इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्हाइट हाउस में हुई करीब 90 मिनट की अहम बैठक में ईरान के खिलाफ रणनीति को लेकर गहन चर्चा हुई. मीडिया रिपोर्ट्स (एक्सियोस और रॉयटर्स) के मुताबिक, बैठक में किसी एक विकल्प पर जोर देने के बजाय ईरान से निपटने के लिए तीन मुख्य रास्तों कूटनीति, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई पर विस्तार से विचार किया गया.
मंगलवार को हुई यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई, जब ट्रंप एक तरफ तेहरान के साथ बातचीत की कोशिश जारी रखे हुए हैं और दूसरी ओर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की तैयारियां भी चल रही हैं. अमेरिका ने पिछले हफ्ते ईरान पर हमले रोक दिए थे. बैठक खत्म होने के कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके बाद ट्रंप ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी.
ईरान पर तीन विकल्पों पर चर्चा
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत में ईरान मुख्य मुद्दा रहा. एक्सियोस के मुताबिक, दोनों नेताओं ने ईरान से निपटने के तीन संभावित विकल्पों पर चर्चा की.
बातचीत के जरिए समझौता: ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत में जुटे हैं. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद हैं. इजरायली अधिकारी के मुताबिक, नेतन्याहू को संदेह है कि तेहरान ऐसा समझौता स्वीकार करेगा, जो उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोक सके.
आर्थिक दबाव बढ़ाना: दूसरे विकल्प के तहत ईरान के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने और अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए तेहरान पर दबाव बढ़ाने पर विचार किया गया.
सैन्य कार्रवाई तेज करना: यदि कूटनीतिक प्रयास और आर्थिक प्रतिबंध नाकाम रहते हैं, तो ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को दोबारा शुरू करने और उनका दायरा बढ़ाने का विकल्प भी चर्चा में रहा.
इजरायली अधिकारी ने एक्सियोस से कहा कि तीनों विकल्पों पर विस्तार से और स्पष्ट रूप से चर्चा हुई. बातचीत का उद्देश्य किसी एक विकल्प को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि यह देखना था कि प्रत्येक रास्ते से सबसे बेहतर परिणाम क्या हासिल हो सकता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप पर ईरान के खिलाफ तुरंत हमले शुरू करने के लिए दबाव नहीं डाला. उन्होंने कहा कि आखिरकार फैसला ट्रंप को ही लेना है.
ट्रंप को वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता
बैठक में सैन्य विकल्पों के अलावा युद्ध के व्यापक आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई. एक्सियोस के अनुसार, ट्रंप ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई.
नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका पर दबाव बनाने के अपने आखिरी बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. उनका कहना था कि दबाव कम करने के बजाय आर्थिक कार्रवाई को और कड़ा किया जाना चाहिए और नाकाबंदी जारी रखी जानी चाहिए.
बैठक में ईरान के आंतरिक सत्ता संघर्ष को लेकर भी चर्चा हुई. इजरायली अधिकारी के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व के भीतर एक ओर ऐसे लोग हैं, जिन्हें आर्थिक पतन की चिंता है, जबकि दूसरी ओर कट्टरपंथी धड़ा मानता है कि सैन्य नियंत्रण अपने हाथ में रहने तक शासन व्यवस्था कायम रह सकती है.
इजरायली अधिकारी ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी दावा किया कि वह जीवित हैं, लेकिन किसी ने उन्हें वास्तव में देखा है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती. हालांकि, यह दावा इजरायली अधिकारी के हवाले से सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
सीरिया और सऊदी अरब पर भी चर्चा
बैठक में ईरान के अलावा सीरिया और क्षेत्रीय रणनीति पर भी बातचीत हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप को सीरिया में इजरायल और तुर्की की सैन्य मौजूदगी की तुलना करने वाला एक नक्शा दिखाया. नेतन्याहू ने कहा कि जब तक दक्षिणी सीरिया में जिहादी समूहों से खतरा बना रहेगा, तब तक इजरायल वहां बफर जोन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा.
दोनों नेताओं ने संभावित अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते पर भी चर्चा की. ट्रंप ने इस मुद्दे को भविष्य में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंध सामान्य करने की संभावनाओं से जोड़कर देखा.
अमेरिकी सैन्य मदद पर निर्भरता कम करना चाहता है इजरायल
बैठक में अमेरिका की सैन्य सहायता पर इजरायल की निर्भरता कम करने का मुद्दा भी उठा. इजरायली अधिकारी के मुताबिक, नेतन्याहू ने ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से कहा कि इजरायल अगले एक दशक में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे खत्म करना चाहता है.
इसके लिए एक नए समझौते पर बातचीत का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत इजरायल को सीधे सैन्य सहायता देने के साथ-साथ संयुक्त मिसाइल रक्षा और हथियार विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने इजरायली रक्षा उद्योग को अगले 10 वर्षों में नई पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर काम शुरू करने का निर्देश भी दिया है. इसका उद्देश्य अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है.
ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित ईरान समझौते को लेकर कुछ इजरायली मंत्रियों की सार्वजनिक आलोचना के बाद यह बैठक और महत्वपूर्ण हो गई थी. इन टिप्पणियों पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. नेतन्याहू ने अपनी वॉशिंगटन यात्रा के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से भी अलग-अलग मुलाकात की.
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