तुर्किए की संसद ने सोमवार को कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के हजारों कुर्द लड़ाकों को सशर्त माफी देने से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानून को पास कर दिया है. इस बिल के समर्थन में 468 मत पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 88 मत पड़े. ये कदम सरकार की कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के साथ शांति पहल को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है. ये कानून तभी लागू होगा, जब अधिकारी पुष्टि कर लेंगे कि संगठन ने पूरी तरह से अपने हथियार डाल दिए हैं और खुद को भंग कर दिया है.
ये कानून दशकों पुराने उस हिंसक संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसमें अब तक 10 हजार लोगों की जान जा चुकी है. जेल में बंद अपने नेता अब्दुल्ला ओचलान के आह्वान के बाद पीकेके ने पिछले साल घोषणा की थी कि वह तुर्की राज्य के खिलाफ अपने दशकों पुराने सशस्त्र ऑपरेशन को खत्म कर रहा है.
इसके बाद उत्तरी इराक में एक प्रतीकात्मक निशस्त्रीकरण समारोह भी आयोजित किया गया था. नए कानून के तहत सजायाफ्ता सदस्यों की सजा निलंबित की जाएगी और गंभीर मामलों को छोड़कर अन्य मामलों की जांच 5 से 10 साल के लिए स्थगित रहेगी. यदि इस अवधि में कोई नया अपराध नहीं होता है तो मुकदमे खत्म कर दिए जाएंगे.
गंभीर अपराधों के दोषी कानून से बाहर
इस विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि जानबूझकर की गई हत्याओं के दोषियों और 2005 से पहले आजीवन कारावास की सजा पाने वालों को माफी का लाभ नहीं मिलेगा. इसमें पीकेके के शीर्ष नेता और अब्दुल्ला ओचलान भी शामिल हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के फैसले के आधिकारिक गजट में प्रकाशित होने के बाद लड़ाकों के पास आवेदन करने के लिए छह महीने का समय होगा. इराक, सीरिया और निर्वासन में रह रहे पीकेके सदस्यों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है.
एर्दोगान के लिए नए सियासी समीकरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये कानून केवल निशस्त्रीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं. इससे तुर्की और इराक के संबंधों में सुधार हो सकता है. साथ ही ये कानून राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन को प्रो-कुर्दिश डीईएम (DEM) पार्टी का समर्थन हासिल करने का मौका दे सकता है. यदि संसद वक्त से पहले चुनाव का आह्वान करती है, तो एर्दोगन दो कार्यकाल की सीमा के बाद भी दोबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकेंगे.
PKK ने जताई आपत्ति
वहीं, पीकेके से जुड़े मीडिया आउटलेट एएनएफ (ANF) के जरिए जारी बयान में संगठन ने कहा कि ये कानून शांति प्रक्रिया की एक शुरुआत तो है, लेकिन इसमें गंभीर कमियां हैं. पीकेके ने ओचलान की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनके नेता स्वतंत्र रूप से काम नहीं करेंगे, तब तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती. संगठन ने ये भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक राजनीति की स्वतंत्रता और मुकदमों से सुरक्षा मिले बिना उनके लड़ाके हथियार नहीं सौंपेंगे.
विपक्ष ने भी उठाई आवाज
संसद में प्रो-कुर्दिश डीईएम पार्टी की नेता गुलिस्तान किलिक कोकियांगित ने कहा कि तुर्की के लोगों के पास शांति और लोकतंत्र को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है. हालांकि, उन्होंने विधेयक की कमियों को दूर करने की बात कही है. दूसरी ओर, राष्ट्रवादी गुड पार्टी के नेता मुसावत दरविशोग्लू ने इस बिल का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि ये कानून केवल एर्दोगन के सत्ता में बने रहने का रास्ता साफ करने के लिए लाया गया है.
aajtak.in