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कोरोना वायरस पर आखिर क्या छिपा रहा चीन? इस दावे से सनसनी

aajtak.in
  • 12 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST
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चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस से अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं और इस वायरस के संक्रमण के अब तक करीब 42,000 मामले सामने आ चुके हैं. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए चीन की सरकार कई कदम उठा रही है लेकिन पारदर्शिता ना होने की वजह से उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

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अमेरिकी सांसद टॉम कॉटन ने कोरोना वायरस के फैलने के लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है. अमेरिकी सांसद ने कहा कि यह वायरस मानवनिर्मित जैवहथियार हो सकता है जो संभवत: 'वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी' से लीक हुआ है. टॉम कॉटन ने चीनी प्रशासन को अपने दावे को गलत साबित करने की चुनौती भी दे डाली है.

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कोरोना वायरस की उत्पत्ति से लेकर संक्रमण फैलने तक चीन की भूमिका कहीं ना कहीं संदिग्ध रही है. चीन ने शुरुआत में दावा किया कि कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर की फिश मार्केट से निकला है लेकिन तमाम सबूत इस दावे को नकारते हैं. चीनी अधिकारी अभी तक खुद वायरस की उत्पत्ति को लेकर आश्वस्त नहीं है जिसकी वजह से अमेरिकी सांसद कॉटन समेत कई वैज्ञानिक ऐसा संदेह जता रहे हैं. कुछ दिनों पहले ही चीन जीन एडिटिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ गया था.

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लोग ये भी शक जता रहे हैं कि चीन वायरस से हुई मौतों के आंकड़ों को भी छिपा रहा है. 'The Epoch Times' के मुताबिक, चीन के वुहान में इतनी लाशें आ रही हैं कि शवदाह गृहों में मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं.

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इसके अलावा, सोशल मीडिया पर तमाम ऐसे वीडियो भी वायरल हुए हैं जिनसे पता चलता है कि स्थिति चीन के नियंत्रण से बाहर होती जा रही है. कई अधिकारी सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर स्प्रे कर रहे हैं तो संक्रमण के शक में तमाम लोगों को एक अलग कैंप में भेज दिया जा रहा है. इन कैंपों में पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं.

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एक वायरल वीडियो में चीनी स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण फैलने के डर से एक महिला और उसके पार्टनर को बिल्कुल बंद डिब्बे में लॉक करते दिख रहे हैं तो दूसरे वीडियो में कुछ अधिकारी अपार्टमेंट से जबरन लोगों को घसीटकर ले जाते दिख रहे हैं.

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अमेरिकी सांसद टॉम कॉटन को इन वजहों से भी चीन की मंशा पर शक हो रहा है. अमेरिका सैन्य नेताओं के सामने दिए भाषण में उन्होंने वुहान की प्रयोगशाला को सुपर लैबोरेटरी कहा. उनका मानना है कि ये वायरस इसी लैब में जैवहथियार बनाने के लिए हो रहे किसी प्रयोग का हिस्सा है.

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अमेरिकी सांसद ने कहा, शुरुआती 40 मामलों में से 14 का सीफूड मार्केट से कोई लेना-देना नहीं था. मैं ये कहना चाहूंगा कि वुहान चीन की इकलौती जैवसुरक्षा से लैस लेवल 4 की सुपर लैब है जहां दुनिया के खतरनाक वायरसों पर भी काम किया जाता है, और हां इसमें कोरोना वायरस भी शामिल हो सकता है.

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टॉम कॉटन ने ट्वीट किया, चीन ने 6 करोड़ लोगों को अलग-थलग कर उन्हें कैद करके रख दिया गया है, ये आबादी हमारे वेस्ट कोस्ट की आबादी से भी ज्यादा है. उन्होंने स्कूल बंद कर दिए हैं, हॉन्ग कॉन्ग ने मुख्यभूमि चीन के लिए यात्रा पर रोक लगा दी है. अब हमें भी चीन और अमेरिका के बीच सभी कॉमर्शल फ्लाइट्स को बंद कर देना चाहिए.

