ईरान में पावर स्टेशन, ब्रिज और कम्यूनिकेशन टावर्स को अमेरिका ने बनाया निशाना, ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाईं

अमेरिका ने ईरान पर हमलों का दायरा बढ़ाते हुए ब्रिज, एयरपोर्ट, कम्युनिकेशन टावर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. जवाब में ईरान ने कतर समेत खाड़ी देशों में मिसाइलें दागीं और पूरे क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की चेतावनी दी है.

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अमेरिका ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ा दिया है. (Photo- ITG) अमेरिका ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ा दिया है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:58 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच जंग लगातार और खतरनाक होती जा रही है. अमेरिकी सेना ने  शुक्रवार तड़के ईरान के दक्षिणी हिस्सों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इस बार निशाने पर सिर्फ सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि कई पुल, कम्युनिकेशन टावर, एयरपोर्ट और सैन्य लॉजिस्टिक नेटवर्क भी रहे. अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता और होर्मुज स्ट्रेट में उसकी पकड़ को कमजोर करना है.

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, लड़ाकू विमान, ड्रोन और युद्धपोतों की मदद से कई सटीक हमले किए गए. इन हमलों में कोस्टल सर्विलांस सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया. यह लगातार छठी रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए. CENTCOM का कहना है कि पश्चिम एशिया में उसके 50 हजार से ज्यादा सैनिक पूरी तरह अलर्ट पर हैं.

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ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में कम से कम पांच पुलों पर मिसाइल हमले किए. बंदर खमीर ब्रिज पर हुए हमले में सात लोगों की मौत और नौ के घायल होने की खबर है. तेहरान के आसपास, सेमनान प्रांत, एयरपोर्ट और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर भी हमलों का दावा किया जा रहा है. सेमनान ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

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अमेरिका ने ईरान में कहां-कहां किए हमले?

ताजा हमलों में अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों पर बड़ा हमला किया. अहवाज, केश्म द्वीप, बुशेहर, दश्ती, बोस्तान, सीरिक और बंदर-ए-लेंगेह में कई धमाकों की खबरें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि इन हमलों में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया. बंदर अब्बास के टेपेह अल्लाह अकबर इलाके समेत शहर के कई हिस्सों में विस्फोट हुए, जबकि बंदर-ए-खामिर के पास दो अहम पुलों पर भी हमले किए गए.

इसके अलावा अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में सड़क और रेलवे नेटवर्क को भी निशाना बनाया. दक्षिण-पूर्वी शहर ईरानशहर के एयरपोर्ट पर हमला होने से एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई. वहीं, रणनीतिक महत्व वाले किश द्वीप पर भी हवाई हमले किए गए, जिनकी वजह से द्वीप के कुछ हिस्सों में अस्थायी रूप से बिजली गुल हो गई.

ईरानी मीडिया के मुताबिक, इनमें गारीवेह ब्रिज शामिल है, जो बंदर अब्बास को खामिर और लार से जोड़ता है. इसके अलावा लतीदान गांव के पास एक पुल, काहूरेस्तान-लार मार्ग पर बने दो पुल, बंदर-ए-खामिर, केशार और बंदर अब्बास को जोड़ने वाला निर्माणाधीन पुल, और खामिर जिले के मारू गांव का एक पुल भी हमलों की जद में आया. इन हमलों का मकसद दक्षिणी ईरान के सड़क संपर्क और लॉजिस्टिक नेटवर्क को कमजोर करना माना जा रहा है.

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कतर-बहरीन-कुवैत में ईरान का पलटवार

हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी. कतर, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सहयोगी ठिकानों की ओर मिसाइलें दागी गईं. कतर में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई, जबकि राजधानी दोहा के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया. ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका पावर प्लांट्स और अन्य नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखता है, तो पूरे क्षेत्र के अहम ढांचे को निशाना बनाया जाएगा.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को भी रेड सी के तेल मार्ग को बंद करने के लिए तैयार रहने को कहा है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर नया खतरा पैदा हो सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट में लगातार बढ़ रहा तनाव

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है. अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे तीन व्यापारिक जहाजों को रोका, एक जहाज को निष्क्रिय किया और दूसरे पर चढ़कर उसकी जांच की.

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समुद्री डेटा एजेंसी लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है. कई जहाज अपने लोकेशन ट्रांसपोंडर बंद कर "डार्क ट्रांजिट" के जरिए निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कई जहाज अब भी समुद्र में फंसे हुए हैं. इससे वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

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