अमेरिका में दिखा नस्लीय नफरत, हिंदू मंदिर में मास शूटिंग की प्लानिंग में था 19 साल का लड़का

अमेरिका में 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस पर हिंदू धार्मिक स्थल पर सामूहिक गोलीबारी की योजना बनाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, उसके कथित मैनिफेस्टो में श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा और दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, खासकर भारतीयों के खिलाफ हिंसा का जिक्र था.

Advertisement
लड़के के पास से एक मेनिफेस्टो बरामद किया गया है. (Photo- ITG) लड़के के पास से एक मेनिफेस्टो बरामद किया गया है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

अमेरिका में हिंदू धार्मिक स्थल पर सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश के मामले ने एक बार फिर श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा यानी व्हाइट सुपरेमेसिज्म को चर्चा में ला दिया है. इलिनॉय के पैलेटाइन में रहने वाले 19 साल के एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस पर ऑरोरा इलाके में हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की योजना तैयार करने का आरोप है. उसे रविवार शाम हिरासत में लिया गया था. उस पर आतंकवादी धमकी देने और हथियार रखने के आरोप हैं.

Advertisement

पुलिस को इस कथित साजिश की जानकारी उस शख्स से मिली, जिसे आरोपी के कुछ इलेक्ट्रॉनिक संदेश मिले थे. जांच अधिकारियों के मुताबिक, इन संदेशों में कथित हमले की योजना से जुड़ा एक दस्तावेज और राइफल, मैगजीन, बॉडी आर्मर समेत कई सामान की तस्वीरें साझा की गई थीं.

यह भी पढ़ें: हिंदू मंदिर में मास शूटिंग की साजिश, अमेरिका में आतंक की धमकी देने वाला गिरफ्तार

FBI की मदद से पुलिस ने जिस दस्तावेज की जांच की, उसका शीर्षक 'Why I Fought: A.K.A.' बताया गया है. पुलिस के मुताबिक, इस कथित मैनिफेस्टो में श्वेत वर्चस्ववादी और चरमपंथी विचारों के साथ दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, खासकर भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का जिक्र था.

क्या होता है व्हाइट सुपरेमेसिस्ट मैनिफेस्टो?

व्हाइट सुपरेमेसिस्ट मैनिफेस्टो ऐसे दस्तावेज को कहा जाता है, जिसमें श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा और उससे जुड़े विचारों को दर्ज किया जाता है. इस विचारधारा में श्वेत लोगों को दूसरे नस्लीय या जातीय समूहों से श्रेष्ठ माना जाता है. इसके चरम रूप में दूसरे समुदायों के प्रति नफरत, भेदभाव और हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की जाती है.

Advertisement

ऐसे मैनिफेस्टो में लेखक अपने विचारों, मान्यताओं और किसी खास समुदाय के प्रति अपनी दुश्मनी को लिखित रूप दे सकता है. कुछ मामलों में ऐसे दस्तावेज हिंसा को सही ठहराने या दूसरों को उकसाने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं. हालांकि, हर मैनिफेस्टो का मकसद एक जैसा नहीं होता. किसी दस्तावेज की असली मंशा समझने के लिए उसमें लिखी बातों और मामले से जुड़े सबूतों को देखना जरूरी है.

इस मामले में पुलिस का आरोप है कि दस्तावेज में भारतीयों और दूसरे दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ हिंसा का जिक्र था. हालांकि, अधिकारियों ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि ऑरोरा में किस खास मंदिर को निशाना बनाने की योजना थी.

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली. अधिकारियों के मुताबिक, वहां से एक राइफल, मैगजीन, सैकड़ों अतिरिक्त कारतूस और अन्य सामान बरामद हुआ. पुलिस कथित मैनिफेस्टो, इलेक्ट्रॉनिक संदेशों और हथियारों से जुड़े सबूतों की जांच कर रही है.

poयह भी पढ़ें: कहीं एक-दूसरे में मिल न जाएं अमेरिका और रूस! इतनी तेजी से हिल रहे धरती के प्लेट्स

भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चिंता

अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इस कथित साजिश पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि भारतीयों के खिलाफ नफरत और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा के नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं. उन्होंने समय रहते पुलिस को जानकारी देने वाले लोगों और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों का आभार भी जताया.

Advertisement

शिकागो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी मामले पर नजर रखने की बात कही है. वाणिज्य दूतावास ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समय पर कार्रवाई की सराहना की और कहा कि वह भारतीय समुदायों के लगातार संपर्क में है.

फिलहाल मामले की जांच जारी है. आरोपी पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं. लेकिन कथित मैनिफेस्टो में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा का जिक्र होने के आरोप ने अमेरिका में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »