ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार से बतौर मदरसा टीचर तनख्वाह, पेंशन और भत्ते ऐंठने वाले मौलाना शमशुल हुदा खान पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कस दिया है. ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मौलाना के खलीलाबाद स्थित 189.75 वर्ग मीटर के आवासीय प्लॉट को अटैच कर लिया है. इस अचल संपत्ति का अनुमानित मूल्य 53 लाख 46 हजार रुपये है.
जांच में सामने आया कि मौलाना शमशुल हुदा खान आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर स्थित एक अनुदानित मदरसे में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात था. उसने साल 2013 में ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी. भारतीय नागरिकता खत्म होने और ब्रिटेन का नागरिक बनने के बाद भी मौलाना ने यह बात यूपी सरकार और शिक्षा विभाग से छिपाए रखी.
मौलाना साल 2007 से लेकर 2017 तक कागजों पर नौकरी दिखाता रहा और ब्रिटेन में रहते हुए भी लगातार यूपी सरकार के खजाने से वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय भत्ते उठाता रहा. इस अवधि में उसने करीब 53.46 लाख रुपये की अवैध सरकारी राशि प्राप्त की, जिससे बाद में संतकबीर नगर के खलीलाबाद में प्लॉट खरीदा गया.
11 फरवरी 2026 की रेड के बाद मिला था सुराग
बता दें कि इसी साल 11 फरवरी 2026 को ईडी की टीमों ने संतकबीर नगर और अन्य संबंधित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान जब्त किए गए अहम दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर ही इस प्रॉपर्टी को चिन्हित कर अटैचमेंट की यह बड़ी कार्रवाई की गई है.
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि ब्रिटिश नागरिक के रूप में रह रहे मौलाना शमशुल हुदा खान के तार पाकिस्तान के कई कट्टरपंथी और आतंकवादी संगठनों से जुड़े होने का अंदेशा है.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मौलाना को कई बार पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों में देखा गया है. अब ईडी और केंद्रीय एजेंसियां इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि सरकारी खजाने से ठगे गए इस पैसे का इस्तेमाल कहीं देश विरोधी गतिविधियों में तो नहीं किया जा रहा था.
संतोष शर्मा