वाराणसी का जल पुलिस थाना खुद हुआ बाढ़ से प्रभावित, गंगा का जलस्तर घटने के बाद लगा गंदगी का अंबार

वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया है, लेकिन इसके बावजूद लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. वाराणसी का जल पुलिस थाना भी बाढ़ प्रभावित हो चुका है.

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दशाश्वमेध घाट पर स्थित वाराणसी का जल पुलिस थाना पहले ही बाढ़ की जद में आ चुका था. (Photo: ITG) दशाश्वमेध घाट पर स्थित वाराणसी का जल पुलिस थाना पहले ही बाढ़ की जद में आ चुका था. (Photo: ITG)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST

वाराणसी में अब गंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया है. जिसके चलते आफ्टर फ्लड इफेक्ट दिखने लगा है. 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में घटाव दर्ज किया जा रहा है, लेकिन बावजूद इसके लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है और तो और पीड़ितों और प्रभावितों में खुद वाराणसी का जल पुलिस थाना भी है. जहां गंगा का पानी नीचे उतरने के बाद पूरे जल पुलिस थाना को गंदगी, सिल्ट, गाद और कीचड़ ने अपनी जद में ले लिया है.

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जानकार भले ही हैरानी हो, लेकिन यह सच है कि वाराणसी का जल पुलिस थाना इन दिनों खुद बाढ़ प्रभावित हो चुका है. भले ही गंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया है और 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी नीचे उतर रहा है, लेकिन बाढ़ के पानी ने अपने पीछे मिट्टी गंदगी सिल्ट और कीचड़ का अंबार छोड़ दिया है. जिससे खुद वाराणसी का जल पुलिस थाना भी अछूता नहीं है. 

दशाश्वमेध घाट पर स्थित वाराणसी का जल पुलिस थाना पहले ही बाढ़ की जद में आ चुका था. जिसकी वजह से गंगा घाट के ऊपर अस्थाई तौर पर थाने को शिफ्ट किया गया है. जैसे ही बाढ़ का पानी नीचे उतरा है वैसे ही जल पुलिस थाना की नरकीय तस्वीर सामने आ गई. खाली पड़ा पूरा जल पुलिस थाना पूरी तरह से बाढ़ के साथ आई मिट्टी गंदगी सिल्ट और कीचड़ से भरा हुआ दिखा. 

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पूरा थाना किसी दलदल से कम नहीं नजर आ रहा था. ग्राउंड जीरो पर उतरकर इसकी सच्चाई दिखाने की कोशिश की गई तो तस्वीर हैरान करने वाली थी कि जिस जल पुलिस पर खुद पूरी तरह से गंगा में आई बाढ़ और लोगों की सुरक्षा की 24 घंटे जिम्मेदारी रहती है, उसका थाना खुद चिराग तले अंधेरा में डूबा हुआ था. 

नाविक शिवानंद साहनी ने बताया कि पानी घटना शुरू हो गया है. जिसकी वजह से घाटों पर गंदगी और सिल्ट का अंबार हो गया है. अब इसकी सफाई में भी एक महीने से ऊपर का वक्त लग जाता है. सफाई का काम गंगा आरती करने वाली संस्था और नगर निगम मिलकर लगातार करता है तो एक से डेढ़ महीने का वक्त सफाई होने में लग जाता है.

उन्होंने मांग की कि बाढ़ का पानी नीचे उतरा है तो कम से कम उनकी नावों पर बिठाकर श्रद्धालुओं को गंगा आरती दिखाने तक की छूट दी जाए. तो वहीं घाट पुरोहित लवकुश दुबे ने बताया कि अभी भी आशंका बनी हुई है की गंगा का पानी फिर बढ़ सकता है. इसलिए वह अपनी पूजा की चौकिया को नीचे नहीं ले जा रहे हैं. पूरे बारिश के मौसम में उनकी आजीविका प्रभावित होती है, लेकिन मां गंगा का आशीर्वाद बना रहता है.

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