नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने वाली लेखिका नवी पिल्लै गाजा युद्ध के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहरा चुकी हैं. जब शुक्रवार को नवी पिल्लै को पता चला कि उन्हें 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है, तो वह जर्मनी के नूर्नबर्ग में कोर्टरूम 600 में थीं, जहां दूसरे विश्व युद्ध के बाद नाजी नेताओं पर मुक़दमा चलाया गया था.
भारतीय मूल की दक्षिण अफ़्रीकी न्यायविद पिल्लै ने शुक्रवार को हुई घोषणा के बाद कहा, "शायद ऐसा ही होना था कि जब पुरस्कार की घोषणा हुई और मुझे इसके बारे में बताया गया, तो मैं उसी ऐतिहासिक कोर्टरूम 600 में मौजूद थी, जहां नूर्नबर्ग मुक़दमे चले थे."
85 साल की इस कानूनी विशेषज्ञ ने यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय अपराधों से बचे लोगों और अंतरराष्ट्रीय न्याय को आगे बढ़ाने के लिए काम करने वालों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि उनकी "हमदर्दी और हिम्मत यह पक्का करती है कि दोषियों को सजा से बचने नहीं दिया जाएगा."
उन्होंने कहा, "हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों पर बड़े राजनीतिक हमले हो रहे हैं." उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) पर हमलों की ओर इशारा किया और चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय को कमज़ोर करने की कोशिशों से नूर्नबर्ग ट्रायल के बाद हुई प्रगति के खत्म होने का खतरा है.
उन्होंने कहा, "इससे हमें ऐसी दुनिया में लौटने का खतरा है जहां कानून के बजाय ताकत यह तय करती है कि किसकी तकलीफ़ मायने रखती है."
जब नेतन्याहू को कठघरे में खड़ा किया
नवी पिल्लै ने कुछ ही महीने पहले पूर्वी यरुशलम और इजरायल और फिलिस्तीन में UN के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता की थी.
सितंबर 2025 में इस आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि इजरायली अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने गाजा में फिलिस्तीनियों का नरसंहार किया था. और वे ऐसा करना जारी रखे हुए थे. आयोग ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने नरसंहार के लिए उकसाया था. इजरायल ने आयोग के निष्कर्षों को खारिज कर दिया था.
बेशक ये निष्कर्ष एक जांच आयोग के थे. किसी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का फैसला नहीं.
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