भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बढ़ता तनाव अब सिर्फ जल विवाद तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री समेत कई बड़े नेताओं ने पिछले कुछ दिनों में वॉटर सिक्योरिटी को नेशनल सिक्योरिटी से जोड़ते हुए भारत के खिलाफ उकसावे वाली बयानबाजी की हैं. दूसरी तरफ पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि भारत के फैसलों की वजह से उसे गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है.
यही वजह है कि ताजा विवाद को सिर्फ पानी के बंटवारे के नजरिए से देखना नाकाफी होगा. इसके पीछे एक बड़ी कूटनीतिक साजिश, राजनीतिक और नैरेटिव वॉर भी दिखाई दे रहा है. सवाल है कि क्या सच में भारत ने पाकिस्तान का पानी रोक दिया है, या फिर पाकिस्तान इस मामले का ग्लोबल सपोर्ट हासिल करने और खुद को विक्टिम यानी पीड़ित के रूप में पेश करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है?
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कई बार जंग हथियार से नहीं, बल्कि दिमाग से लड़ी जाती है. टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमान बाद में आते हैं. पहले कहानी बनाई जाती है. पहले दुनिया को यह बताया जाता है कि कौन पीड़ित है और कौन हमलावर. इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जो बहस चल रही है, उसमें भी कुछ ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है.
हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि अगर पाकिस्तान की 'वॉटर सिक्योरिटी' को खतरा हुआ तो भारत के खिलाफ जंग भी एक विकल्प हो सकती है. यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है कि भारत ने सिंधु नदी का पानी रोक दिया और उसकी वजह से देश में जल संकट पैदा हो गया है. यह सिर्फ एक राजनीतिक बयान लग सकता है लेकिन अगर पिछले एक साल की घटनाओं को देखें तो एक बड़ा पैटर्न दिखाई देता है. पाकिस्तान सिर्फ पानी की बात नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया के सामने खुद को एक पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है.
कहानी की शुरुआत कहां से हुई?
पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान को 'तंदूर' बना दिया था. इससे पहले भारत ने सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से स्थगित कर दिया और कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. यहीं से पाकिस्तान ने नया नैरेटिव बनाना और विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया.
पाकिस्तान के नेताओं, अधिकारियों और मीडिया संस्थानों ने दुनिया को यह बताना शुरू किया कि भारत ने उसका पानी रोक दिया है. खबरें आने लगीं कि सिंध और बलूचिस्तान में जल संकट बढ़ गया है. कई नहरों में पानी का स्तर घट गया है. खेती प्रभावित हो रही है. किसानों को नुकसान हो रहा है. धीरे-धीरे यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक भी पहुंचने लगा कि पाकिस्तान पानी की कमी से जूझ रहा है और इसके पीछे भारत का फैसला जिम्मेदार है. रॉयटर्स और एपी जैसी मीडिया संस्थानों ने इन खबरों को प्रमुखता दी.
क्या भारत ने सच में पाकिस्तान का पानी रोक दिया है?
यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम सवाल है, जिसकी आड़ में पाकिस्तान खुद को एक पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश में जुटा है. आसान भाषा में समझें तो भारत ने सिंधु नदी का पूरा पानी नहीं रोका है. असलियत यह है कि सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों का जल प्रवाह आज भी पाकिस्तान की तरफ जा रहा है. भारत के पास अभी इतनी स्टोरेज क्षमता ही नहीं है और ना ही पानी रोकने के लिए पर्याप्त सिस्टम है कि वह इन नदियों के पानी को पूरी तरह रोक सके.
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फिर भारत ने क्या किया है?
भारत ने सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले सपोर्ट सिस्टम को खत्म कर दिया है. नदी के जल प्रवाह को लेकर दोनों मुल्कों के बीच बातचीत होती थी. संदेश एक दूसरे को भेजे जाते थे. जल प्रवाह, बांधों, परियोजनाओं और जल प्रबंधन को लेकर लगातार संपर्क होता था. अब भारत ने इसी सपोर्ट पर रोक लगा रखी है. मतलब पाकिस्तान को पहले की तरह यह जानकारी नहीं मिल रही कि कौन सी परियोजना बन रही है और जल प्रबंधन कैसे किया जा रहा है. यानी नदी का पानी पूरी तरह नहीं रोका गया है, लेकिन उसका प्रबंधन अब भारत अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से तय कर रहा है.
फिर पाकिस्तान में जल संकट क्यों दिख रहा है?
