चीन ने पेंटागन की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा, विश्वास को हुआ भारी नुकसान

चीन ने इस वाषिर्क रिपोर्ट पर असंतुष्टि और विरोध भी जताया है. उसने कहा है कि इस रिपोर्ट में देश के सैन्य विकास को गलत ढंग से पेश किया गया.

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चीन के रक्षा प्रवक्ता कर्नल यांग युजुन चीन के रक्षा प्रवक्ता कर्नल यांग युजुन

सना जैदी / BHASHA

  • बीजिंग,
  • 15 मई 2016,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

चीन ने रविवार को अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने आपसी विश्वास को 'भारी नुकसान' पहुंचाया है. चीन ने यह बात पेंटागन द्वारा चीनी सैन्य क्षमताओं को लेकर बढ़ा चढ़ाकर पेश की गई रिपोर्ट के जवाब में कही है. उसका कहना है कि पेंटागन की यह रिपोर्ट जानबूझकर उसकी रक्षा नीतियों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है.

चीन ने रिपोर्ट को बताया असंतुष्ट
चीन ने इस वाषिर्क रिपोर्ट पर असंतुष्टि और विरोध भी जताया है. उसने कहा है कि इस रिपोर्ट में देश के सैन्य विकास को गलत ढंग से पेश किया गया. शुक्रवार को अमेरिकी कांग्रेस को दी इस रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन विवादित दक्षिण चीन सागर और अन्य स्थानों पर अपनी समुद्री मौजूदगी बढ़ाते हुए दुखदायी तरकीबें इस्तेमाल कर रहा है और क्षेत्रीय तनावों को बढ़ा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपने नियंत्रण का दावा करने के लिए दक्षिण चीन सागर में अपने द्वारा निर्मित कृत्रिम द्वीपों के सैन्यीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

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पेंटागन की रिपोर्ट गलत तरह से पेश करने का आरोप
चीन की ओर से जवाबी हमला बोलते हुए रक्षा प्रवक्ता कर्नल यांग युजुन ने आरोप लगाया कि में चीन के सैन्य विकास को गलत तरह से पेश किया गया है. यांग ने कहा कि चीन के सैन्य एवं सुरक्षा विकास पर आधारित रिपोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच के पारस्परिक विश्वास को भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने अमेरिकी पक्ष से अपील की है कि दोनों देशों और उनके सशस्त्र बलों के बीच स्वस्थ एवं स्थायी संबंधों के विकास को बढ़ावा देने वाले कदम उठाने चाहिए.

दक्षिण चीन सागर चीन और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव का बिंदू
उन्होंने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में और युद्धपोत भेजकर लगातार अपनी ताकत जताता रहा है. इसके पीछे उसका इरादा अपना अधिपत्य स्थापित करना है. दक्षिण चीन सागर चीन और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव का एक बड़ा बिंदू रहा है. बीजिंग इस पूरे विवादित जलक्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है. उसने वहां सैन्य ठिकानों वाले कृत्रिम द्वीपों का निर्माण भी किया है. फिलीपीन, मलेशिया, वियतनाम, ब्रुनेई और ताइवान चीन के इन दावों के विरोध में हैं.

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