
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की सांगला घाटी में मनाई जाने वाली होली, जिसे फागली या फागुली भी कहा जाता है, 800 साल पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं और लोकगीतों का अनूठा संगम है.

राजस्थान के कांकरोली में द्वारिकेश मंदिर में फागुन के महीने में राल दर्शन का आयोजन होता है, जिसमें प्राकृतिक राल और सिंघाड़े का आटा जलाकर अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है. यह परंपरा होलिका दहन के साथ जुड़ी है और ऋतु परिवर्तन के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव का प्रतीक मानी जाती है.

संत कबीर ने होली को केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा की जागरूकता और प्रेम का प्रतीक बताया है. उनकी होली बाहरी रंगों से नहीं, बल्कि भीतर के रंगों से जुड़ी है, जो स्थायी है.

मणिकर्णिका घाट को केवल श्मशान स्थल नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच की गहराई को समझने वाला स्थान माना जाता है. यहां राख से होली खेलने की परंपरा है जो बंधनों को तोड़कर आत्मा की शुद्धि और मुक्ति का प्रतीक है.

फाल्गुन मास को लेकर यह लेख होली के त्योहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाता है. यह बताता है कि कैसे फागुन का महीना जीवन के अंत और नए आरंभ का प्रतीक है, जिसमें दुख नहीं बल्कि उल्लास होता है.

होली से पहले के आठ दिन जिन्हें होलाष्टक कहा जाता है, अशुभ माने जाते हैं और इस दौरान कोई शुभकार्य नहीं किया जाता. यह परंपरा दैत्य हिरण्यकश्यप और उनके पुत्र प्रह्लाद की पौराणिक कथा से जुड़ी बताई जाती है.
गुजरात सरकार ने इस बार के बजट में वारली पेंटिंग और आदिवासी देवी कंसारी देवी की छवि को शामिल कर आदिवासी संस्कृति को सम्मानित किया है. वारली पेंटिंग, जो दक्षिण गुजरात और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों की पारंपरिक कला है, को बजट कवर पर प्रदर्शित किया गया है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओल चिकी लिपि को संथाली भाषा और समुदाय की पहचान का एक शक्तिशाली प्रतीक बताया. उन्होंने इस शताब्दी पुरानी लिपि के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया.
पुरी के लोकनाथ मंदिर में एक अनोखा शिवलिंग है जो लौकी के रूप में है और इसे भगवान श्रीराम ने त्रेतायुग में स्थापित किया था. यह मंदिर जगन्नाथ धाम से करीब 2 किलोमीटर दूर है और शैव उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए बिश्नोई समाज और संत समाज ने सड़कों पर प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू कर दिया है। सौर ऊर्जा कंपनियों द्वारा सोलर पैनल लगाने के लिए खेजड़ी के पेड़ काटे जाने के विरोध में यह आंदोलन चल रहा है.
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का रामगढ़ शेखावाटी कभी समृद्ध व्यापारिक केंद्र था, जिसकी भव्य हवेलियां और ऐतिहासिक किले इसकी समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। समय के साथ यह विरासत धुंधली पड़ गई, जिसमें सांस्कृतिक आयोजन फिर से नए रंग भर रहे हैं.
राष्ट्रीय कलरिपयट्टू लीग 2026 का आयोजन 17-18 जनवरी को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में किया जा रहा है. इस प्रतियोगिता में देशभर के युवा खिलाड़ी भाग लेंगे, जिनमें दिल्ली कलरिपयट्टू एसोसिएशन के अंडर-18 वर्ग के खिलाड़ी भी शामिल हैं.
दही-चूड़ा भारत की प्राचीन धान आधारित कृषि सभ्यता का हिस्सा है, जो यात्रा, संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा है. यह भोजन न केवल पोषण देता है बल्कि लोकसंस्कृति, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक उत्तरदायित्व को भी दर्शाता है.
सूर्यदेव की उपासना और नई फसल की खुशियों का प्रतीक है. पोंगल के विभिन्न दिन भोगी, थाई, कन्नम और मट्टू पोंगल के नाम से जाने जाते हैं.यह दक्षिण भारत की तमिल संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है.
लोहड़ी के प्रसिद्ध गीतों में दुल्ला भट्टी का उल्लेख एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्य है, जो पंजाब की लोक परंपराओं और सामाजिक इतिहास को दर्शाता है. दुल्ला भट्टी एक राजपूत मुस्लिम विद्रोही थे जिन्होंने मुगल शासन की दमनकारी नीतियों का विरोध किया.