डच वैज्ञानिक से क्रूज पर फैला हंतावायरस? फंसे यात्रियों को निकाल रहा स्पेन, जानिए डिटेल

अंटार्कटिक क्रूज MV होंडियस पर हंता वायरस के मामले के बाद स्थिति गंभीर हो गई है. एक डच पक्षी विज्ञानी को संक्रमण का शुरुआती संदिग्ध यानी 'पेशेंट जीरो. माना जा रहा है. इसी बीच स्पेन सरकार ने फंस यात्रियों को बाहर निकालने का आदेश दिया है.

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डच पक्षी विज्ञानी लियो शिलपेरूर्ड  (Photo: Facebook) डच पक्षी विज्ञानी लियो शिलपेरूर्ड (Photo: Facebook)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:22 AM IST

अंटार्कटिक की बर्फीली लहरों के बीच सैर पर निकला MV होंडियस क्रूज अचानक पूरी दुनिया की सुर्खियों में आ गया है. इस आलीशान जहाज पर जानलेवा हंतावायरस का साया मंडराने लगा है, जिससे यात्रियों और वैज्ञानिकों के बीच दहशत फैल गई है. इस पूरे मामले में एक डच पक्षी विज्ञानी को संक्रमण का शुरुआती संदिग्ध यानी 'पेशेंट जीरो' माना जा रहा है. इसी बीच, स्पेन सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए जहाज पर फंसे मुसाफिरों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है. 

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इस पूरी कहानी की कड़ियां एक बुजुर्ग डच दंपत्ति से जुड़ती हैं, जो पक्षियों को देखने के जुनून में दक्षिण अमेरिका की लंबी यात्रा पर निकले थे. 70 साल के लियो शिलपेरूर्ड और उनकी पत्नी मिरर्जाम कई महीनों से अलग-अलग देशों में घूम रहे थे. अपनी यात्रा के दौरान वे अर्जेंटीना में एक ऐसी जगह पहुंचे, जहां शहर का कूड़ा डाला जाता है. अक्सर पक्षी प्रेमी दुर्लभ परिंदों को देखने के लिए ऐसी जगहों पर जाते हैं. जानकारों का मानना है कि इसी जगह मौजूद चूहों की गंदगी के जरिए ये जानलेवा हंतावायरस उनके शरीर में पहुंच गया.

लियो और मिरर्जाम 1 अप्रैल को इसी क्रूज पर सवार हुए थे. सफर के दौरान लियो की तबीयत अचानक बिगड़ी और 11 अप्रैल को जहाज पर ही उनकी मौत हो गई. इसके कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी मिरर्जाम ने भी दम तोड़ दिया. क्योंकि, हंतावायरस का यह स्ट्रेन इंसानों से इंसानों में फैल सकता है, इसलिए पूरे जहाज पर खौफ का माहौल बन गया. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है.

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स्पेन सरकार का एक्शन और यात्रियों का रेस्क्यू

खतरे की गंभीरता को देखते हुए स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत मोर्चा संभाला. उन्होंने जानकारी दी है कि हंतावायरस से प्रभावित इस जहाज से यात्रियों को निकालने का काम अब अपने अंतिम चरण में है. यात्रियों को वापस भेजने के लिए अंतिम दो उड़ानें सोमवार दोपहर को रवाना की जाएंगी. स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर मुसाफिर की बारीकी से जांच कर रही हैं.

अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां उन सभी लोगों को ट्रैक कर रही हैं जो इस यात्रा के दौरान डच दंपत्ति के संपर्क में आए थे. मकसद सिर्फ एक है, इस जानलेवा वायरस को आगे फैलने से रोका जा सके. फिलहाल, जहाज से सुरक्षित निकाले गए यात्रियों और खासकर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा ने बड़ी राहत दी है. ये घटना याद दिलाती है कि प्रकृति के करीब जाने की चाहत में कभी-कभी अनजाने खतरे भी साथ आ जाते हैं.

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