इस 'छुटकू' देश ने ट्रंप को दिखाई आंख... अमेरिकी डील को कहा NO, डेटा प्राइवेसी के उल्लंघन का डर

घाना ने डेटा प्राइवेसी चिंताओं के चलते अमेरिका के साथ प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौता ठुकरा दिया है. डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत हुए ऐसे समझौतों पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे डेटा सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर अफ्रीकी देशों की चिंताएं सामने आई हैं.

Advertisement
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (L) और घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा. (Photo: Reuters) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (L) और घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • अक्करा,
  • 02 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:01 AM IST

पश्चिम अफ्रीकी देश घाना ने डेटा प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हुए अमेरिका के साथ प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौते को खारिज कर दिया है. एक अधिकारी ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की. घाना के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अर्नोल्ड कवार्पुओ के मुताबिक, इस समझौते में ऐसे प्रावधान थे, जिनसे अमेरिकी संस्थाओं को घाना के संवेदनशील हेल्थ डेटा तक बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के पहुंच मिल सकती थी. उन्होंने कहा कि मांगा गया डेटा एक्सेस आमतौर पर आवश्यक सीमा से कहीं ज्यादा था.

Advertisement

इस बारे में अमेरिकी विदेश विभाग से पूछे जाने पर उसके एक प्रवक्ता ने कहा कि हम द्विपक्षीय वार्ताओं के विवरण सार्वजनिक नहीं करते. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि हम दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के रास्ते तलाशते रहेंगे. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी' के तहत वाशिंगटन ने 30 से अधिक देशों, खासकर अफ्रीकी देशों के साथ इस तरह के स्वास्थ्य समझौते किए हैं. यह नई व्यवस्था पिछले साल के अंत में शुरू हुई, जो इससे पहले के समझौतों की जगह लेगी. 

अब तक यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के तहत ऐसे समझौते होते थे. ट्रंप प्रशासन ने इस व्यवस्था को अब समाप्त कर दिया है. इन स्वास्थ्य समझौतों के तहत अफ्रीकी देशों को सैकड़ों मिलियन डॉलर की सहायता देने का प्रस्ताव है, ताकि उनके सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम को मजबूत किया जा सके और बीमारियों से निपटने में मदद मिल सके. इसी साल फरवरी में जिम्बाब्वे ने भी इसी तरह की चिंताओं के चलते प्रस्तावित समझौता ठुकरा दिया था, जबकि जाम्बिया ने भी अपने समझौते के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी.

Advertisement

अफ्रीका के कई एक्टिविस्ट्स का कहना है कि इन समझौतों में डेटा के इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है और कई बार यह सीमित वर्गों को ही लाभ पहुंचाते हैं. अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Africa CDC) के महानिदेशक जीन कासेया ने भी डेटा शेयरिंग को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं. करीब 300 मिलियन डॉलर के प्रस्तावित समझौते के तहत घाना को पांच वर्षों में लगभग 109 मिलियन डॉलर की अमेरिकी फंडिंग मिलने वाली थी. लेकिन कवार्पुओ ने बताया कि इस समझौते में एक ऐसी शर्त भी थी, जिसके तहत संवेदनशील हेल्थ डेटा में व्यक्तियों की पहचान उजागर की जा सकती थी.

उन्होंने कहा, 'यह देश के हेल्थ डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी विदेशी संस्था को सौंपने जैसा होता.' प्रस्तावित समझौते में केवल हेल्थ डेटा ही नहीं, बल्कि मेटाडेटा, डैशबोर्ड, रिपोर्टिंग टूल्स, डेटा मॉडल और डेटा डिक्शनरी तक पहुंच शामिल थी. इसके अलावा, इस प्रस्ताव के तहत 10 तक अमेरिकी संस्थाओं को बिना किसी पूर्व अनुमति के इन डेटा तक पहुंच मिल सकती थी. कवार्पुओ ने कहा कि इस व्यवस्था में घाना के पास डेटा उपयोग पर कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं होता और केवल बाद में जानकारी दी जाती. उन्होंने बताया कि घाना ने अमेरिका को इस प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अपना निर्णय बता दिया है और बेहतर शर्तों के साथ नए समझौते की मांग की है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement