अमेरिकी संसद में ट्रंप को झटका! ईरान युद्ध रोकने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी, रिपब्लिकन सांसदों ने भी पाला बदला

अमेरिकी संसद के निचले सदन ने ईरान के खिलाफ युद्ध पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव पारित किया है. इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक पार्टी लेकर आई थी और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने भी इसका समर्थन किया. हालांकि, इस प्रस्ताव कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए सीनेट की मंजूरी भी जरूरी है.

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इससे पहले ये प्रस्ताव तीन बार फेल हो चुका था. (Photo- ITG) इससे पहले ये प्रस्ताव तीन बार फेल हो चुका था. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:24 AM IST

अमेरिका और ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही संसद में बड़े झटके का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध पर रोक लगाना था. 

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इस दौरान वोटिंग से साफ हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध की आशंका को लेकर अमेरिकी सांसदों में चिंता काफी बढ़ गई है. खास बात ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी ईरान जंग पर पाला बदल लिया.

7 वोटों से पास हुआ प्रस्ताव

सदन में 'वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन' पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया. हालांकि दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस प्रस्ताव को रोकने में नाकाम रहे.

इस वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट डाला. कांग्रेस में ट्रंप के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं है.

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अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?

संसद के जानकारों का कहना है कि ये वोटिंग फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है. इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन 'सीनेट' से भी पास कराना होगा. इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है.

यह भी पढ़ें: 'ईरान दस्तखत करने वाला है, वीकेंड पर समझौता हो सकता है...' शांति वार्ता पर ट्रंप का दावा

हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे. लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भी एक प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था. सीनेट में भी ये सात बार की नाकाम कोशिशों के बाद कामयाब हुई थी.

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