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कला, संस्कृति और संरक्षण का संगम... शेखावटी की हवेलियों में नए रंग भर रहा वेदारण्य फेस्टिवल

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का रामगढ़ शेखावाटी कभी समृद्ध व्यापारिक केंद्र था, जिसकी भव्य हवेलियां और ऐतिहासिक किले इसकी समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। समय के साथ यह विरासत धुंधली पड़ गई, जिसमें सांस्कृतिक आयोजन फिर से नए रंग भर रहे हैं.

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रामगढ़ शेखावटी में वेदारण्य हेरिटेज हीलिंग फेस्टिवल की शुरुआत हो रही है
रामगढ़ शेखावटी में वेदारण्य हेरिटेज हीलिंग फेस्टिवल की शुरुआत हो रही है

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में मौजूद 'रामगढ़ शेखावाटी' कभी देश के सबसे समृद्ध कस्बों में शामिल था. मारवाड़ी व्यापारियों का वैभव, उनकी संपन्नता यहां की भव्य हवेलियां, सुंदर चित्रकारी वाली दीवारें और ऐतिहासिक किले, इनमें इतिहास का अक्स साफ दिखाई देता रहा है. हांलांकि समय के साथ ऐतिहासिक वैभव कुछ धुंधला हुआ और इस फेर में रामगढ़ की पहचान धीरे-धीरे दबने लगी और विरासती इमारतें उपेक्षा का शिकार होती चली गईं.

विरासत की इसी धरा पर तकरीबन 10 साल पहले कला और संस्कृति की खुश्बू बिखेरने वाला एक फूल खिला, जिसकी वजह से रामगढ़ शेखावाटी एक बार फिर चर्चा में है. वेदारण्‍य हेरिटेज एंड हीलिंग फेस्टिवल वही सांस्कृतिक आयोजन जिसने न सिर्फ विरासत संरक्षण की मुहिम को नई दिशा दी, बल्कि कस्बे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर ला खड़ा किया है. 

Ramgarh Shekhawati

राजस्थान के रामगढ़ शेखावटी में ‘वेदआरण्य हेरिटेज एवं हीलिंग’ (वीएचएएच) महोत्सव का 10वां संस्करण 22 जनवरी से शुरू हो रहा है. इस साल लोकल इकॉनमी फिर से जिंदा करने और यहां की अमूर्त परंपराओं को संरक्षित करने सहित ऐतिहासिक शहर को सांस्कृतिक धरोहर के आवास के तौर संजोय जाने की कोशिश है. महोत्सव का आयोजन श्रुति फाउंडेशन, यूनेस्को और इंटैक कर रहे हैं. इस साल का विषय ‘वुमेन इन हेरिटेज’ है.

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श्रुति फाउंडेशन की संस्थापक श्रुति नाडा पोद्दार कहती हैं कि 'रामगढ़ शेखावाटी सिर्फ ऐतिहासिक हवेलियों का शहर नहीं, बल्कि जीवित सभ्यता का प्रतीक है. वीएचएएच महोत्सव का उद्देश्य हमेशा इस क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को सामने लाना और इसे जीवंत बनाए रखने की ओर रहा है.  इसकी क्रिएटिविटी, इस बौद्धिक-सांस्कृतिक मजबूती, और हीलिंग परंपराओं को जनता के बीच लाना रहा है. इस बार का दसवां संस्करण उन महिलाओं को समर्पित है, जिन्होंने समय के साथ इस विरासत को आकार दिया. महोत्सव का समापन 26 जनवरी को होगा.

जड़ों की तलाश से शुरू हुआ संरक्षण का सफर

इस बदलाव की शुरुआत साल 2012 में हुई. यहां नाम लेना होगा श्रुति नाडा पोद्दार का, जिन्होंने अपनी जड़ों को दोबारा अपनाने का फैसला किया और रामगढ़ की विरासत को फिर से जीवंत करने की दिशा में काम करना शुरू किया. उन्होंने अपनी पैतृक हवेली का संरक्षण कराया और उसे वेदारण्‍य हवेली के रूप में एक हेरिटेज होटल में बदल दिया. इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक रामगढ़ किले को संवारने की पहल की. आज यही किला कस्बे की पहचान और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

Ramgarh Shekhawati

उत्सव जो सिर्फ आयोजन नहीं, आंदोलन बना

इसके बाद शुरुआत हुई 'वेदारण्‍य हेरिटेज एंड हीलिंग फेस्टिवल' की जो केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सोच थी. चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में आगंतुकों को शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत को बेहद नज़दीक से देखने-समझने का मौका मिलता है. मेहमानों को पारंपरिक रूप से संवारी गई हवेलियों में ठहरने का अनुभव मिलता है. कस्बे की गलियों, चौकों और ऐतिहासिक इमारतों में शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य और रंगमंच की प्रस्तुतियां होती हैं.

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इसके साथ-साथ कढ़ाई, बुनाई, टेक्सटाइल, अपसाइक्लिंग और हस्तशिल्प से जुड़े कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाता है, जिससे स्थानीय कारीगरों की कला को मंच मिलता है. प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुतियां इस उत्सव को सांस्कृतिक दृष्टि से और समृद्ध बनाती हैं.

आज रामगढ़ शेखावाटी उस दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां विरासत बोझ नहीं, बल्कि अवसर बन रही है. एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ यह उत्सव यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति और सामुदायिक भागीदारी हो, तो सांस्कृतिक संरक्षण पर्यटन और स्थानीय विकास का मजबूत आधार बन सकता है.

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