सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान की सौगात, गुरुद्वारा रामदास जी का होगा विस्तार

पाकिस्तान सरकार ने लाहौर में स्थित गुरुद्वारा जन्मस्थान गुरु रामदास जी के विस्तार का ऐलान किया है. गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर आयोजित समारोह में इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के सचिव नासिर मुश्ताक ने बताया कि गुरुद्वारे से लगी करीब 272 वर्ग मीटर व्यावसायिक जमीन को परिसर में शामिल किया जाएगा.

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सिख धर्म के चौथे गुरु रामदास जी का जन्म वर्ष 1534 में लाहौर में हुआ था. (Photo- Social Media) सिख धर्म के चौथे गुरु रामदास जी का जन्म वर्ष 1534 में लाहौर में हुआ था. (Photo- Social Media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:49 PM IST

पाकिस्तान सरकार ने लाहौर में स्थित गुरुद्वारा गुरु रामदास जी के विस्तार का ऐलान किया है. ऐसा होने से सिख श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए अधिक जगह और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी. शुक्रवार को गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व के मौके पर लाहौर के चुना मंडी में आयोजित एक समारोह के दौरान इसकी घोषणा की गई.

पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के सचिव नासिर मुश्ताक ने समारोह में बताया कि गुरुद्वारे से लगी करीब 13 मरला (272 वर्ग मीटर) व्यावसायिक जमीन को इसके परिसर में शामिल किया जाएगा. इससे गुरुद्वारे में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध होगी. 

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लाहौर में हुआ था गुरु रामदास जी का जन्म

बता दें कि रामदास जी सिख धर्म के दस गुरुओं में चौथे गुरु थे. उनका जन्म वर्ष 1534 में लाहौर में हुआ था. बचपन में उनका नाम जेठा था. सात साल की उम्र में माता-पिता का निधन होने के बाद उनका पालन-पोषण उनकी नानी ने एक गांव में किया था.

गुरु रामदास जी की जन्मस्थली होने के कारण लाहौर सिख समुदाय के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है. पाकिस्तान सरकार की ओर से गुरुद्वारे के विस्तार की घोषणा को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है.

गुरु रामदास जी की शिक्षाओं को किया याद

समारोह में नासिर मुश्ताक ने गुरु रामदास जी की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका संदेश प्रेम, शांति, भाईचारे, समानता और मानवता की सेवा पर आधारित था. उन्होंने कहा कि गुरु रामदास जी का जन्म लाहौर में होना पाकिस्तान के लिए गर्व की बात है. कार्यक्रम में पाकिस्तान के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा से आए सिख श्रद्धालुओं भी मौजूद रहे.

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