यूपी में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है. 9 अगस्त को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार 9 अगस्त को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की बहुत संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. दोनों हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश की भी बहुत संभावना जताई गई है.
मौसम विभाग के प्रभाव आधारित पूर्वानुमान में 9 अगस्त को बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, सहारनपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना अधिक बताई गई है. यानी 9 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदल सकता है और लोगों को बारिश के साथ जलभराव जैसी स्थितियों का भी सामना करना पड़ सकता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए 9 अगस्त को मौसम विभाग ने कहीं-कहीं बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की बहुत संभावना जताई है. इसके साथ ही कहीं-कहीं भारी बारिश की भी बहुत संभावना है.
इसका मतलब है कि पश्चिमी यूपी के सभी जिलों में लगातार बारिश की स्थिति नहीं होगी, बल्कि कुछ स्थानों पर बारिश देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 अगस्त को सहारनपुर में भारी बारिश की संभावना अधिक है. इसके अलावा जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भी भारी बारिश हो सकती है. इन जिलों के आसपास के क्षेत्रों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है.
पूर्वी यूपी में भी बारिश का असर
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए भी 9 अगस्त को मौसम पूरी तरह शुष्क रहने का संकेत नहीं है. यहां कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की बहुत संभावना है. मौसम विभाग ने पूर्वी यूपी में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की बहुत संभावना जताई है. प्रभाव आधारित पूर्वानुमान के अनुसार सोनभद्र और मिर्जापुर में 9 अगस्त को भारी बारिश की संभावना अधिक है. इनके आसपास के क्षेत्रों में भी भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा बांदा, चित्रकूट और प्रयागराज में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है.
9 अगस्त के लिए मौसम विभाग ने जिन जिलों में भारी बारिश की संभावना अधिक बताई है, उनमें बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, सहारनपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर** शामिल हैं. इन जिलों के आसपास के इलाकों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. ऐसे में इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम के बदलाव पर नजर रखने की जरूरत है. खासकर निचले इलाकों और उन जगहों पर जहां बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या रहती है, वहां अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है.
मौसम विभाग की ओर से जारी इस पूर्वानुमान में अलग-अलग जिलों के लिए धूप निकलने का जिलेवार विवरण नहीं दिया गया है. इसमें बारिश, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना बताई गई है. इसलिए 9 अगस्त को पूरे उत्तर प्रदेश में एक जैसा मौसम रहने की बात नहीं कही जा सकती. पश्चिमी यूपी में कहीं-कहीं बारिश और गरज-चमक वाली बौछारों की संभावना है, जबकि पूर्वी यूपी में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं. यानी मौसम क्षेत्रवार बदल सकता है. कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत अलग रह सकता है.
मानसून की द्रोणी और कम दबाव का असर
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर मध्य क्षोभमंडल तक विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से निम्न दबाव क्षेत्र बनने और मानसूनी द्रोणी के अपनी सामान्य स्थिति के निकट रहने का प्रभाव मौसम पर पड़ रहा है. मानसूनी द्रोणी श्रीगंगानगर, दिल्ली, निम्न दबाव क्षेत्र के केंद्र, रांची और दीघा होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक जा रही है. इसके साथ ही दक्षिणी गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे लगे बांग्लादेश के आसपास ऊपरी क्षोभमंडल तक विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण भी बना हुआ है. इसके प्रभाव से तटीय गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे लगे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर एक और निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है. इसके बाद इसके मानसूनी द्रोणी की धुरी के साथ पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि इन मौसमी परिस्थितियों के कारण अगले 4-5 दिनों के दौरान खासकर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी प्रवाह मजबूत रह सकता है. इसी वजह से कहीं-कहीं भारी बारिश की स्थिति बन सकती है.
9 अगस्त की बारिश के बाद भी जारी रहेगा असर
मौसम विभाग के अगले दिनों के पूर्वानुमान को देखें तो बारिश का असर सिर्फ 9 अगस्त तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. 10 अगस्त को भी पश्चिमी और पूर्वी दोनों उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की बहुत संभावना है. दोनों हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश की भी बहुत संभावना जताई गई है. 11 अगस्त को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. 11 अगस्त को पश्चिमी यूपी में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी यूपी के लिए इस दिन कोई चेतावनी नहीं दी गई है. मौसम विभाग ने भारी बारिश के संभावित प्रभावों में निचले इलाकों और सुरंगों में जलभराव, कच्चे, असुरक्षित और अस्थायी ढांचों को आंशिक नुकसान तथा बिजली व्यवस्था में व्यवधान की आशंका जताई है. भारी बारिश के दौरान फिसलन भरी कच्ची सड़क और खराब दृश्यता के कारण सड़क यातायात में मामूली व्यवधान भी हो सकता है. इसके अलावा मौसमी नालों और नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है. वृक्षारोपण और बागवानी फसलों को भी मामूली नुकसान की आशंका जताई गई है. कुछ मामलों में संपत्ति को भी नुकसान हो सकता है.
भारी बारिश की स्थिति में मौसम विभाग ने अचानक आने वाली बाढ़ की संभावना वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है. लोगों को पक्के या सुरक्षित मकानों में आश्रय लेने और अस्थायी तथा असुरक्षित संरचनाओं को सुरक्षित करने या उन्हें खाली करने की सलाह दी गई है. बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था रखने और यातायात में संभावित देरी से बचने के लिए पहले से योजना बनाने को कहा गया है. लोगों को मौसमी नदी-नालों से दूर रहने तथा खतरे के निशान के आसपास बह रही नदियों से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है. गड्ढों, पोखरों और ऐसे तालाबों में नहाने से बचने को कहा गया है, जिनमें बाहर से पानी आता हो.
किसानों के लिए भी जरूरी है सावधानी
भारी बारिश का असर खेती पर भी पड़ सकता है. मौसम विभाग के अनुसार गन्ने की फसल में जलभराव से जड़ सड़ने और फसल गिरने की संभावना हो सकती है. अरहर में अधिक नमी से जड़ गलने और पत्तियों के पीले पड़ने की आशंका है. खरीफ मक्का में जलभराव से पौधों के गिरने और जड़ों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. धान की रोपी गई फसल भी भारी बारिश से प्रभावित हो सकती है. खेत में जल निकासी बनाए रखने और क्षतिग्रस्त पौधों की जगह उपलब्ध होने पर दोबारा रोपाई करने की सलाह दी गई है. मूंगफली और तिल जैसी फसलों में भी अधिक पानी से जड़ और तना गलने तथा बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
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