उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी है. भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद डीजीपी मुख्यालय ने उन पुलिसकर्मियों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है, जो एक ही जिले में तीन साल या उससे ज्यादा समय से तैनात हैं. इस प्रोसेस के तहत सिपाही से लेकर एडिशनल एसपी रैंक तक के 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के तबादले हो सकते हैं. वहीं, 20 से ज्यादा आईपीएस अधिकारियों के भी इसकी जद में आने का अनुमान है.
पुलिस मुख्यालय की स्थापना शाखा ने सभी पुलिस कमिश्नरेट और जिलों से संबंधित पुलिसकर्मियों की तैनाती का रिकॉर्ड मांगा है. इसका मकसद उन अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना है, जो निर्वाचन आयोग के तय मानकों के दायरे में आते हैं. तबादलों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी भी गठित की जा सकती है.
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निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, एक ही जिले में तीन साल से तैनात पुलिसकर्मियों को हटाया जा सकता है. इसके अलावा गृह जिले में तैनात कर्मचारियों को भी दूसरी जगह भेजने के निर्देश हैं. ऐसे पुलिसकर्मी भी तबादले के दायरे में आ सकते हैं, जिनकी तैनाती पिछले चुनाव के दौरान किसी जिले में थी और वे अब भी उसी जिले में तैनात हैं.
आयोग के निर्देशों के तहत उन पुलिसकर्मियों के मामलों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिनके खिलाफ किसी राजनीतिक दल के प्रति पक्षपात या पूर्वाग्रह को लेकर शिकायतें हैं. ऐसे मामलों में संबंधित शिकायतों और लागू नियमों के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है.
चुनाव से पहले पूरी होगी प्रक्रिया
विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में सरकारी मशीनरी में फेरबदल की तैयारी की जा रही है. चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले आयोग के मानकों के दायरे में आने वाले पुलिसकर्मियों को दूसरी जगह तैनात करने की योजना है. हालांकि, अभी 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों और 20 से अधिक आईपीएस अधिकारियों के तबादले संभावित बताए जा रहे हैं. अंतिम संख्या संबंधित जिलों से मिलने वाले ब्योरे और आगे की स्क्रीनिंग के बाद ही स्पष्ट होगी.
आशीष श्रीवास्तव