'सत्ता में आने के बाद चिन्मय दास को भूली बीजेपी', बांग्लादेशी संत के बहाने TMC का निशाना

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बांग्लादेशी संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की स्थिति पर चुप रहने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा. कुणाल घोष ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद उसने चिन्मय दास को भुला दिया है.

Advertisement
कुणाल घोष ने कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो उसने संत की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे.(Photo: ITG) कुणाल घोष ने कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो उसने संत की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए थे.(Photo: ITG)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 11 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST

मीडिया में जेल में बंद बांग्लादेशी संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की अपनी मां के पार्थिव शरीर के पास शोक मनाते हुए तस्वीरें सामने आने के बाद, तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को उनकी दुर्दशा पर चुप्पी साधे रखने के लिए बीजेपी की कड़ी आलोचना की.

टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद उसने चिन्मय दास को भुला दिया है.

Advertisement

टीएमसी विधायक घोष ने कहा, हम चिन्मय दास के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि यह एक विदेशी देश का मामला है. लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा, अपनी मां की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर के पास संत के विलाप करने के दृश्य दिल दहला देने वाले थे.

उन्होंने पूछा, केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार इस बारे में क्या कर रही है?

टीएमसी नेता ने कहा कि जब बीजेपी राज्य में विपक्ष में थी, तो उसने संत की रिहाई की मांग को लेकर कोलकाता में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किए थे.

घोष ने कहा, राज्य की सत्ता हासिल करने के बाद, क्या उसी पार्टी ने अब चिन्मय दास को भुला दिया है? क्या वह अब उस गेरुए वस्त्र को भूल गई है जिसे संत धारण करते हैं? 

Advertisement

जेल में बंद संत को अपनी मृत मां को देखने की अनुमति मिली और लगभग दो साल की हिरासत और जमानत के लिए लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें उनकी मां के पार्थिव शरीर के पास विलाप करते देखा गया.

दास को कथित तौर पर बांग्लादेश के चट्टोग्राम के हथाज़ारी में पुंडरीक धाम में अपनी मां संध्या रानी धर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की संक्षिप्त पैरोल दी गई थी, जहां संत को गहरे शोक में डूबा हुआ देखा गया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »