ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक दंपती को कोविड महामारी के दौरान करोड़ों डॉलर के पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट घोटाले में दोषी ठहराया गया है. आरोप है कि दंपती ने PPE की आपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की और इस रकम का इस्तेमाल लग्जरी कार, महंगी घड़ियां, छुट्टियों और घर के नवीनीकरण पर किया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 59 वर्षीय जोगेश भंडारी और उनकी 58 वर्षीय पत्नी मीनाक्षी (मीना) भंडारी को लीसेस्टर क्राउन कोर्ट में पांच हफ्ते तक चली सुनवाई के बाद दोषी पाया गया. इस मामले में दंपती की कंपनी की ओर से कई फर्जी PPE सौदों में काम करने वाले 43 वर्षीय क्रेग मॉरिस को भी दोषी ठहराया गया है. तीनों को 21 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी.
ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) के मुताबिक, तीनों ने दावा किया था कि वे कोविड महामारी के दौरान लाखों डिब्बे नाइट्राइल दस्ताने उपलब्ध करा सकते हैं. उस समय दुनिया भर के अस्पताल और कारोबार PPE की कमी से जूझ रहे थे और सुरक्षा उपकरणों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई थी.
NCA के ऑपरेशंस मैनेजर पॉल बोनिफेस ने कहा कि महामारी के दौरान पीपीई की अचानक बढ़ी मांग ने धोखाधड़ी करने वालों को कारोबारियों को निशाना बनाने और खुद की जेब भरने का मौका दिया.
जोगेश भंडारी ने 2020 में नाइट्राइल दस्तानों के कारोबार के लिए एक कंपनी बनाई थी. जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसने लुइसियाना के तत्कालीन असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल फ्रैंक लाब्रुज्जो के साथ मिलकर कथित फर्जी एस्क्रो सेवा का इस्तेमाल किया. इसके जरिए खरीदारों से मिलने वाली रकम को सामान की डिलीवरी पूरी होने तक सुरक्षित रखने के बजाय दूसरी कंपनियों के खातों में भेज दिया जाता था.
करोड़ों रुपये लिए, लेकिन दस्तानों की डिलीवरी नहीं की
NCA के मुताबिक, पहला फर्जी सौदा नवंबर 2020 में 1.2 करोड़ बॉक्स दस्तानों की आपूर्ति को लेकर हुआ था. खरीदारों से मिली रकम एस्क्रो में रखने के बजाय भंडारी, लाब्रुज्जो और उनसे जुड़ी कंपनियों को ट्रांसफर कर दी गई.
इसके एक महीने बाद खाते में 27 लाख डॉलर और जमा हुए. एजेंसी का आरोप है कि इसमें से करीब 5 लाख डॉलर का इस्तेमाल भंडारी दंपती के निजी कर्ज चुकाने में किया गया.
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि भंडारी ने 12.5 करोड़ डॉलर तक की रकम दिखाने वाले फर्जी बैंक स्टेटमेंट और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, ताकि सप्लायर्स को भरोसा दिलाया जा सके कि वह बड़े PPE सौदों को पूरा करने की आर्थिक क्षमता रखता है.
2021 की शुरुआत में भंडारी को अमेरिका के अस्पतालों के लिए नाइट्राइल दस्तानों की आपूर्ति के नाम पर 31.8 लाख डॉलर से अधिक मिले, लेकिन ये दस्ताने कभी अस्पतालों तक नहीं पहुंचे.
NCA के अनुसार, अंतिम योजना 1.8 अरब डॉलर के PPE कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी थी. एक सप्लायर ने कथित तौर पर 13.5 लाख डॉलर तब दिए, जब उसे एक फर्जी पत्र मिला, जिसमें दावा किया गया था कि पहली खेप की सुरक्षा के लिए भंडारी ने 3.5 करोड़ डॉलर जमा किए हैं.
ठगी के पैसों से खरीदी पोर्शे, Rolex और महंगी चीजें
जांचकर्ताओं के मुताबिक, PPE खरीदने के बजाय ठगी की रकम का इस्तेमाल आलीशान जीवनशैली पर किया गया. BBC के अनुसार, जोगेश भंडारी ने 1.26 लाख पाउंड की नई पोर्शे खरीदी. NCA ने कहा कि दंपती ने Rolex घड़ियों, आभूषणों, लग्जरी छुट्टियों और घर के नवीनीकरण पर भी लाखों पाउंड खर्च किए.
एजेंसी के मुताबिक, इस रकम से ऑडी A5, लैंड रोवर डिस्कवरी और फॉक्सवैगन गोल्फ जैसी कारें भी खरीदी गईं.
जांचकर्ताओं ने भंडारी और मॉरिस के बीच करीब 47 हजार वॉट्सऐप मैसेज बरामद किए. एक मैसेज में मॉरिस ने PPE की कमी का जिक्र करते हुए लिखा, 'चलो इसे भुनाते हैं.' इसके जवाब में भंडारी ने टीमवर्क और सभी के पैसे कमाने की बात कही. एक अन्य बातचीत में भंडारी ने रॉल्स रॉयस की तस्वीर भेजकर कहा कि अगर उसे ऐसी कार चाहिए तो उन्हें यह काम जारी रखना होगा.
NCA ने दी धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
तीनों आरोपियों को NCA की जांच के बाद फरवरी 2023 में गिरफ्तार किया गया था. NCA के अधिकारी पॉल बोनिफेस ने कहा कि भंडारी और उसके सहयोगियों ने महामारी के दौरान पैदा हुई कमजोर परिस्थितियों का फायदा उठाकर लोगों और कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया और अपनी आलीशान जीवनशैली को वित्त पोषित किया.
उन्होंने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी जरूरी उपकरणों को वास्तविक जरूरतमंद संस्थानों तक पहुंचने से रोकती है और इसका असर केवल तत्काल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता. NCA ने कहा कि वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी.
इसी मामले से जुड़े लुइसियाना के पूर्व असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल फ्रैंक लाब्रुज्जो और एक अन्य आरोपी को अमेरिका में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है.
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