'ईरान की न्यूक्लियर ऑनेस्टी', अनंतकाल तक निगरानी... डील में ट्रंप के नए दांव

अमेरिका ने 2025 में ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम गहरे जमीन में धंस गए हैं. अमेरिका की नजर इसी यूरेनियम पर है. IAEA के जरिये अमेरिका इसी यूरेनियम का स्टेट्स पता करना चाहता है.

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ट्रंप ने कहा है कि ईरान को 'न्यूक्लियर ईमानदारी' दिखानी चाहिए. (Photo: ITG) ट्रंप ने कहा है कि ईरान को 'न्यूक्लियर ईमानदारी' दिखानी चाहिए. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ डील में 'न्यूक्लियर ईमानदारी' की बात की है. उन्होंने दावा किया है कि ईरान लंबे समय तक अपने परमाणु केंद्रों पर न्यूक्लियर इंस्पेक्शन के लिए राजी हो गया है. ट्रंप के मुताबिक ये सहमति सबसे ऊंचे स्तर पर जांच के लिए थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इंस्पेक्शन के लिए तेहरान की सहमति बातचीत जारी रखने की एक अहम शर्त थी; अगर ईरान ने इस मांग को ठुकरा दिया होता, तो आगे कोई बातचीत नहीं होती. 

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ट्रंप ने कहा, "ईरान लंबे समय तक (हमेशा के लिए) न्यूक्लियर इंस्पेक्शन के सबसे ऊंचे स्तर के लिए पूरी तरह से सहमत हो गया है. इससे 'न्यूक्लियर ईमानदारी' पक्की होगी. अगर वे इसके लिए सहमत नहीं होते, तो आगे कोई बातचीत नहीं होती!"

ट्रंप भले ही कह रहे हों कि ईरान अपने परमाणु केंद्रों के न्यूक्लियर इंस्पेक्शन के लिए राजी हो गया है. लेकिन ईरान ने साफ कह दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के इंस्पेक्टरों की आने की कोई शेड्यूल नहीं है. 

ईरान ने मंगलवार को कहा कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के इंस्पेक्टरों का उन न्यूक्लियर साइट्स का दौरा करने का कोई प्रोग्राम नहीं है जिन पर पहले अमेरिका ने बमबारी की थी. ईरान की राजधानी तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्माइल बघाई ने पत्रकारों से यह बात कही. 

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बघाई की ये बातें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों के उलट लगती हैं, जिन्होंने कहा था कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में IAEA के ईरानी साइट्स का दौरा करने पर सहमति बनी थी. 

बता दें कि IAEA की टीम अमेरिका द्वारा निशाना बनाई गई बमबारी वाली एनरिचमेंट साइट्स तक नहीं पहुंच पाई है. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को खुला रखेगा और अभी कोई नौसैनिक नाकेबंदी नहीं करेगा. साथ ही उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना की टुकड़ियां उस इलाके में तैनात रहेंगी और जरूरत पड़ने पर नाकेबंदी को तुरंत फिर से लागू किया जा सकता है.

अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर जारी एक बयान में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को खुला रखने का फ़ैसला किया है क्योंकि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. 

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "मैंने होर्मुज स्ट्रेटन को खुला रखने और आगे कोई नौसैनिक नाकेबंदी न करने पर सहमति दे दी है. हालांकि अगर नाकेबंदी को फिर से लागू करने की जरूरत पड़ी, तो सभी जहाज अपनी जगह पर ही रहेंगे; हालांकि, अभी ऐसा होने की आशंका बहुत कम है." 

ट्रंप ने ईरान के लिए प्रतिबंधों में ढील देने के तरीके के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी से जारी पैसा सीधे ईरान को भेजने के बजाय एक एस्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा, जिसे उनका प्रशासन कंट्रोल करेगा. उन्होंने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ़ अमेरिकी उत्पादकों से खाने-पीने की चीज़ें और मेडिकल सप्लाई खरीदने के लिए किया जाएगा, जिसमें मक्का, गेहूं और सोयाबीन शामिल हैं. उन्होंने इस व्यवस्था को मानवीय कदम बताया. 

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