ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद करने की घोषणा की है. इसके पीछे उन्होंने युद्ध खत्म करने वाले समझौते (MOU) का अमेरिका द्वारा उल्लंघन, दक्षिणी लेबनान से सेना न हटाने और इजरायल की ओर से लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करने का कारण बताया है.
ईरानी सेना ने इसे पहला कदम बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर उल्लंघन जारी रहा, तो और भी कदम उठाए जाएंगे. बता दें, अमेरिका और ईरान ने इस हफ्ते एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की घोषणा की गई थी.
वहीं फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि तेहरान के साथ वॉशिंगटन के 14-सूत्रीय समझौते में तय किया गया संघर्ष-विराम बना रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि होर्मुज समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है.
इस बीच, अमेरिका और ईरान के सीजफायर समझौते की खबरों के कुछ ही घंटों बाद शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं.
डील पर मंडराया खतरा
अब ईरानी सेना द्वारा दोबारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर प्रतिबंध लगाने से समझौते पर संकट गहरा गया है. इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को ईरान पहुंचे हैं.
माना जा रहा है कि मोहसिन नकवी ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर नजर रखेंगे. जहां एक ओर ईरान की सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की है.
पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के करीबी माने जाने वाले नकवी ने MoU पर हस्ताक्षर से पहले अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने और आपसी मतभेद दूर करने के उद्देश्य से ईरान की कम से कम तीन अहम यात्राएं की थीं.
हमने वादों का पालन किया- ईरान
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि हमने अपने वादों का पालन किया है, और अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करे. स्विट्जरलैंड में हम अमेरिका से उसके वादों को लागू करने की मांग करेंगे और यह जानेंगे कि वे उन्हें कैसे पूरा करने का इरादा रखते हैं.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि अगर दूसरी पार्टी के कुछ वादे लागू नहीं किए गए, तो समझौता मुश्किल में पड़ जाएगा.
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