रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समर्थित सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी ने अपना बहुमत बरकरार रखा है. सोमवार को चुनाव अधिकारियों की ओर से जारी शुरुआती नतीजों के मुताबिक, पार्टी को एक बार फिर संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा में बंपर वोट मिले हैं और आंकड़ा प्रचंड बहुमत को पार कर चुका है.
यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब कई विपक्षी उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर थे और सरकार पर मीडिया तथा राजनीतिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण के आरोप लग रहे हैं.
कैसे चुने जाते हैं रूस में उम्मीदवार
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक, 95 फीसदी से ज्यादा मतदान केंद्रों की मतगणना के बाद यूनाइटेड रशिया को पार्टी लिस्ट के आधार पर डाली गई वोटिंग में करीब 58 फीसदी वोट मिले हैं. रूस की 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 225 सांसदों का चुनाव पार्टियों को मिले वोटों के आधार पर होता है, जबकि बाकी 225 सीटों पर सीधे उम्मीदवार चुने जाते हैं.
सीधे उम्मीदवारों वाली सीटों में भी यूनाइटेड रशिया का दबदबा दिखाई दिया. पार्टी के उम्मीदवार 208 सीटों पर आगे रहे. केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पैमफिलोवा ने कहा कि शुरुआती नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया को कुल 450 में से करीब 355 सीटें मिल सकती हैं.
यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद हुआ पहला संसदीय चुनाव है. मतदान यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों में भी कराया गया, जिन पर रूस ने कब्जा कर बाद में अपने देश में विलय की घोषणा कर दी थी. इसके अलावा 2014 में रूस में मिलाए गए क्रीमिया में भी मतदान हुआ. यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में कराए गए चुनाव को अवैध बताया है.
रूस में विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई भी चर्चा में
चुनाव से पहले रूस में विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई भी चर्चा में रही. युद्ध की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने वाली उदारवादी याब्लोको पार्टी को पिछले महीने रूस के सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी लिस्ट वाले चुनाव से बाहर कर दिया था. हालांकि उसके कुछ उम्मीदवार व्यक्तिगत निर्वाचन क्षेत्रों से मैदान में उतरे.
याब्लोको और कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि उनके कई चुनाव पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों में एंट्री ही नहीं लेने दी गई, कम्युनिस्ट पार्टी सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करती रही है, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन की सीधे तौर पर आलोचना करने से बचती रही है. रूस ने यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (OSCE) के पर्यवेक्षकों को चुनाव की निगरानी के लिए आमंत्रित नहीं किया.
रूसी विदेश मंत्रालय ने संगठन पर 'दोहरे मानदंड' अपनाने का आरोप लगाया. वहीं OSCE संसदीय सभा के अध्यक्ष पेर जोन पोंस ने इसे संगठन के सदस्य के रूप में रूस की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन बताया.
डोनेत्स्क के रूस के कब्जे वाले हिस्से में एक मतदान केंद्र पर हथियारबंद रूसी सैनिक की मौजूदगी में मतदाताओं के वोट डालने की तस्वीरें भी सामने आईं.
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