PoK में इस्लामाबाद के खिलाफ बहुत बड़ा प्रदर्शन, लोगों ने कहा- हम PAK का हिस्सा नहीं हैं

PoK में एक बड़े विरोध प्रदर्शन ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. रावलकोट में हजारों लोग सड़कों पर उतरे. खाने की सप्लाई रोकने के आरोपों के बीच पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है.

Advertisement
राशन संकट, महंगाई और बिजली बिलों के खिलाफ सड़क पर उतरे हजारों लोग. (File Photo: ITG) राशन संकट, महंगाई और बिजली बिलों के खिलाफ सड़क पर उतरे हजारों लोग. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:57 PM IST

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. रावलकोट में हजारों प्रदर्शनकारी ईदगाह ग्राउंड पर जुटे. उन्होंने ऐलान किया कि PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद के कंट्रोल को चुनौती देते हुए खाने की सप्लाई पर रोक का विरोध किया. 

इसके साथ ही लोगों ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर अनदेखी, आर्थिक शोषण और दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया. यह प्रदर्शन लाइन ऑफ कंट्रोल के पास हुआ, जहां लोगों ने PAK सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की. इस प्रदर्शन को इस्लामाबाद के कंट्रोल के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.

Advertisement

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अम्मान खान ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, "PoK पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है. हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है, बल्कि उसको हमारी जरूरत है." इस पर प्रदर्शनकारियों ने जोरदार तालियां बजाईं. 

कई लोगों ने झंडे लहराए और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारे लगाए. यह विरोध प्रदर्शन पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे आंदोलन का हिस्सा है, जो अब राजनीतिक रूप ले चुका है. पाकिस्तानी अधिकारियों के दबाव के बावजूद हजारों लोग तीन हफ्ते से ज्यादा समय से रावलकोट में धरने पर बैठे हैं. वहां विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

'दूसरे रास्ते खुल गए तो...'

LoC के पास चल रहे धरने का जिक्र करते हुए सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान प्रशासन पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए खाने की सप्लाई रोकने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "हमारी औरतें और बच्चे सीजफायर लाइन पर जीरो पॉइंट पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि वे कश्मीरियों को फूड सप्लाई रोक देंगे."

Advertisement

उन्होंने कहा, "हमें आपके राशन की जरूरत नहीं है. आपको हमारी जरूरत है. ध्यान से सोचिए, आपको हमारी जरूरत है." सरदार खान ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा न हो कि दूसरे रास्ते खुल जाएं और फिर पाकिस्तान को लोगों से रुकने की अपील करनी पड़े. उन्होंने कहा, "ऐसा न होने दें कि दूसरे ट्रेड रूट फिर से खुल जाएं."

'यहां कोई मार्शल लॉ नहीं है'

सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान के शासकों से हालात सामान्य करने की अपील भी की है. उन्होंने कहा कि प्रशासन को लोगों की मर्जी को पहचानना चाहिए. उन्होंने कहा, "यदि आप हालात नॉर्मल करना चाहते हैं, तो शासकों को यह समझना होगा कि यह लोगों का राज है. यहां कोई मार्शल लॉ नहीं है. यहां कोई डिक्टेटर नहीं है."

उन्होंने कहा कि यदि कोई डिक्टेटर होता भी, तो लोग उसे मंजूर नहीं करते. कश्मीर पाकिस्तान की प्रॉपर्टी नहीं है. इसे याद रखें. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन का नया दौर तब शुरू हुआ जब पाकिस्तानी अधिकारियों ने PoK के कुछ हिस्सों में अनाज, आटा और रोजाना की दूसरी जरूरी चीजों की आवाजाही रोक दी.

सरकार ने माना सुरक्षा मुद्दा

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन पाबंदियों का मकसद आर्थिक दबाव बढ़ाकर आंदोलन को कमजोर करना था. आंदोलन कर रहे नेताओं के मुताबिक, यह प्रदर्शन अब 38 पॉइंट की मांगों को लेकर चल रहा है. इनमें महंगाई, बिजली की कीमतें, शासन व्यवस्था, सब्सिडी, बेरोजगारी और राजनीतिक भेदभाव जैसे मुद्दे शामिल हैं.

Advertisement

पाकिस्तानी अधिकारी इस आंदोलन को तेजी से सुरक्षा मुद्दे के तौर पर देख रहे हैं. कई रिपोर्टों के मुताबिक, सरदार अम्मान खान समेत एक्टिविस्ट और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के सदस्यों पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत केस दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई संगठन पर बैन लगाए जाने के बाद हुई.

आखिर क्यों है POK में उबाल

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानूनी कार्रवाई एक ऐसे आंदोलन को दबाने के लिए की गई, जिसकी शुरुआत आर्थिक परेशानियों से हुई थी लेकिन अब यह बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन गया है. वहीं इलाके की रिपोर्टों के मुताबिक जून की शुरुआत से PoK के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सर्विस बंद है.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कम्युनिकेशन रोकने का मकसद आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो बाहरी दुनिया तक पहुंचने से रोकना था. PoK में विरोध की यह लहर अचानक नहीं उठी है. इसके पीछे सालों से जमा गुस्सा बताया जा रहा है. लोग सरकार, बढ़ती कीमतों और संसाधनों के असमान बंटवारे से नाराज हैं.

JAAC पर एंटी-टेररिज्म एक्ट

PoK के लोग लंबे समय से गेहूं, आटे और बिजली पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह इलाका बड़ी मात्रा में हाइड्रोपावर पैदा करता है, लेकिन इसका फायदा पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों को मिलता है. वहीं स्थानीय लोगों को भारी बिजली बिलों का सामना करना पड़ता है.

Advertisement

प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद पर पहले हुए एग्रीमेंट के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप भी लगाया है. JAAC पर एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत बैन और पब्लिक ऑर्डर में रुकावट डालने के आरोपों के बाद आंदोलन और तेज हुआ. JAAC ने इन आरोपों को खारिज किया है और अपना कैंपेन जारी रखने की बात कही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »