Advertisement

विश्व

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तालिबान को सुनाई खरी-खरी

aajtak.in
  • दुशांबे (ताजिकिस्तान),
  • 15 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST
  • 1/10

अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में कस्बों और सीमा चौकियों पर आतंकवादी गुट के कब्जा जमाने के बीच भारत ने कहा है कि दुनिया जबरन काबुल में सत्ता में आने वाले तालिबान के शासन को वैध नहीं मानेगी. ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आठ देशों के शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की 'कॉन्टैक्ट ग्रुप' की बैठक में बुधवार को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान का भविष्य उसका अतीत नहीं हो सकता. 

(फोटो-Getty Images)

  • 2/10

बैठक में 1996 में अफगानिस्तान पर तालिबान के पिछले कब्जे का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया को अफगान की नई पीढ़ी को 'दबाने' की तालिबान की नीति को 'मान्यता नहीं' देनी चाहिए. भारतीय विदेश मंत्री ने तालिबान की हिंसा की आलोचना करते हुए बयान भी जारी किया है.  

(फोटो-Getty Images)

  • 3/10

जयशंकर ने कहा, 'दुनिया हिंसा और बल प्रयोग के जरिये कब्जा करने के खिलाफ है. इस तरह के कदम को वैधता नहीं दी जानी चाहिए.' भारतीय विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रियों के समूह को संबोधित करते हुए यह बात कही.

(फोटो-PTI)

 

Advertisement
  • 4/10

जयशंकर ने कहा कि हिंसा के बजाय शांति वार्ता के जरिये एक स्वीकार्य समझौता होना चाहिए जिसमें दोहा, मॉस्को और इस्तांबुल में  हुए समझौतों की झलक मिलती हो. इससे एक राष्ट्र का गठन होगा, जो लोकतांत्रिक और तटस्थ अफगानिस्तान के नागरिकों, जातीय समूहों को आतंकवादी हमलों से मुक्त रहेगा. इस प्रक्रिया के जरिये एक ऐसे अफगानिस्तान का निर्माण होगा जिसके पड़ोसी मुल्कों को आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद से खतरा नहीं होगा.

(फोटो-PTI)

  • 5/10

जयशंकर ने अफगानिस्तान की स्थिति के साथ-साथ जन स्वास्थ्य और आर्थिक सुधार के क्षेत्र में आने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद भी इस बैठक में शामिल हुए.

(फोटो-PTI)
 

  • 6/10

तालिबान का दावा है कि उसने पिछले कुछ दिनों में आफगानिस्तान में ईरान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान से लगी सीमाओं पर कब्जा कर लिया है. राजनयिक अधिकारियों ने बताया कि मध्य एशिया के देश अफगानिस्तान से लगते अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसा, अराजकता और जिहादी गुटों की गतिविधियों से चिंतित हैं. 

(फोटो-PTI)

Advertisement
  • 7/10

इस बीच, तालिबान ने बुधवार को दावा किया कि उसने पाकिस्तान के साथ मुख्य चमन-स्पिन बोल्डक क्रॉसिंग पर भी कब्जा कर लिया है, जबकि अफगानिस्तान सरकार ने आतंकी गुट के दावे को खारिज किया है. 

(पाकिस्तान-अफगान सीमा पर तालिबान समर्थक, फोटो-AP)

  • 8/10

असल में, तालिबान की सक्रियता और उसके हिंसक हमलों को लेकर कई देश अफगानिस्तान में अपनी विकास परियोजनाओं को लेकर चिंतित हैं. पिछले एक हफ्ते में भारत ने अपने सभी कर्मियों को कंधार वाणिज्य दूतावास से बाहर निकाला है जबकि रूस ने मजार-ए-शरीफ से राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुला लिया है. ईरान ने भी अपने वाणिज्य दूतावास में कामकाज बंद कर दिया है.

(फोटो-Getty Images)

  • 9/10

ताशकंद में मीटिंगः रिपोर्ट के मुताबिक जयशंकर सहित एससीओ के सदस्य देशों के प्रतिनिधि गुरुवार को लगभग 40 देशों के प्रतिनिधियों के साथ "मध्य और दक्षिण एशिया" कनेक्टिविटी सम्मेलन के लिए ताशकंद में होंगे. इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी शामिल होंगे. उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शोवकत मिर्जियोयेव बैठक की मेजबानी करेंगे जिसमें अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत जलमय खलीलजाद भी शामिल होंगे. जयशंकर के गुरुवार को राष्ट्रपति अशरफ गनी से मिलने और ताशकंद में अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान अमेरिकी राजदूत खलीलजाद से मिलने की उम्मीद है.

(फोटो-PTI)
 

Advertisement
  • 10/10

सम्मेलन का मूल फोकस उज्बेकिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान रेलवे परियोजनाओं और ट्रांजिट ट्रेड अग्रीमेंट्स और मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाली चाबहार परियोजना पर उज्बेकिस्तान-ईरान-भारत त्रिपक्षीय परियोजनाओं पर होना था. अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह के घटनाक्रमों को देखते हुए माना जा रहा है कि बैठक में सुरक्षा स्थिति का जायजा लिए जाने की उम्मीद है.

(फोटो-Getty Images)
 

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement