आजतक की टीम नेपाल के चितवन जिले में त्रिशूली नदी के किनारे पहुंची है, जहां नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान लगातार लापता लोगों के शव तलाश रहे हैं. 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी. इस हादसे में अब तक 163 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं, जिनमें सुरक्षाकर्मी और विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. नारायणघाट के पास अकेले 35 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि भारत-नेपाल सीमा के पास गंडक बराज इलाके से भी दो शव मिले हैं.
नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान प्रकाश उपाध्याय ने आजतक को बताया कि 26 अगस्त की घटना बेहद भयानक थी. उनकी टीम अब नदी के बहाव वाले इलाकों में भी तलाश कर रही है, क्योंकि आशंका है कि कई शव पानी के साथ आगे बह गए होंगे. भारत-नेपाल सीमा के आसपास भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि नेपाल से बहकर आने वाले शवों का पता लगाया जा सके.
अब सवाल यह है कि आखिर यह भीषण बाढ़ आई कैसे. रिपोर्ट के मुताबिक, यह हादसा नेपाल-चीन सीमा के पास हिमस्खलन यानी बर्फ के पहाड़ खिसकने की वजह से हुआ. इस हिमस्खलन ने भोटेकोशी नदी की एक सहायक नदी लेंधे का रास्ता रोक दिया, जिससे पानी और मलबा एक जगह जमा होने लगा.
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बाद में यह दबाव अचानक टूटा और भारी मात्रा में पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगा. सबसे पहले इसकी चपेट में रसुवागढ़ी के पास स्थित तिमुरे गांव आया, जहां सैकड़ों लोग रहते थे. उस दिन इलाके में बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को खतरे का कोई अंदाजा ही नहीं था. लोग अपने रोजमर्रा के काम में लगे थे, तभी अचानक पानी का सैलाब आ गया.
हादसे की गंभीरता को देखते हुए रसुवा के मुख्य कस्टम अधिकारी राजेंद्र धुंगाना समेत कई लोग जान बचाकर पास के जंगल की ओर भागे. कस्टम चेकपॉइंट पर खड़ी 300 से ज्यादा गाड़ियां और ट्रक बाढ़ में बह गए. नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी एनडीआरआरएमए ने बताया कि यह बाढ़ रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टान खिसकने से आई. आपदा विशेषज्ञ बसंत राज अधिकारी ने भी इसी वजह की पुष्टि की है.
इस बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन से नेपाल के नौ जिलों में सड़कें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. कई जगहों पर मिट्टी और पत्थर जमा होने से रास्ते बंद हो गए हैं. काठमांडू को दूसरे जिलों से जोड़ने वाला नागढुंगा-मुगलिंग हाईवे पूरी तरह बंद कर दिया गया है. इसके अलावा इलाम का मेची हाईवे, काभ्रे का बीपी हाईवे, मकवानपुर का कांति लोकपथ, रसुवा और नुवाकोट के नेशनल हाईवे, धादिंग का पृथ्वी हाईवे और चितवन-जाजरकोट को जोड़ने वाली सड़क पर भी आवाजाही ठप है.
इस आपदा में नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ बैंक शाखाएं भी तबाह हो गई हैं. शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें बाढ़ में बह गई हैं. निजी और सरकारी संपत्ति के नुकसान का अभी सही आकलन नहीं हो पाया है.
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लापता लोगों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा अधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाढ़ नेपाल के इतिहास की सबसे बड़ी आपदाओं में गिनी जा सकती है. यह हादसा 1993 में सरलाही, रौतहट और मकवानपुर में आई उस बाढ़ से भी बड़ा साबित हो सकता है, जिसमें 1400 लोगों की जान गई थी और जो अब तक नेपाल की सबसे बड़ी आपदा मानी जाती रही है.
रोहित कुमार सिंह