TMC के नाम-सिंबल और 10 बागी विधायकों पर ममता गुट पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दाखिल कीं 2 याचिकाएं

TMC के ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं. पहली याचिका में पार्टी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न को न देने के फैसले को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका विधानसभा अध्यक्ष की बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला न लेने की देरी को लेकर है.

Advertisement
TMC के ममता बनर्जी गुट में सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं. (File Photo) TMC के ममता बनर्जी गुट में सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं. (File Photo)

संजय शर्मा

  • कोलकाता,
  • 19 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पार्टी की ओर से दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं. पहली याचिका चुनाव आयोग के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें ममता गुट को AITMC नाम और पार्टी का पुराना चुनाव चिह्न देने से इनकार किया गया है. दूसरी याचिका विधानसभा अध्यक्ष से जुड़ी है. इसमें 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने में देरी को चुनौती दी गई है.

Advertisement

नाम और सिंबल को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल

पहली याचिका में ममता गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है. आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पुराने ‘दो फूल-घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर अंतरिम व्यवस्था की है. ममता गुट को एक अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न दिया गया है.

याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के संगठन और उसके ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. ममता गुट का आरोप है कि आयोग ने बागी सांसदों और विधायकों के बयानों को ज्यादा महत्व दिया. जबकि इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिकाएं पहले से लंबित हैं.

दूसरी याचिका पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर के खिलाफ है. इसमें 10 बागी विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी का मुद्दा उठाया गया है. ममता गुट का कहना है कि इन विधायकों की सदस्यता पर फैसला होना जरूरी है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ममता गुट के TMC प्रत्याशी का यू-टर्न: पहले नाम वापस लेने की बात कही, अब बोले- रेजीनगर में लडूंगा उपचुनाव

ममता गुट का तर्क है कि जब तक अयोग्यता के मामलों पर फैसला नहीं होता, तब तक इन्हीं विधायकों के दावों के आधार पर पार्टी के नाम और सिंबल को लेकर फैसला करना उचित नहीं है.

ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर भी विवाद

पार्टी के अंदर विवाद सिर्फ नाम और सिंबल तक सीमित नहीं है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी दोनों गुट आमने-सामने हैं. ममता गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था. वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता दी.

ममता गुट ने इस फैसले को भी चुनौती दी है. पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बागी विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. विधानसभा सचिवालय ने 10 विधायकों को नोटिस भी जारी किया है.

दरअसल, यह पूरा विवाद नंदीग्राम उपचुनाव की तैयारियों के बीच सामने आया है. शुक्रवार को ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 'ये भगवान राम का श्राप है', TMC के नाम-सिंबल विवाद पर बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी का ममता पर हमला

ममता के समर्थन के कुछ घंटे बाद ही मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. यह मामला 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़ा बताया गया है. कांग्रेस और ममता गुट ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए. बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हो सकती है सुनवाई

ममता गुट की दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को सुनवाई हो सकती है. पार्टी के सामने अब दो कानूनी लड़ाइयां हैं. एक तरफ चुनाव आयोग के नाम और सिंबल वाले फैसले को चुनौती दी गई है. दूसरी तरफ बागी विधायकों की अयोग्यता का मामला है. यह विवाद जुलाई से चुनाव आयोग के सामने भी चल रहा है. अब ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »