पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुआ रक्षा समझौता पूरी तरह डिफेंसिव है और इसका निशाना किसी देश को बनाना नहीं है. उन्होंने कहा कि यह समझौता क्षेत्र के किसी भी ऐसे देश के लिए खुला है, जो इसके मूल सिद्धांतों को मानने के लिए तैयार हो.
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर शुक्रवार को मक्का के अल-सफा पैलेस में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.
इशाक डार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह समझौता तीनों देशों के नेतृत्व और लोगों के बीच भाईचारे वाले संबंधों की गहराई को दिखाता है. उन्होंने कहा कि यह कई वर्षों से चली आ रही बातचीत और आपसी तालमेल का नतीजा है. इसका उद्देश्य शांति और सुरक्षा से जुड़ी अलग-अलग चुनौतियों से निपटने में रणनीतिक सहयोग मजबूत करना और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है.
शांति के प्रयासों को मजबूत करना
डार ने कहा कि यह समझौता तीनों देशों के बीच पहले से मौजूद किसी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय समझौते को खत्म या उसकी जगह नहीं लेता. उन्होंने कहा कि मक्का समझौता पूरी तरह डिफेंसिव है, किसी देश के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य व्यापक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए जारी प्रयासों को मजबूत करना है.
उन्होंने कहा कि तीनों में से किसी एक देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होने पर इसे सभी पर हमला माना जाएगा. यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के अनुरूप होगा. डार ने कहा कि मक्का समझौता क्षेत्र के उन देशों के लिए भी खुला रहेगा, जो इसके मूल सिद्धांतों को मानते हैं और आपसी सम्मान, सहयोग और शांतिपूर्ण तरीकों से मतभेद सुलझाने के लिए तैयार हैं.
क्यों हो रही इस समझौते चर्चा
यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों तक फैल चुका है, जिसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट भी शामिल हैं. इसके चलते खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाया है. पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू कराने की कोशिश भी की है.
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