ममता या ऋतब्रत... TMC पार्टी और चुनाव चिह्न किसके? आज चुनाव आयोग में सुनवाई

TMC के नाम, संगठन पर नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट आमने-सामने हैं. दोनों गुट गुरुवार को चुनाव आयोग के सामने अलग-अलग अपना पक्ष रखेंगे. नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले आयोग के रुख पर सबकी नजर है.

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तृणमूल कांग्रेस के सिंबल को लेकर चुनाव आयोग में सुनवाई. (File Photo: ITG) तृणमूल कांग्रेस के सिंबल को लेकर चुनाव आयोग में सुनवाई. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:00 AM IST

तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट आमने-सामने हैं. अब इस विवाद पर चुनाव आयोग में अहम सुनवाई होने जा रही है. दोनों गुट गुरुवार को दिल्ली में अलग-अलग आयोग के सामने अपनी बात रखेंगे. यह सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है.

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ऋतब्रत बनर्जी गुट को दोपहर 3 बजे चुनाव आयोग की पूरी बेंच के सामने पेश होना है. इसके एक घंटे बाद ममता बनर्जी गुट की पांच सदस्यीय टीम आयोग के सामने अपनी दलील रखेगी. दोनों पक्ष पहले भी आयोग के सामने अपना दावा रख चुके हैं. अब आयोग ने उनसे जरूरी दस्तावेज और कानूनी पक्ष रखने को कहा है. दोनों गुट खुद को TMC का असली प्रतिनिधि बताते हैं. विवाद सिर्फ संगठन चलाने तक सीमित नहीं है. पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर नियंत्रण भी इसी लड़ाई का हिस्सा है.

सबसे बड़ा सवाल चुनाव चिह्न का

अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में TMC का मौजूदा चुनाव चिह्न किस गुट को मिलेगा. दोनों पक्षों ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. नामांकन की आखिरी तारीख 16 सितंबर थी. ऐसे में आयोग के फैसले पर सबकी नजर है. अगर किसी एक गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिलता है, तो दूसरे पक्ष को अलग नाम और चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है.

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अगर तुरंत फैसला नहीं होता, तो चुनाव चिह्न को कुछ समय के लिए रोकने की स्थिति भी बन सकती है. ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चिह्न दिए जा सकते हैं. यह बात दोनों पक्षों के नेताओं ने कही है.

ममता गुट का क्या कहना है?

ममता बनर्जी गुट का कहना है कि पार्टी की संगठनात्मक समितियां TMC के संविधान के मुताबिक अभी भी वैध हैं. इस गुट ने ऋतब्रत पक्ष के दावे को खारिज किया है. दूसरी तरफ ऋतब्रत गुट ने निर्वाचित विधायकों के समर्थन का हवाला देते हुए TMC पर अपना दावा जताया है. उसका कहना है कि संगठन पर उसका दावा मजबूत है.

नंदीग्राम पर क्यों टिकी नजर?

इस पूरे विवाद में नंदीग्राम की सीट खास है. साल 2007 का भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन यहीं से बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना था. इसी आंदोलन ने TMC को राज्य की राजनीति में मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई थी.

रेजीनगर भी इस विवाद की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा बनने जा रहा है. दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार चुके हैं. ऐसे में इन दोनों सीटों पर होने वाला उपचुनाव यह भी दिखाएगा कि पार्टी के नाम और पहचान को लेकर दोनों पक्ष जमीन पर कैसे आगे बढ़ते हैं.

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विवाद कई दौर की सुनवाई तक पहुंचा

ऋतब्रत गुट ने इस साल की शुरुआत में चुनाव आयोग का रुख किया था. 2 जुलाई को उसके 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा था. गुट ने संगठन, पार्टी की संपत्तियों पर नियंत्रण के साथ खुद को बहुमत वाला पक्ष बताया था. इसके बाद आयोग ने दोनों पक्षों से जवाब मांगे. 12 सितंबर को भी दोनों गुटों की सुनवाई हुई थी. अब 16 सितंबर को जरूरी दस्तावेज देने की समयसीमा खत्म होने के बाद फिर दोनों पक्षों को बुलाया गया है.

गुरुवार की सुनवाई से सिर्फ नंदीग्राम और रेजीनगर का चुनाव प्रभावित नहीं होगा. फैसला यह भी तय कर सकता है कि आने वाले चुनावों में TMC का नाम और उसका मौजूदा चुनाव चिह्न किस गुट के साथ रहेगा.
 

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