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अमेरिकी सांसद ने कहा, डॉ. ली ने अपने देश और दुनिया को कोराना वायरस से बचाने की कोशिश की लेकिन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें चुप करा दिया. अब उनके हाथ डॉक्टर के खून से रंग गए हैं. हमें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर पारदर्शिता बरतने को लेकर दबाव डालना चाहिए ताकि इस खतरनाक बीमारी के बारे में सबसे पहले आगाह करने वाले डॉक्टर ली को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके.

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अगर कोरोना वायरस वुहान लैब से लीक हुआ है तो यह पहला ऐसा मामला नहीं होगा. इससे पहले भी चीन की लैब से कोई खतरनाक वायरस फैल चुके हैं. 2004 में बीजिंग इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी से SARS लीक हुआ था जहां शोधकर्ता बीमारी पर प्रयोग कर रहे थे. इस दौरान लैब के दो टेक्नीशियन संक्रमित हो गए और बाद में दूसरों में भी सार्स फैल गया.

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हालांकि, चीनी अधिकारियों ने अमेरिकी सांसद के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. अमेरिका में चीनी राजदूत कुई टियानकई ने टॉम कॉटन के सुझाव को 'क्रेजी' कहा हालांकि उन्होंने ये बात भी स्वीकार की कि उनकी सरकार को ये नहीं मालूम है कि वायरस की उत्पत्ति कहां हुई.

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बता दें कि कोरोना वायरस का संक्रमण केंद्र कहे जा रहे हुनान सीफूड मार्केट से थोड़ी ही दूर पर 'वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरलॉजी नैशनल बायोसेफ्टी लैब' स्थित है जो इबोला, निपाह व अन्य घातक वायरसों पर रिसर्च करती है. 'वुहान नैशनल बायोसेफ्टी लैबोरेटरी' हुनान सीफूड मार्केट से सिर्फ 32 किमी दूर है और ये यह लैब लेवल-4 सर्टिफाइड भी है.

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इससे पहले ऑनलाइन पोर्टल ग्रेटगेमइंडिया की जांच में भी वायरस की उत्पत्ति को कनाडा और चीनी बायोलॉजिकल वारफेयर प्रोग्राम के दो एजेंट से जोड़कर देखा गया है. हालांकि, अभी तक ये सबूत नहीं हैं कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के ही किसी गलत प्रयोग का नतीजा है.

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मार्च 2019 में कनाडा की एनएमएल लैब के वायरस से भरे रहस्यमयी जहाज चीन में दिखे थे. इस घटना के बाद बायोफेयर एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाए थे कि कनाडा चीन को खतरनाक वायरस क्यों भेज रहा था. एनएमएल लैब के वैज्ञानिकों ने कहा था कि ये घातक वायरस बहुत ही ताकतवर जैव हथियार हो सकते थे.

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जांच के बाद पता चला था कि यह घटना एनएमएल लैब में काम कर रहे चीनी एजेंटों से जुड़ी थी. चार महीने बाद ही जुलाई 2019 में कनाडा की नेशनल माइक्रोबायोलॉजी लैब ने जबरन चीन के वायरलॉजिस्ट के एक समूह को भी निकाल दिया था. बता दें कि एनएमएल लैब कनाडा की एकमात्र लेवल 4 की लैब है. ये उत्तरी अमेरिका में दुनिया की खतरनाक बीमारियों इबोला, सार्स, कोरोनावायरस इत्यादि पर रिसर्च के लिए अधिकृत चुनिंदा प्रयोगशालाओं में से एक है.

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जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजी प्रोफेसर और अमेरिका के स्पेशल ऑपरेशन कमांड के बायोवारफेयर में सीनियर फेलो जेम्स गियारडानो कहते हैं, चीन का बायोसाइंस में बढ़ता निवेश और जीन एडिटिंग के मामले में नैतिक मूल्यों का उल्लंघन इस संदेह को मजबूत करता है कि चीन अपनी प्रयोगशालाओं को भी हथियार बना रहा है. इसके अलावा, चीन ऐसी कोशिशें भी करता रहा है कि वह ऐसे इलाज या वैक्सीन खोज ले जो दुनिया में सिर्फ उसके पास हों.

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