
राष्ट्रीय कलरिपयट्टू लीग 2026 का आयोजन 17-18 जनवरी को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में किया जा रहा है. इस प्रतियोगिता में देशभर के युवा खिलाड़ी भाग लेंगे, जिनमें दिल्ली कलरिपयट्टू एसोसिएशन के अंडर-18 वर्ग के खिलाड़ी भी शामिल हैं.

दही-चूड़ा भारत की प्राचीन धान आधारित कृषि सभ्यता का हिस्सा है, जो यात्रा, संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहा है. यह भोजन न केवल पोषण देता है बल्कि लोकसंस्कृति, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक उत्तरदायित्व को भी दर्शाता है.

सूर्यदेव की उपासना और नई फसल की खुशियों का प्रतीक है. पोंगल के विभिन्न दिन भोगी, थाई, कन्नम और मट्टू पोंगल के नाम से जाने जाते हैं.यह दक्षिण भारत की तमिल संस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है.

लोहड़ी के प्रसिद्ध गीतों में दुल्ला भट्टी का उल्लेख एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथ्य है, जो पंजाब की लोक परंपराओं और सामाजिक इतिहास को दर्शाता है. दुल्ला भट्टी एक राजपूत मुस्लिम विद्रोही थे जिन्होंने मुगल शासन की दमनकारी नीतियों का विरोध किया.

दिल्ली के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में चल रही 'क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर' प्रदर्शनी देश भर के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों की समृद्ध शिल्प परंपराओं को प्रदर्शित करती है. यह 10 दिवसीय प्रदर्शनी 21 दिसंबर 2025 तक जारी रहेगी.

फ्लिपराची, जिनका असली नाम हुसाम असीम है, बहरीनी हिप-हॉप कलाकार हैं जिन्होंने गीत FA9LA बनाया है. यह गीत अरबी भाषा में है और इसका अर्थ 'मस्ती का वक्त' या 'पार्टी टाइम' है. गाने में युवा ऊर्जा और आजादी की भावना झलकती है। FA9LA गीत 2024 में यूट्यूब पर रिलीज हुआ और बाद में फिल्म धुरंधर में इस्तेमाल किया गया.
भारतीय विवाहों में कुंअर कलेऊ एक महत्वपूर्ण परंपरा है जिसमें दूल्हे को कन्या पक्ष की महिलाओं द्वारा विशेष भोजन परोसा जाता है. यह रस्म दूल्हे की बुद्धि और तर्कशक्ति को परखने के लिए पहेलियों के माध्यम से भी होती है. मिथिला की लोककथाओं में राम-सीता के विवाह से जुड़ी इस परंपरा का वर्णन मिलता है, जहाँ दूल्हों से गूढ़ प्रश्न पूछे जाते हैं.
दिल्ली के सुंदर नर्सरी में SPIC MACAY द्वारा आयोजित लोक और जनजातीय कला एवं शिल्प महोत्सव में देशभर के कलाकारों ने मधुबनी, वारली, गोंड, टेराकोटा सहित विभिन्न पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया. तीन दिन चले इस आयोजन में वर्कशॉप, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिनमें लोक संगीत और नृत्य भी प्रस्तुत किए गए.