अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है. तेल समृद्ध देश कुवैत पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत पाकिस्तान के साथ ऐसा रक्षा समझौता करना चाहता है, जैसा पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ किया था. हालांकि, दोनों देशों के बीच पहले से रक्षा सहयोग समझौता मौजूद है, लेकिन अब इसे और व्यापक बनाने पर बातचीत चल रही है.
हाल ही में कुवैत ने 2023 में पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा सहयोग समझौते को औपचारिक मंजूरी दी है. इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं सैन्य प्रशिक्षण, इंटेलिजेंस साझा करने, लॉजिस्टिक्स, रक्षा तकनीक, साइंटिफिक रिसर्च, सैन्य निर्माण और संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगी.समझौते के अमल के लिए एक संयुक्त सैन्य समिति भी बनाई जाएगी. यह समझौता पांच साल तक प्रभावी रहेगा और किसी पक्ष की आपत्ति न होने पर स्वतः बढ़ जाएगा.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत इससे भी बड़ा रक्षा समझौता चाहता है, जिसमें जरूरत पड़ने पर दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य मदद करें.यह मॉडल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते जैसा होगा.उस समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब में हजारों सैनिक, JF-17 लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं.
पाकिस्तान के सामने क्या है चुनौती?
हालांकि, पाकिस्तान इस तरह के नए समझौते को लेकर सतर्क नजर आ रहा है.अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच इस्लामाबाद नहीं चाहता कि वह किसी बड़े क्षेत्रीय सैन्य टकराव में सीधे शामिल हो जाए. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकारियों ने साफ किया है कि फिलहाल कुवैत में लड़ाकू सैनिकों की तैनाती पर विचार नहीं किया जा रहा है.
ऊर्जा सहयोग भी बातचीत का हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा सहयोग के साथ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और साझेदारी पर भी बातचीत चल रही है. कुवैत पाकिस्तान में ईंधन भंडारण सुविधा विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है. हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता,तब तक नाटो जैसे व्यापक रक्षा समझौते पर अंतिम फैसला होना मुश्किल होगा.
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