नेपाल हिंसा: धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हालात, धनुषा से हटी निषेधाज्ञा

नेपाल के धनुषा जिले में सांप्रदायिक हिंसा के बाद लागू निषेधाज्ञा सोमवार सुबह हटा दी गई है. प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सामान्य होने और प्रदर्शनकारियों द्वारा विरोध वापस लेने के कारण यह निर्णय लिया गया.

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नेपाल के सुनसरी में 26 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी नेपाल के सुनसरी में 26 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

नेपाल में बीते हफ्ते भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब धीरे-धीरे शांति लौट रही है. धनुषा जिले के जनकपुरधाम और आसपास के इलाकों में लागू निषेधाज्ञा सोमवार सुबह हटा दी गई. नेपाल की न्यूज वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन कार्यालय ने बताया कि सोमवार, 3 अगस्त को सुबह 5 बजे से यह आदेश प्रभावी हो गया है.

प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य होने और प्रदर्शनकारी समूहों द्वारा अपने सभी तरह प्रोटेस्ट प्लान और प्रदर्शनों को वापस लेने के बाद यह फैसला लिया गया.

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डेली एक्टिविटी पहले की तरह सामान्य

धनुषा के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) प्रेम प्रसाद लुइटेल की ओर से जारी सूचना के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. इसके बाद जिला सुरक्षा समिति की बैठक में निषेधाज्ञा हटाने का फैसला लिया गया. प्रशासन ने कहा कि अब जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है और लोगों की दैनिक गतिविधियां पहले की तरह शुरू हो गई हैं.

गौरतलब है कि स्थानीय प्रशासन ने 1 अगस्त को सुबह 10 बजे से स्थानीय प्रशासन अधिनियम, 1971 की धारा-6 के तहत जनकपुरधाम उपमहानगरपालिका और आसपास के क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू की थी. यह कदम क्षेत्र में बिगड़ते हालात और संभावित तनाव को देखते हुए उठाया गया था.

प्रशासन के अनुसार, विरोध प्रदर्शन समाप्त होने, सुरक्षा एजेंसियों की लगातार निगरानी और क्षेत्र में शांति बहाल होने के बाद प्रतिबंध जारी रखने की जरूरत नहीं रह गई. इसलिए निषेधाज्ञा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है. निषेधाज्ञा हटने के बाद जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से शांति, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है. लोगों से कहा गया है कि वे सामान्य रूप से अपने दैनिक कार्य करें और किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ गतिविधि से दूर रहें.

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वहीं, इस सांप्रदायिक हिंसा के मामलों की बारीकी से जांच के बाद चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं. कप्तानगंज हिंसा के बाद नेपाल प्रेस काउंसिल ने पाया कि कुछ मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया ने भ्रामक व सांप्रदायिक कंटेट को प्रसारित कर हिंसा और तनाव को बढ़ावा दिया. ऐसे संस्थानों और सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है.

नेपाली की न्यूज वेबसाइट नेपाल न्यूज पर पब्लिश खबर के मुताबिक, नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज में सांप्रदायिक तनाव के बाद नेपाल प्रेस काउंसिल ने मीडिया और सोशल मीडिया की निगरानी में पत्रकारिता आचार संहिता के उल्लंघन के 90 मामले पकड़े हैं.

ऐसे कंटेट की वजह से ही धार्मिक और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाया गया, हिंसा और नफरत को बढ़ावा दिया और समाज में तनाव फैलाने का काम किया गया है. कुछ सोशल मीडिया ने विवादित सामग्री हटाने से यह कहकर इनकार कर दिया कि उन्हें इससे प्रॉफिट हो रहा है और मॉनेटाइजेशन की कमाई हो रही है.

26 जुलाई की रात से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद 26 जुलाई की रात सुनसरी के कप्तानगंज में दो समुदायों के बीच मामूली विवाद के बाद शुरू हुआ था. झड़प के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए. बाद में घायल एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई. इसके बाद तनाव सुनसरी से निकलकर सिराहा और जनकपुर तक फैल गया. सिराहा में भी हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की जान चली गई थी.

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