पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनावों से पहले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और सिंबल फ्रीज होने के बाद दोनों धड़ों ने चुनाव आयोग को अपनी पसंद के नए नाम और सिंबल की लिस्ट सौंप दी है. इसके बाद अब चुनाव आयोग आज दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न पर फैसला सुना सकता है.
ECI सूत्रों के अनुसार, दोनों गुटों से पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की लिस्ट मिल गई है. ECI दोनों गुटों द्वारा दिए गए चुनाव चिह्नों और नामों की जांच कर रहा है. जल्द ही अंतिम आदेश जारी किया जाएगा.
सूत्रों के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने अपने विकल्पों में 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस' जैसे नाम शामिल किए हैं. इसके साथ ही गुट के लिए एक नाम का सुझाव और सिंबल के लिए तीन विकल्पों के नाम दिए गए हैं. जबकि अरूप रॉय गुट ने भी आज सुबह पार्टी के लिए नए नाम और सिंबल के सुझाव चिट्ठी के जरिए चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से भेज दिए हैं.
ममता ने किया EC के फैसले का विरोध
उनसे पहले पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. सूत्रों के अनुसार, उन्होंने गुरुवार रात 11.36 बजे भेजे अपने जवाब में नाम और सिंबल फ्रीज करने के फैसले पर 'कड़ा विरोध' दर्ज कराते हुए तीन नाम और तीन सिंबल सौंपे. ममता गुट का मानना है कि उपचुनावों से पहले पार्टी के मूल नाम और प्रतीक पर इस तरह की रोक लगाना अनुचित है.
ऋतब्रत ने किया आयोग के फैसले का स्वागत
इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि आयोग का फैसला साबित करता है कि राजनीतिक पार्टी कभी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह काम नहीं कर सकती.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में फासीवाद और वंशानुगत उत्तराधिकार की कोई जगह नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बागी गुट 23 जून से आयोग को दस्तावेज सौंप रहा था और आयोग ने उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर यह अंतरिम फैसला दिया है, जिसे वह पूरी तरह स्वीकार करते हैं.
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि ये सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और विवाद का समाधान जरूर निकलेगा. सिंबल फ्रीज होने का मतलब ये नहीं कि इसे भविष्य में वापस नहीं पाया जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो आगे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें इस बात के ठोस सबूत पेश किए जाएंगे कि कैसे कुछ पत्रकारों ने मीडिया घरानों को गुमराह कर नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की.
दरअसल, पश्चिम विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी पर वर्चस्व और असली तृणमूल कांग्रेस होने के दावों को लेकर दोनों गुट लंबे वक्त से आमने-सामने थे, जिसमें दोनों पक्षों ने आयोग का दरवाजा खटखटाया था. जिस पर आयोग ने दोनों पक्षों को अपने दावे, दलीलें और सबूत रखने के लिए तीन बार मौका दिया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, विवाद की गंभीरता और उपचुनावों की निष्पक्षता को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत अगले आदेश तक दोनों पक्षों के लिए 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'जोड़ा फूल' सिंबल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी.
अमित भारद्वाज / इंद्रजीत कुंडू / संजय शर्मा