इस सवाल का जवाब सिर्फ भारत में नहीं, मौसम में भी छिपा है. भारत समेत दक्षिण एशिया में अल-नीनो का गंभीर असर देखा जा रहा है. कई क्षेत्रों में बारिश कम हुई है. हिमालयी इलाकों में बर्फबारी के पैटर्न भी प्रभावित हुए हैं. ग्लेशियरों से आने वाले पानी पर असर पड़ रहा है. ऐसे हालात में पाकिस्तान की नदियों और नहरों में पानी का स्तर कम होना लाजिमी है. लेकिन पाकिस्तान के लिए यह एक राजनीतिक मौका भी बन गया है.
अगर देश के अंदर पानी की कमी है, खेती प्रभावित हो रही है और जनता नाराज है, तो सरकार के सामने सबसे आसान रास्ता होता है किसी दूसरे देश को जिम्मेदार ठहराना और पाकिस्तान कर भी यही रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर विरोधियों को मैनिपुलेट किया जा सके.
पाकिस्तान का असली खेल क्या है?
पाकिस्तान असल में नैरैटिव वॉर कर रहा है. उसके नेता भारत को लेकर अक्सर उकसावे वाली बयानबाजी करते हैं. पाकिस्तान दुनिया को यह मैसेज देना चाहता है कि वह एक पीड़ित देश है. उसका पानी छीना जा रहा है. उसकी खेती बर्बाद हो रही है. उसकी जनता प्यास झेल रही है. अगर यह नैरेटिव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार कर लिया जाता है, तो पाकिस्तान को कई फायदे मिल सकते हैं. तनाव के हालात में पाकिस्तान ग्लोबल सपोर्ट हासिल कर सकता है.
इससे भारत पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है. ऐसा नैरेटिव फैलाकर पाकिस्तान स्थानीय स्तर पर भी लोगों का समर्थन हासिल कर सकता है. मसलन, अगर दुनिया पाकिस्तान के नैरेटिव वॉर से प्रभावित होती है तो मुनीर शासन किसी भी उकसावे वाले अपने कदम को आत्मरक्षा के रूप में पेश कर सकता है. यही वजह है कि पाकिस्तानी नेता सिंधु के पानी को नेशनल सिक्योरिटी से जोड़ रहे हैं. लोगों को यह महसूस करा रहे हैं कि उनकी परेशानियां भारत की वजह से हैं, ताकि पाकिस्तान शासन को विरोधों का सामना न करना पड़े.
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पाकिस्तान की सेना को इससे क्या फायदा?
पाकिस्तान की सेना के बारे में यह बात छिपी नहीं है कि पाकिस्तान की राजनीति में उसका कितना गहरा प्रभाव है. पाकिस्तान फिलहाल बड़े आर्थिक दबाव में है. जब भी कोई देश आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता या आम लोगों के विरोध का सामना करता है, तब राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा अचानक प्रमुख हो जाता है. पिछले कुछ समय में पाकिस्तान में जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन भी देखे गए हैं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी हालात खराब हैं.
इसी तरह बलूचिस्तान का हाल है, जहां बीएलए पाकिस्तानी सेना पर आए दिन हमले करती है. इनके अलावा पाकिस्तान आतंकी हमलों से भी जूझ रहा है. विदेशी कर्ज बढ़ा हुआ है. महंगाई और बेरोजगारी बड़ी चुनौतियां हैं. ऐसे में अगर जनता का ध्यान "भारत ने हमारा पानी रोक दिया" जैसे मुद्दे पर केंद्रित हो जाए, तो पाकिस्तान के लोग अपनी समस्याएं को दरकिनार कर भारत के विरोध में उतर सकते हैं. यही वजह है कि सिंधु जल विवाद को लगातार सुरक्षा और अस्तित्व के संकट के रूप में पेश किया जा रहा है.
भारत के लिए खतरा कहां है?
भारत के लिए यहां सैन्य स्तर पर कोई खतरा महसूस नहीं किया जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने पहले ही पाकिस्तान को कमजोर कर दिया था. एयरबेस और उसके सैन्य ठिकाने तबाह कर दिए गए थे. ताजा हालात में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती नैरेटिव है. भारत पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को एक आतंकी प्रोड्यूसर देश के रूप में पेश करने में सफल रहा है. इससे ग्लोबल लेवल पर पाकिस्तान की अहमियत भी कम हुई है. हालात ऐसे हैं कि उसे कोई कर्ज भी नहीं दे रहा है.
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अब पाकिस्तान भारत के खिलाफ अपना नया नैरेटिव दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश कर रहा है. वह चाहता है कि दुनिया आतंकवाद की जगह पानी पर बात करे. अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह धारणा बनती है कि पाकिस्तान में भारत की वजह से जल संकट है, तो भारत को कूटनीतिक स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि भारत को सिर्फ सैन्य या कानूनी स्तर पर नहीं, बल्कि इन्फोर्मेशन और डिप्लोमेटिक लेवल पर भी पूरी तरह एक्टिव रहना होगा.
एम. नूरूद्दीन