीरे फीका पड़ने लगता है, ऑक्सीडाइज हो जाता है और उसकी चमक खत्म होने लगती है.
अच्छी कार कोटिंग कार को कई तरह के नुकसान से बचाती है. जैसे तेज़ धूप की अल्ट्रावॉयलेट (UV) रेज, सड़क की धूल और पॉल्यूशन, पक्षियों और बरसात से होने वाली गंदगी, हल्के स्क्रैच, स्वर्ल मार्क्स इत्यादि. भारत की सड़कों और मौसम को देखते हुए अब कार कोटिंग को प्रिवेंटिव केयर यानी पहले से सेफ्टी की तरह देखा जाने लगा है.
कार कोटिंग समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि कार का पेंट कैसे बना होता है. आजकल ज्यादातर कारों में पेंट की तीन लेयर होती हैं. सबसे नीचे प्राइमर लेयर होती है जो पेंट को मजबूती देती है. उसके ऊपर बेस कलर कोट होता है जो कार का असली रंग होता है. सबसे ऊपर क्लियर कोट होता है जो चमक और बेसिक सेफ्टी देता है. अगर आप किसी कार के बॉडी पर लगे डेंट को देखेंगे तो इन लेयर्स को बारीकी से समझ पाएंगे.
समय के साथ सबसे पहले क्लियर कोट ही खराब होने लगता है. जब यह कमजोर पड़ता है तो नीचे की पेंट लेयर भी नुकसान झेलने लगती है. कार कोटिंग इसी जगह काम आती है और क्लियर कोट के ऊपर एक मजबूत सेफ्टी लेयर बना देती है.
हर कार कोटिंग एक जैसी नहीं होती. अलग-अलग जरूरत और बजट के हिसाब से कई तरह की कोटिंग मिलती हैं. जिसमें टेफ्लॉन, सिरेमिक, ग्रेफीन, पेंट प्रोटेक्शन फिल्म (PPF) इत्यादि शामिल हैं. हालांकि सेरामिक में कुछ अलग-अलग टाइप्स होते हैं.

टेफ्लॉन कोटिंग (PTFE कोटिंग) एक सिंथेटिक सीलेंट है जो मुख्य रूप से कार की बॉडी पर एक बेसिक लेयर के तौर पर लगाई जाती है. आमतौर लोग कार खरीदते समय शोरूम से ही ये कोटिंग करवा लेते हैं. कई कार कार पर्चेडिंग की डील में ही इसकी कॉस्टिंग शामिल कर ली जाती है, जिससे ग्राहक को फायदा होता है. यह कार के पेंट को मामूली खरोंचों, अल्ट्रा वॉयलेट रेज और जंग से बचाता है. जिससे कार की बॉडी चमकदार और क्लीन रहती है. इसे अक्सर 'कार पेंट प्रोटेक्शन' या 'पेंट सीलेंट' जैसे नामों से भी जाना जाता है.
कॉस्टिंग: 2,000 से 15,000 रुपये तक
आज के समय में सिरेमिक कोटिंग सबसे लोकप्रिय ऑप्शन में से एक है. यह कार के पेंट के साथ केमिकल बॉन्ड बनाकर एक मजबूत सेफ्टी लेयर बनाता है. इससे कार को बेहतर चमक मिलती है और इसका सरफेस भी टिकाऊ बनता है. सिरेमिक कोटिंग के कई फायदे होते हैं. जैसे कार बॉडी की चमक लंबे समय तक एक जैसी रहती है. पानी की बूंदे आसानी से फिसल जाती हैं, UV किरणों और ऑक्सीडेशन से सेफ्टी मिलती है और कार की क्लीनिंग भी आसान हो जाती है.
अलग-अलग तरह की सिरेमिक कोटिंग
सिरेमिक कोटिंग भी कई प्रकार की होती है. एंट्री लेवल सिरेमिक कोटिंग उन लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है जो पहली बार कोटिंग करा रहे हैं. यह आमतौर पर 6 से 12 महीने तक चलती है और कार की शाइनिंग और बेसिक सेफ्टी बढ़ाती है.
प्रोफेशनल मल्टी-लेयर सिरेमिक कोटिंग में कई लेयर लगाई जाती हैं. इससे कार को ज्यादा मजबूत सेफ्टी लेयर मिलती है और सही मेंटेनेंस के साथ यह कई साल तक चल सकती है.
9H सिरेमिक कोटिंग को इसकी हार्डनेस रेटिंग की वजह से जाना जाता है. यह हल्के स्क्रैच और स्वर्ल मार्क्स से बेहतर सेफ्टी मिलती है. और कार के पेंट को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है.
कॉस्टिंग: 20,000 से 50,000 रुपये तक

ग्राफीन कोटिंग (Graphene Coating) को सेरामिक टेक्नोलॉजी का नया और एडवांस रूप माना जाता है. यह गर्मी को बेहतर तरीके से झेल सकती है और की बॉडी को बरसात के पानी से बनने वाले दाग से भी बचाती है. भारत जैसे देशों में जहां मौसम का मिजाज समझना मुश्किल है, यहां पर ये कोटिंग काफी बेहतर मानी जाती है.
कोटिंग लगाने से पहले, कार की सतह को अच्छी तरह धोया, साफ और पॉलिश किया जाता है ताकि निशान और खरोंच हट जाएं. कोटिंग को 65-75 डिग्री फारेनहाइट (लगभग 18-24°C) तापमान में एक एप्लीकेटर पैड की मदद से दो लेयरों में लगाया जाता है. यह कोटिंग कार के पेंट, प्लास्टिक और कांच पर एक मजबूत, सस्टेनेबल और ज्यादा हाइड्रोफोबिक लेयर बनाती है.
कास्टिंग: 15,000 से 50,000 रुपये तक

PPF एक ट्रांसपैरेंट और फ्लेक्सिबल फिल्म होती है जिसे कार के पेंट के ऊपर लगाया जाता है. यह खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें पत्थर लगने, पार्किंग में स्क्रैच आने या दरवाजों और बंपर पर नुकसान की चिंता रहती है. कई कार मालिक बेहतर सेफ्टी के लिए PPF के साथ सेरामिक कोटिंग भी करवाते हैं. हालांकि PPF काफी उपयोगी है लेकिन खर्चीला भी है.
अलग-अलग क्वॉलिटी के आधार पर ये कोटिंग भी 3 टाइप्स की होती है. जिसमें बेसिक, मिड-रेंज और प्रीमियम शामिल हैं. बेसिक कोटिंग आमतौर पर केवल स्क्रैच इत्यादि से बचाती है. वहीं मिड-रेंज कोटिंग में स्क्रैच के साथ बॉडी को अलग-अलग पेंट फीनिश का भी ऑप्शन देता है. इसमें आप मैट या ग्लॉस फीनिश का भी ऑप्शन चुन सकते हैं. वहीं प्रीमियम कोटिंग सबसे बेहतर मानी जाती है. इसमें आपको लाइफ-टाइम वारंटी का भी लाभ मिलता है.
कॉस्टिंग: 60,000 रुपये से 2.50 लाख रुपये तक
कार कोटिंग की लाइफ कई बातों पर निर्भर करती है. जैसे कौन सी कोटिंग लगाई गई है, कार किन रोड कंडिशन में चलती है और उसकी मेंटनेंस कैसे की जा रही है. आम तौर पर बेसिक कोटिंग करीब 1 साल तक चलती है. प्रोफेशनल सेरामिक कोटिंग 3 से 5 साल तक टिक सकती है. वहीं 9H सेरामिक कोटिंग सही मेंटेनेंस के साथ इससे भी ज्यादा समय तक चल सकती है. इसके अलावा ग्राफीन कोटिंग तकरीबन 5 से 7 साल तक चल सकता है. वहीं पेंट प्रोटेक्शन फिल्म की मियाद लगभग 10 साल तक मानी जाती है, लेकिन कुद ब्रांड्स लाइफ टाइम वारंटी भी देते हैं.

भारत में कार कोटिंग करवाना कई मायनों में फायदेमंद माना जाता है. यहां तेज धूप पेंट को जल्दी फीका कर देती है. धूल और पॉल्यूशन हर जगह है. ऐसे में बिना सेफ्टी के बार-बार कार धोने से माइक्रो स्क्रैच बनने लगते हैं. इसके अलावा कार का एक्सटीरियर, बॉडी पेंट और शाइनिंग उसके रीसेल वैल्यू पर भी असर डालता है. सही तरीके से की गई कोटिंग कार को लंबे समय तक नई जैसी दिखाने में मदद करती है.
कार कोटिंग को लेकर कई गलतफहमियां भी हैं. कुछ लोग सोचते हैं कि सेरामिक कोटिंग के बाद कार पर कभी स्क्रैच नहीं आएंगे. जबकि सच यह है कि यह कार को पूरी तरह स्क्रैच प्रूफ नहीं बनाती, लेकिन हल्के नुकसान को कम जरूर करती है. एक और भ्रम यह है कि एक बार कोटिंग कराने के बाद हमेशा के लिए काम खत्म हो जाता है. जबकि असलियत यह है कि हर कोटिंग को समय-समय पर मेंटनेंस की जरूरत होती है. जब कोटिंग का टेन्योर पूरा होता है तो उसे फिर करवाने की जरूरत पड़ती है.
आपकी कार हर रोज़ आपके लिए मेहनत करती है. थोड़ी देर के लिए ही सही, मतलब जब तक आप उसमें सफर करते है तब तक वो आपके लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है. इसलिए उसे सिर्फ धुलाई और पॉलिश से ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. सही कार कोटिंग चुनना, उसे समझना और प्रोफेशनल तरीके से उसे लगवाना आपकी कार की चमक और वैल्यू दोनों को लंबे समय तक बनाए रखता है.