'यह गुलामों के बच्चों के लिए था...' बर्थराइट सिटीजनशिप पर बोले डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस नियम का मूल मकसद कुछ और था. उन्होंने भरोसा जताया कि आगे चलकर इस मुद्दे का समाधान निकाला जाएगा.

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बर्थराइट सिटीजनशिप के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने जताई असहमति. (File Photo) बर्थराइट सिटीजनशिप के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने जताई असहमति. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:17 AM IST

अमेरिका में बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'यह प्रावधान मूल रूप से गुलामों के बच्चों के लिए बनाया गया था, अमीर विदेशियों के लिए नहीं'. उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले का आगे कोई न कोई समाधान निकलेगा.

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नॉर्थ डकोटा के मेडोरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि हाल के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में ज्यादातर फैसले उनके पक्ष में रहे. हालांकि, बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर आया फैसला उन्हें सही नहीं लगा. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को आगे ठीक किया जाएगा. ट्रंप के मुताबिक, जन्म से नागरिकता देने का प्रावधान दूसरे देशों के संपन्न लोगों के बच्चों को अमेरिकी नागरिकता देने के लिए नहीं बनाया गया था. उन्होंने दावा किया कि इसका मकसद गृहयुद्ध के बाद गुलामों के बच्चों को अधिकार देना था.

राष्ट्रपति की शक्तियों का भी किया जिक्र

अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दूसरे फैसलों से राष्ट्रपति के अधिकार पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं. उनके अनुसार, मौजूदा समय में राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्तियां होना जरूरी है. उन्होंने इसे अपनी सरकार के लिए सकारात्मक बताया.

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एजेंसी के मुताबिक इस दौरान, ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका फिर से मेरिट यानी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि उनकी सरकार नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़े नियमों में बदलाव के पक्ष में है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बर्थराइट सिटीजनशिप के मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे.

यह मुद्दा अमेरिका में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा रहा है. ट्रंप पहले भी इस व्यवस्था में बदलाव की वकालत कर चुके हैं, जबकि उनके विरोधी इसे अमेरिकी संविधान के तहत मिलने वाला अधिकार बताते रहे हैं.

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