यमन का अल जौफ शहर हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सेना के बीच जंग का नया केंद्र बन गया है. सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी सेना ने अल-हज़म के पूर्व में स्थित रणनीतिक ऊंचाइयों को हूतियों के कब्जे से छुड़ाने के लिए एक बड़ा जवाबी हमला शुरू किया है.
ये अभियान 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' का हिस्सा हैं, जिसे सरकार ने पिछले महीने शुरू किया था. इसका मकसद हूतियों द्वारा कब्जा किए गए इलाकों को वापस लेना और देश में सरकारी नियंत्रण बहाल करना है.
अल-हज़्म इस अभियान का एक अहम केंद्र बन गया है. यह शहर हूतियों के खिलाफ सरकारी बलों के लिए एक संभावित 'लॉन्चपैड' का काम कर सकता है. सितंबर 2014 में युद्ध शुरू होने के बाद से ही हूतियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के ज्यादातर हिस्सों पर कब्ज़ा कर रखा है.
यमन में 12 साल से चल रहे युद्ध के दौरान अल-हज़्म पर नियंत्रण कई बार बदला है. मार्च 2020 में हूतियों ने इस शहर पर कब्ज़ा कर लिया था.
यह प्रांतकाफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसकी सीमा सऊदी अरब से सटी है और यह पांच अहम प्रांतों—हद्रामौत, सादा, सना, अमरान और तेल से समृद्ध मारिब से सीधे जुड़ा हुआ है. साथ ही, यह राजधानी सना के भी काफी करीब है.
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसरा अल-जौफ सरकारी बलों के नियंत्रण वाले मारिब के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा कवच का काम करता है. यह हूतियों को पूर्वी इलाकों की तरफ आगे बढ़ने से रोकता है. इसके अलावा, यह उत्तरी यमन में हूतियों के मुख्य गढ़ों तक पहुंचने का एक प्रवेश द्वार भी है.
यमन की सरकारी सेना के फील्ड कमांडर कर्नल राबी अल-कुरैशी ने कहा कि सरकारी सेनाओं ने अल-हज़्म शहर के पूर्व में स्थित रणनीतिक हुवैशान पर्वत श्रृंखला पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया है. उन्होंने बताया कि यह पूर्वी मोर्चे पर हूतियों की रक्षा की पहली पंक्ति है. इस ऊबड़-खाबड़ इलाके पर कब्ज़ा होने से सरकारी सेनाओं को विद्रोहियों के सप्लाई रूट को बाधित करने में मदद मिलेगी.
अल-कुरैशी ने कहा, "सरकारी सेनाएं अल-आलम फ्रंट रोड पर आंशिक नियंत्रण हासिल करके हूतियों की इस रक्षात्मक व्यवस्था को तोड़ने में सफल रहीं." उन्होंने आगे कहा कि सरकारी सेनाओं की यह बढ़त ऊपरी अल-लबनात कैंप में हूतियों पर शिकंजा कसने की शुरुआत है. इस कैंप को सना का एक महत्वपूर्ण पूर्वी प्रवेश द्वार माना जाता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि अल-जौफ़ में सरकारी सेनाओं की हालिया बढ़त एक बड़ा सैन्य बदलाव है, जो भविष्य के उन अभियानों में मददगार साबित होगा, जिनके ज़रिए वे अल-हज़्म शहर तक पहुंच सकेंगी."
उन्होंने कहा, "वहां कई ऊंचे इलाकों पर फिर से कब्ज़ा करने से सरकारी सेनाओं को सैन्य और मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है. इससे हूतियों के लिए फैसले लेना मुश्किल हो गया है. साथ ही सरकारी सेनाओं को हूतियों की आपूर्ति लाइनों पर नज़र रखने और उनकी गतिविधियों को समझने में मदद मिल रही है, जबकि वे अपनी खुद की आपूर्ति लाइनों को भी सुरक्षित कर पा रही हैं."
सैन्य प्रवक्ता माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने 'X' पर कहा कि अल-जौफ़ में हूतियों के ठिकानों के खिलाफ हालिया सैन्य अभियानों से "विद्रोही गुट की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है. "
हालांकि इस प्रभाव का ठोस और स्थायी लाभ तभी मिल सकता है जब कमान और नियंत्रण को एकजुट किया जाए, सभी युद्ध मोर्चों पर अभियानों के बीच तालमेल बिठाया जाए, सैन्य और लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित की जाए और सैन्य संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों को मजबूत किया जाए.
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