नेतन्याहू ने अपने पर्सनल फोन नंबर का किया खुलासा, आम लोगों से करेंगे बात

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बताया गया फोन नंबर निजी और लिकुड सोशल मीडिया हैंडल पर डालकर लोगों से सीधे संपर्क करने की अपील की. विपक्ष और आलोचकों ने इसे आम जनता से जुड़ाव दिखाने वाला चुनावी दांव बताया, जबकि उनकी टीम ने भारी संदेशों से व्हाट्सऐप क्रैश होने का फुटेज भी साझा किया.

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नेतन्याहू का फोन नंबर चुनावी अभियान का हिस्सा है. (Photo- ITG) नेतन्याहू का फोन नंबर चुनावी अभियान का हिस्सा है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना कथित पर्सनल फोन नंबर सार्वजनिक कर दिया और देश के लोगों से सीधे संपर्क करने की अपील की. नेतन्याहू ने कहा कि वह जनता के सुझाव, सवाल और उनकी परेशानियां सुनना चाहते हैं. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इजरायल में अक्टूबर में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं.

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नेतन्याहू ने एक वीडियो के जरिए लोगों से इस नंबर पर मैसेज छोड़ने को कहा. वीडियो में उनके मीडिया सलाहकार टोपाज लुक भी नजर आए. नेतन्याहू ने कहा कि वह हर व्यक्ति को जवाब देने का वादा नहीं कर सकते, लेकिन जितना संभव होगा, लोगों की बातें सुनेंगे.

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नंबर सार्वजनिक होते ही पहुंचे सैकड़ों मैसेज

नंबर सार्वजनिक होते ही लोगों ने बड़ी संख्या में उस पर मैसेज और कॉल करना शुरू कर दिया. इजरायली मीडिया के मुताबिक, कुछ ही मिनटों में सैकड़ों मैसेज पहुंच गए. इतना ज्यादा ट्रैफिक आया कि संबंधित WhatsApp अकाउंट ही ब्लॉक हो गया. टोपाज लुक ने बताया कि भारी संख्या में फोन और मैसेज आने के कारण WhatsApp बंद हो गया और उसे जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है.

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नेतन्याहू का यह तरीका नया नहीं है. इससे पहले भी चुनावी दौर में वह इसी तरह जनता से सीधे संपर्क बनाने की कोशिश कर चुके हैं. 2022 में भी उन्होंने अपना फोन नंबर सार्वजनिक किया था और लोगों को उनसे सीधे संपर्क करने का न्योता दिया था. उस समय भी बड़ी संख्या में लोगों ने नंबर पर संपर्क किया था.

सरकारी नहीं, राजनीतिक अभियान के तहत जारी किया नंबर

यही वजह है कि विपक्षी दल और राजनीतिक आलोचक इस कदम को चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान का हिस्सा बता रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि नेतन्याहू का मकसद सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच बढ़ाना और आम मतदाताओं के बीच खुद को सीधे जनता से जुड़ा नेता दिखाना है.

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दरअसल, नेतन्याहू ने यह नंबर सरकारी चैनलों से नहीं, बल्कि अपने निजी और लिकुड पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए जारी किया है. ऐसे में इसे सरकारी हेल्पलाइन के बजाय राजनीतिक संपर्क अभियान के तौर पर देखा जा रहा है.

नंबर जारी करने के पीछे मकसद चाहे जनता की बात सुनना हो या चुनावी रणनीति, लेकिन इतना साफ है कि नेतन्याहू का यह दांव कुछ ही मिनटों में बड़ा सोशल मीडिया और राजनीतिक मुद्दा बन गया. जनता का रिस्पॉन्स इतना तेज रहा कि जिस फोन के जरिए लोगों की समस्याएं सुनने का दावा किया गया, वही WhatsApp अकाउंट भारी ट्रैफिक के चलते क्रैश हो गया.

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