ईरान ने कट्टरपंथी कमांडर मोहसिन रेजाई को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, SNSC के बने सचिव

ईरान ने पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया है. रेजाई को कट्टरपंथी नेता माना जाता है और वे अमेरिका के प्रति आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं.

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ईरान ने पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया है ईरान ने पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST

ईरान ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) का सचिव नियुक्त किया है. 71 वर्षीय रेजाई ईरान के सबसे प्रमुख कट्टरपंथी नेताओं में गिने जाते हैं और अमेरिका के प्रति अपने आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं. अमेरिका के साथ जारी टकराव के पांच महीने से अधिक समय बाद उन्हें देश की सुरक्षा व्यवस्था में यह अहम जिम्मेदारी दी गई है.

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रेजाई ने मोहम्मद बाकर जोलकद्र की जगह ली है, जिन्हें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई का राजनीतिक सलाहकार बनाया गया है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की अध्यक्षता वाली SNSC ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों के तालमेल के लिए सबसे जरूरी विंग है. इसमें देश के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और खुफिया अफसर शामिल होते हैं.

मार्च में वरिष्ठ ईरानी अधिकारी अली लारीजानी की हत्या के बाद रेजाई SNSC को लीड करने वाले दूसरे व्यक्ति हैं. सुप्रीम लीडर खामेनेई ने भी रेजाई को काउंसिल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है. उन्होंने रेजाई के मिलिट्री अनुभव और ईरान-इराक वॉर में उनकी भूमिका का जिक्र करते हुए नियुक्ति का ऐलान किया.

रेजाई का ईरानी सुरक्षा प्रतिष्ठान में सफर 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद तेजी से आगे बढ़ा. वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल हुए और 1981 में महज 27 साल की उम्र में इसके कमांडर बन गए. उन्होंने करीब 16 वर्षों तक IRGC को लीड किया. उनके कार्यकाल में 1980-88 का ईरान-इराक युद्ध भी शामिल था.

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रेजाई बाद में राजनीति में भी एक्टिव रहे और कई बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा. इब्राहिम रईसी की सरकार में वह 2021 से 2023 तक आर्थिक मामलों के उपराष्ट्रपति भी रहे. उनके पास तेहरान यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री है.

अमेरिका के साथ संघर्ष के दौरान रेजाई ने कई बार बेहद सख्त बयान दिए हैं. अप्रैल में उन्होंने अमेरिकी जमीनी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को बंधक बनाने की बात कही थी. वह अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर भी संदेह जताते रहे हैं.

रेजाई का नाम 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स स्थित AMIA यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुए बम धमाके के मामले में भी सामने आया था. हमले में 85 लोगों की मौत हुई थी. अर्जेंटीना ने रेजाई समेत कई ईरानी अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं और इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था. ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

रेजाई की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी तनाव बना हुआ है. रेजाई इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरान के नियंत्रण को बेहद अहम बताते रहे हैं. ऐसे में SNSC में उनकी वापसी ईरान की सुरक्षा और अमेरिका को लेकर उसकी आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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