ऑस्ट्रेलिया और वानुअतु के बीच एक बड़ा सुरक्षा और आर्थिक समझौता हो गया है. इस समझौते के तहत वानुअतु अपनी जमीन पर चीन को कोई मिलिट्री बेस नहीं बनाने देगा. इस डील को 'नाकामल एग्रीमेंट' नाम दिया गया है और इस पर सोमवार को दस्तखत हुए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने वानुअतु के प्रधानमंत्री जोथम नापत के साथ ऑस्ट्रेलिया की राजधानी में इस समझौते पर साइन किए हैं. यह डील नौ महीने पहले वानुअतु सरकार द्वारा एक पुराने ड्राफ्ट को ठुकराने के बाद हुई है. दरअसल वानुअतु को डर था कि यह समझौता उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर में विदेशी निवेश लाने की क्षमता को सीमित कर देगा.
अल्बानीज ने मीडिया से कहा कि यह समझौता ऑस्ट्रेलिया के वानुअतु के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद आर्थिक, सुरक्षा और विकास पार्टनर होने की भूमिका को दिखाता है. नापत ने कहा कि यह डील दोनों देशों के बीच भरोसे और सम्मान पर आधारित साझेदारी को और मजबूत करती है.
इस समझौते के मुताबिक वानुअतु अपनी जमीन पर किसी भी विदेशी मिलिट्री बेस या मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को इजाजत नहीं देगा. वानुअतु अपने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी भी तरह की मिलिट्री दखलंदाजी या गैर-जरूरी एक्सेस से दूर रखेगा. यह डील उन कई समझौतों में से एक है जो ऑस्ट्रेलिया पैसिफिक के इलाके में चीन को सुरक्षा के मामले में पैर फैलाने से रोकने के लिए अपने पड़ोसी देशों के साथ कर रहा है.
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अगर वानुअतु अपने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर किसी तीसरे देश से कोई डील करता है तो उसे पहले ऑस्ट्रेलिया से बातचीत करनी होगी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास इसे रोकने का कोई वीटो पावर नहीं होगा, जैसा शुरुआत में सोचा गया था. वानुअतु ने पुलिस से जुड़े मामलों में पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के देशों के साथ काम करने को प्राथमिकता देने की बात मानी है, लेकिन इसमें चीन की पुलिस को बाहर नहीं रखा गया है. चीन की पुलिस के लोग वानुअतु में अक्सर आते रहते हैं, हालांकि वहां चीन की कोई स्थायी पुलिस मौजूदगी नहीं है.
वानुअतु ने यह भी कहा है कि किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय वह सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फ्रांस से मदद लेगा. पहले के ड्राफ्ट में ऑस्ट्रेलिया ने दस साल में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर देने की बात कही थी. अल्बानीज ने कहा कि इस नए समझौते की लागत दिसंबर तक सबके सामने रखी जाएगी.
नापत ने यह भी बताया कि वानुअतु चीन के साथ भी एक अलग समझौता कर रहा है जिसे 'नामेले एग्रीमेंट' कहा जा रहा है. उन्होंने साफ किया कि यह कोई सुरक्षा डील नहीं बल्कि एक डेवलपमेंट से जुड़ा समझौता है, और इसे बीजिंग की मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक किया जाएगा.
वानुअतु को इमारतों, बंदरगाहों और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए चीन से पहले भी बड़े लोन और मदद मिल चुकी है. नापत ने यह भी कहा कि उनकी सरकार पूरी तरह पारदर्शी है और इसमें छिपाने जैसी कोई बात नहीं है.
पिछले साल सितंबर में अल्बानीज को यह बताया गया था कि वानुअतु ने पुराने ड्राफ्ट को ठुकरा दिया है, वो भी उस वक्त जब वो साइनिंग के लिए वानुअतु जाने वाले थे.
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