अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन को मेल से होने वाली वोटिंग पर प्रतिबंध लगाने वाले उनके एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की इजाजत दे दी.
ट्रंप ने मार्च में इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत प्रशासन को ऐसे मतदाताओं की लिस्ट तैयार करने को कहा गया है, जिन्हें मेल बैलेट भेजे जा सकें. अमेरिकी पोस्टल सर्विस को भी निर्देश दिया गया है कि वह केवल तय लिस्ट में शामिल योग्य मतदाताओं को ही मेल बैलेट पहुंचाए.
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23 राज्यों ने किया था विरोध
ट्रंप के इस आदेश का 23 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया ने विरोध किया है. उनका कहना है कि अमेरिका में चुनाव कराने और चुनाव के नियम तय करने का अधिकार राज्यों और कांग्रेस के पास है. राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से आदेश पर रोक जारी रखने की मांग की थी. मैसाचुसेट्स की एक अदालत ने पहले कई राज्यों में इस योजना पर रोक लगा दी थी. बाद में एक दूसरे आदेश के जरिए इसे पूरे देश में रोक दिया गया. ट्रंप प्रशासन ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
ट्रंप लगातार करते रहे हैं मेल वोटिंग का विरोध
ट्रंप लंबे समय से मेल वोटिंग पर सवाल उठाते रहे हैं. वह दावा करते रहे हैं कि इससे चुनाव में धांधली हो सकती है, हालांकि मेल वोटिंग में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के उनके दावे के समर्थन में ठोस सबूत नहीं हैं. ट्रंप ने अपने नए आदेश को चुनावी सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि इसका मकसद गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने से रोकना है. हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गैर-नागरिकों का वोट डालना बेहद दुर्लभ है.
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क्या मिडटर्म चुनाव में लागू हो पाएगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन के लिए इसे तुरंत लागू करना आसान नहीं होगा. मिडटर्म चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और कई राज्य कुछ ही हफ्तों में मतदाताओं को मेल बैलेट भेजना शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा आगे भी कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं. यानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप को फिलहाल रास्ता जरूर मिला है, लेकिन उनके मेल वोटिंग वाले पूरे प्लान पर अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है.
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