मृत्युदंड के लिए दिए गए जहर के दो-दो इंजेक्शन, नहीं गई जान, होश आने पर बोलीं...

क्रिस्टा को मृत्युदंड देने के लिए दो बार जहर का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन उसकी मौत नहीं हुई. एक सप्ताह बाद उसे होश आया है. डॉक्टर इसे चमत्कार बता रहे हैं. क्रिस्टा बोलने की कोशिश कर रही है. अभी उसका इलाज चल रहा है.

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क्रिस्टा अपनी क्लासमेट की हत्या की दोषी हैं. (Photo:Reuters ) क्रिस्टा अपनी क्लासमेट की हत्या की दोषी हैं. (Photo:Reuters )

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:34 PM IST

चमत्कार की कहानियां कम होती है, लेकिन क्रिस्टा पाइक के साथ आश्चर्यचकित कर देने वाला चमत्कार हुआ है. जहर के दो-दो इंजेक्शन देने के बावजूद वो जिंदा बच गई है. मृत्युदंड की सजा पाए कैदी का इस तरह बच जाना क्राइम हिस्ट्री में कम ही देखने को मिलता है. लेकिन अपनी क्लासमेट की हत्या की दोषी पाई गईं क्रिस्टा पाइक को लगभग एक सप्ताह पहले मौत की सजा देने के लिए दो-दो जहरीले इंजेक्शन दिए गए, लेकिन क्रिस्टा का शरीर दोनों ही जहर भरे सुइयों को झेल गया. 

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अब इस घटना के एक सप्ताह बाद उसे होश आया है. क्रिस्टा पाइक भी बोल रही है. बीबीसी के अनुसार क्रिस्टा इस घटना से खुद भी हैरान है. 

पाइक की टीम को सलाह देने वाले एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डॉ. जोएल ज़िवोट ने कहा कि घातक इंजेक्शन से ठीक होने की संभावना कम होती है.लेकिन इस बार चमत्कार हुआ है. 

डॉ. जोएल ज़िवोट ने बीबीसी को बताया, "जिन लोगों को ये जानलेवा इंजेक्शन दिया जाता है, उनमें से ज्यादातर की मौत हो जाती है. दरअसल अगर क्रिस्टा को छोड़ दें लगभग सभी की जान गई है. इसलिए क्रिस्टा का बच जाना असामान्य है."

50 वर्ष की क्रिस्टा के वकील बता रहे हैं कि उन्हें अभी हथकड़ियों में रखा गया है. 

यह भी पढ़ें: मौत की सजा मिली, दो बार लगा जहर का इंजेक्शन... नहीं गई जान, अब...

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जहरीला इंजेक्शन देने के बाद क्रिस्टा बेहोशी की हालत में चली गई, लेकिन उनकी धड़कन चल रही थी, वो बेहोशी के आलम में बोल रही थी. इसके बाद जब उनकी मृत्यु नहीं हुई तो डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया और उसके शरीर से जहर को बाहर निकाला. 

फोर्डहम लॉ स्कूल की क्रिमिनोलॉजिस्ट और प्रोफेसर डेबोरा डेनो ने कहा कि ये घटना मेडिकल साइंस की अभूतपूर्व घटना है. 

प्रोफेसर डेनो ने बीबीसी से कहा, "क्रिस्टा एकमात्र ऐसी व्यक्ति हैं, जिनके शरीर में किसी तरह का विषैला पदार्थ इंजेक्ट किया गया. लेकिन इसका असर नहीं हुआ. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ."

यह मामला अनोखा क्यों है?

जानकारों का कहना है कि कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिले हैं. अभी यह ठीक-ठीक पता नहीं है कि पाइक के खून में कितनी मात्रा में जहरीला इंजेक्शन पेंटोबार्बिटल पहुंचा, उसके खून में इसकी कितनी मात्रा पहुंची या उसे भविष्य में इसके क्या असर हो सकते हैं.

पाइक के बच जाने का मतलब यह नहीं है कि जानलेवा इंजेक्शन से आम तौर पर बचा जा सकता है.

काफ़ी ज़्यादा मात्रा में पेंटोबार्बिटल जानलेवा हो सकता है. असल में अहम सवाल यह है कि क्या दवा की मात्रा उतनी हो पाई थी जिससे मौत हो सके.

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अब उनके मामले की वजह से जानलेवा इंजेक्शन से जुड़े मेडिकल जोखिमों और अनिश्चितताओं पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है. इसमें यह सवाल भी शामिल है कि क्या नस में सुई ठीक से न लग पाने के कारण, तेज़ी से होने वाली मौत की योजना एक लंबी मेडिकल इमरजेंसी में बदल सकती है.

क्रिस्टा गेल पाइक अमेरिका की टेनेसी राज्य की मौत की सज़ा काट रही एकमात्र महिला कैदी हैं.  1995 में 18 साल की उम्र में उन्होंने अपने प्रेमी टैडारिल शिप और एक अन्य साथी के साथ जॉब कॉर्प्स कार्यक्रम की सहपाठी 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या कर दी थी.  ईर्ष्या के कारण उन्हें जंगल में ले जाकर यातना दी, चाकू से काटा, पेंटाग्राम उकेरा और खोपड़ी का टुकड़ा ले लिया. इस केस में 1996 में उन्हें मृत्युदंड मिला. 

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