भारत समेत 5 देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा अमेरिका! रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल सीनेट में पास

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी है. अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर कार्रवाई वाले बिल को 86-11 वोटों से मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव में रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है. अब बिल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति ट्रंप के पास भेजा जाएगा.

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यह बिल ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100% टैरिफ लगाने की ताकत देगा जो रूसी तेल-गैस लेते हैं (फाइल फोटो) यह बिल ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100% टैरिफ लगाने की ताकत देगा जो रूसी तेल-गैस लेते हैं (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:55 AM IST

US सीनेट (अमेरिका की राज्यसभा) ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य खरीदारों (जैसे चीन और भारत) पर फाइन लगाने वाले बिल को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है. तर्क दिया गया कि इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देता है.

इस बिल का नाम बदलकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है और इसे सीनेट ने 86-11 वोटों से मंजूरी दी.

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यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति देता है जो रूसी तेल और गैस के शीर्ष पांच आयातक हैं.

वर्तमान में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच खरीदार हैं.

रूस पर प्रतिबंधों के अलावा, यह बिल 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की टाइम लिमिट को 2031 तक बढ़ा देगा. यह कानून ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर फाइन लगाएगा.

दोनों पार्टियों के समर्थन वाले इस बिल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया) और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था.

कीव की यात्रा के बाद ग्राहम के अचानक निधन के बाद, दोनों पार्टियों के नेताओं ने नए जोश के साथ बिल को पास कराने और यूक्रेन के सहयोगी के रूप में दिवंगत सीनेटर की विरासत का सम्मान करने के लिए कदम उठाए.

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दिवंगत सीनेटर की बहन डार्लिन ग्राहम (जिन्हें उनके निधन के बाद उनकी सीट पर नियुक्त किया गया था) ने कहा, 'यह बिल रूस की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने वाले प्रमुख देशों को एक सरल लेकिन महत्वपूर्ण विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है. अमेरिका के साथ व्यापार करने या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदने के बीच का विकल्प.'

इसका मकसद रूसी नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना भी है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमीर उद्योगपति (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थान शामिल हैं.

वोटिंग के बाद, सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा, 'ये कड़े प्रतिबंध और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो इस जानलेवा, आपराधिक और आक्रामक युद्ध में शामिल हैं.'

कुछ डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यह बिल ट्रंप को टैरिफ से जुड़े नए अधिकार देगा, जबकि उन्होंने अपनी व्यापार नीति में ऐसे शुल्कों को केंद्र में रखा है.

अब यह बिल मंज़ूरी के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में जाएगा, जब वह 31 अगस्त को फिर से बैठक करेगा.

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