'रेप के लिए कुत्तों का इस्तेमाल, महिला अफसर ने...', इजरायली जेलों में फिलिस्तीनी कैदियों की खौफनाक दास्तां

गाजा युद्ध के बाद इजरायली जेलों से रिहा हुए कुछ फिलिस्तीनी कैदियों ने गंभीर यातना और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. एक जांच में सामने आए इन दावों में कुत्तों के इस्तेमाल, जबरन नग्न करने, मारपीट और पहचान मिटाने जैसी बातें शामिल हैं.

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ईरान की जेल में रेप के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं. (Photo- ITG) ईरान की जेल में रेप के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं. (Photo- ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों के साथ कथित तौर पर किए गए अमानवीय व्यवहार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं. एक रिपोर्ट में कई पूर्व कैदियों ने ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्हें सुनकर रूह कांप जाए. इन आरोपों में सामूहिक दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, कुत्तों के इस्तेमाल और लगातार शारीरिक प्रताड़ना जैसी बातें शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद हिरासत में लिए गए कई फिलिस्तीनियों ने जेलों में अपने साथ हुई कथित प्रताड़ना की कहानी सुनाई है.

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गाजा के रहने वाले एक पूर्व कैदी ने बताया कि अप्रैल 2024 में रमजान के आखिरी दिनों में करीब 12 सैनिक और उनके कुत्ते उनकी कोठरी में घुस आए. कैदी के मुताबिक, उन्हें कपड़े उतरवाकर प्रताड़ित किया गया और यौन हिंसा का शिकार बनाया गया. उन्होंने कहा, "हम 'या अल्लाह' चिल्ला रहे थे, लेकिन वे सिर्फ हंस रहे थे और हमारा वीडियो बना रहे थे."

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पूर्व कैदी ने बताया कि कैदियों के हाथ-पैर बांधकर उन्हें पेट के बल लिटा दिया जाता था. इसके बाद कुत्तों को उनके ऊपर चलने का आदेश दिया जाता था. उन्होंने दावा किया कि प्रताड़ना के लिए लोहे की छड़ों, चाकू, आइरन डिटेक्टर और बोतलों जैसी चीजों का भी इस्तेमाल किया जाता था.

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पेशे से मजदूर एक अन्य पूर्व कैदी ने आरोप लगाया कि महिला अधिकारियों ने भी उसके साथ फिजिकल चीजों का इस्तेमाल कर यौन उत्पीड़न किया. उसने बताया कि जब उसकी पीठ और गर्दन पर बूट रखकर उसे दबाया गया, तब आसपास मौजूद सैनिक तालियां बजा रहे थे और पूरी घटना का वीडियो बना रहे थे.

'नुख्बा है तो सब कुछ जायज'

रिपोर्ट में 2024 के उस विवादित वीडियो का भी जिक्र किया गया है, जिसमें सैनिकों को एक कैदी के साथ कथित दुष्कर्म की घटना को छिपाने के लिए ढाल बनाते हुए देखा गया था. बताया गया कि पीड़ित कैदी इतना बुरी तरह घायल हो गया था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा था.

वीडियो सामने आने के बाद कुछ इजरायली सैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कई दक्षिणपंथी नेताओं ने उनका बचाव किया. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी के सांसद हनोच मिलविडस्की से जब पूछा गया कि क्या किसी व्यक्ति की प्राइवेट पार्ट में कोई ऑब्जेक्ट डालना जायज है, तो उन्होंने जवाब दिया, "अगर वह नुख्बा (हमास लड़ाका) है, तो उसके साथ सब कुछ करना जायज है." राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर ने भी सैनिकों के समर्थन में बयान दिया था.

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UN रिपोर्ट्स में भी उठाए गए सवाल

ये आरोप पहली बार सामने नहीं आए हैं. मार्च 2025 में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायल द्वारा व्यवस्थित रूप से यौन और लैंगिक हिंसा का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं. इसके अलावा नवंबर 2025 में जारी एक अन्य UN रिपोर्ट में इज़राइल पर "संगठित और व्यापक यातना" को एक तरह की "डी फैक्टो राज्य नीति" के रूप में अपनाने का आरोप लगाया गया था.

रिपोर्ट में गंभीर पिटाई, डॉग अटैक, बिजली के झटके, वॉटरबोर्डिंग, यौन हिंसा और कैदियों को लंबे समय तक तनावपूर्ण परिस्थितियों में रखने जैसी घटनाओं पर चिंता जताई गई थी. आंकड़ों के मुताबिक, 1967 के बाद से 7.5 लाख से अधिक फिलिस्तीनियों को इज़राइल द्वारा हिरासत में लिया जा चुका है. हाल के वर्षों में संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा को लेकर भी इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं.

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